नोएडा में शुक्रवार से चल रहा कपड़ा उद्योग के श्रमिकों का विरोध-प्रदर्शन सोमवार सुबह हिंसक हो गया। नोएडा फेज-2 में हुए इस उग्र विरोध प्रदर्शन में पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सैलरी इतनी कम है कि उससे रोजमर्रा के खर्चे भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनियां उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।

आपको बता दें यह विरोध प्रदर्शन शुक्रवार से शुरू हुआ था। इसमें शामिल मजदूर गारमेंट इंडस्ट्री और निर्यात कारोबार से जुड़े हुए हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने इस विरोध-प्रदर्शन से जुड़े तीन कर्मचारियों से बात की है।

13000 रुपये में सब कुछ कैसे मैनेज करें?

18 साल के सुरेंद्र कश्यप यूपी के संभल से ताल्लुक रखते हैं। सुरेंद्र नोएडा के सेक्टर-49 में एक कपड़ा फैक्ट्री में मेजरमेंट चेकर हैं। उनका कहना है कि गुड़गांव के मानेसर में काम कर रहे कर्मचारियों को 8 घंटे के काम के लिए 20,000 रुपये मिल रहे है। तो हमारी सैलरी क्यों नहीं बढ़ रही?

सैलरी के बारे में पूछे जाने पर सुरेंद्र ने बताया, ”मैं 13,000 रुपये कमाता हूं और 4000 रुपये किराये में चले जाते हैं। गैस अब 400 रुपये हो गई है, हम सब कुछ कैसे मैनेज करें?”

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उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कंपनी द्वारा तय किया गया टारगेट बहुत ज्यादा अवास्तविक है। उन्होंने कहा, ”वे एक घंटे में 70 पीस का टारगेट तय करते हैं और अगर हम पूरा नहीं कर पाते तो हमें अपमानित किया जाता है। सालों से केवल 320 रुपये की मामूली बढ़ोतरी दी गई है… हमें रात में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है… अगर हम बीमार पड़ जाएं तो कहते हैं अगली बार मत आना और अगर हम रविवार को काम नहीं करते तो नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं।”

39 रुपये बढ़ी सैलरी

एक्सपोर्ट लाइन में काम करने वाले राहुल यूपी के कन्नौज से हैं और नोएडा मे 2018 से नौकरी कर रहे हैं। राहुल शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे हैं जिनकी उम्र तीन और एक साल है। राहुल ने कहा, ”मैं 13,500 रुपये कमाता हूं- मैं कुछ भी पैसा नहीं बचा पता और ना ही घर भेज पाता हूं। 5000 रुपये कमरे का किराया और 4000 रुपये राशन में चले जाते हैं। कुछ पैसा पीएफ में कट जाता है और आखिर में 4 लोगों के परिवार के लिए कुल 3000 रुपये मेरे पास बचते हैं। मैं कैसे मैनेज करूं? बच्चों को मैं कैसे पढ़ाऊं?”

राहुल ने आगे बताया, ”पिछले साल, मेरी सैलरी 39 रुपये बढ़ी थी! एचआर हमारी बात नहीं सुनता।”

5000 रुपये में मिल रहा सिलेंडर

कारीगरी का काम करने वाले 28 वर्षीय मोहम्मद नूर आलम बिहार के सीतामढ़ी से हैं। आलम ने बताया, ”मैं 20 हजार रुपये कमाता हूं लेकिन कुछ भी बच नहीं पाता…मैं अपनी मां को एक पैसा भी नहीं भेज पाता। सब कुछ इतना महंगा है कि सारा पैसा रोजमर्रा के खर्चे पूरा करने में ही चले जाते हैं।”

नूर आलम ने बताया कि वह पहले 15 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर चावल खरीदते थे। उन्होंने कहा, ”हम इस सरकार को यह सोचकर चुना कि दाम कम होंगे। अब, हमें ब्लैक मार्केट में एक सिलेंडर 5000 रुपये में मिल रहा है। मान लिया कि गैस की परेशानी युद्ध की वजह से है, लेकिन सिलेंडर के अलावा दूसरी चीजों का क्या? वो क्यों महंगी हो रही हैं? हमें अभी भी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं।”

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उत्तर प्रदेश के नोएडा के फेज-2 क्षेत्र में सोमवार को तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। यहां एक कंपनी के कर्मचारी बड़ी संख्या में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू हो गए। कुछ लोगों ने वाहनों और संपत्तियों में तोड़फोड़ की। साथ ही पथराव भी किया। पढ़ें पूरी खबर…