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इराक में अगवा सभी 39 भारतीय सुरक्षित, विदेश मंत्री ने संसद को किया आश्वस्त

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा व राज्यसभा में कहा कि इराक में अगवा किए गए सभी भारतीय बंधक सुरक्षित हैं। इससे पहले इराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट (आइएस) की कैद में फंसे 39 भारतीयों की हत्या कर दिए जाने संबंधी मीडिया में आई खबरों को लेकर शुक्रवार को संसद में विभिन्न दलों ने […]

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा व राज्यसभा में कहा कि इराक में अगवा किए गए सभी भारतीय बंधक सुरक्षित हैं। इससे पहले इराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट (आइएस) की कैद में फंसे 39 भारतीयों की हत्या कर दिए जाने संबंधी मीडिया में आई खबरों को लेकर शुक्रवार को संसद में विभिन्न दलों ने गंभीर चिंता जताई। पर विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार का जिन छह सूत्रों से संपर्क है, उनका कहना है कि भारतीय बंधक जीवित और सुरक्षित हैं।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर दिए बयान में कहा कि भले ही सरकार का बंधकों से कोई सीधा संपर्क नहीं है लेकिन छह सूत्रों का दावा है कि वे जीवित हैं। उन्होंने कहा कि इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं हैं कि बंधक जीवित हैं या मारे गए। ऐसे में हम उन्हें जीवित मान कर उनकी तलाश और रिहाई के प्रयास जारी रखे हुए हैं।

विदेश मंत्री ने एक समाचार चैनल की बंधक बनाए गए 39 भारतीयों को जून में ही मारे जाने की खबर के बारे में कहा कि मीडिया में पहले भी इस तरह की खबरें आती रही हैं। सारी खबरें उस हरजीत मसीह के बयान पर आधारित हैं जिसके बयान में काफी विरोधाभास है जबकि सरकार के संपर्क वाले सूत्रों ने गुरुवार रात तक यह दावा किया है कि भारतीय बंधक जीवित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास दो विकल्प हैं। पहला विकल्प यह है कि हरजीत के बयान पर भरोसा कर उन 39 लोगों की तलाश बंद कर दी जाए। दूसरा विकल्प यह है कि हम उन छह सूत्रों की बात पर भरोसा कर तलाश जारी रखें जिन्होंने गुरुवार रात तक यह दावा किया है कि बंधक बनाए गए 39 भारतीय जीवित हैं।

सुषमा ने कहा कि भारत सरकार ने दूसरा विकल्प चुना और अगवा भारतीयों की तलाश में जमीन-आसमान एक कर रखा है। उन्होंने कहा कि 39 भारतीयों के जीवित होने के सूत्रों के दावों से संबंधित लिखित संदेश गोपनीय हैं और उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। इसलिए इन्हें गोपनीयता की शपथ लेने वाले दो लोगों वित्त मंत्री अरुण जेटली और शिरोमणि अकाली दल की नेता व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर से साझा किया गया है।
कई सदस्यों ने बंधकों के रखे जाने के स्थान के बारे में पूछा जिसके जवाब में सुषमा ने कहा कि इनका खुलासा न केवल गोपनीयता बल्कि इस तथ्य के चलते भी नहीं किया जा सकता है कि अगर इसे सार्वजनिक किया गया तो सूत्रों का सिर कलम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सूत्रों से मिले संदेश मौखिक नहीं, लिखित हैं।

हरजीत मसीह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वह सरकार की ‘संरक्षणात्मक निगरानी’ में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि गोपनीयता के चलते इस बारे में नहीं बताया जा सकता लेकिन वह ‘ठीक ठाक और सुरक्षित’ है। समाचार चैनलों में दो बांग्लादेशियों के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन दोनों ने भी अपनी बात में हरजीत के बयान को ही आधार बनाया है जबकि खुद हरजीत के बयान में कई विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा कि इस कहानी के अनुसार आइएस के आतंकवादियों ने इराक के मोसुल में एक कंपनी में काम कर रहे भारतीयों और बांग्लादेशियों को बंधक बनाया था। बाद में दोनों देशों के नागरिकों को अलग कर बांग्लादेशियों को छोड़ दिया गया। भारतीय बंधकों को किसी पहाड़ी पर ले जाकर उन्हें गोली मार दी गई। सुषमा ने कहा कि कहानी के अनुसार हरजीत ने मरे होने का नाटक कर अपनी जान बचाई और वह किसी तरह बच निकला।

सुषमा ने कहा कि सरकार बंधकों के परिवारों से पांच बार मिल चुकी है और इराक में भारत के एक पूर्व राजदूत सुरेश रेड्डी को इन बंधकों को छुड़ाने का प्रयास करने के लिए भेजा गया। अब इस काम के लिए दो और अधिकारियों को भेजा गया है जो अरबी भाषा बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस काम में पूर्व विदेश राज्य मंत्री ई अहमद की भी मदद ली गई है क्योंकि अरब क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान है। उन्होंने कहा कि सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है।
इससे पहले दोनों सदनों में सदस्यों ने मीडिया खबरों के आधार पर इन भारतीयों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। उच्च सदन में कांग्रेस के आनंद शर्मा, प्रमोद तिवारी, जद (एकी) के केसी त्यागी सहित कई सदस्यों ने सरकार से यह जानना चाहा कि जब मीडिया में आई खबरों के अनुसार इन भारतीय बंधकों को जून में ही मारा जा चुका था तो उसने संसद में यह बयान कैसे दिया कि वे सुरक्षित हैं।

आनंद शर्मा ने सरकार पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया जबकि सपा के रामगोपाल यादव ने कहा कि सरकार राजनयिक मोर्च पर विफल रही है। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में संसद में जो बयान दिया था, उससे ‘शार्ट टर्म गेन’ (अल्पावधि फायदे) के लिए देश को ‘लांग टर्म पेन’ (दीर्घावधि पीड़ा) मिला। इस मामले में बसपा नेता मायावती, माकपा के पी राजीव, शिरोमणि अकाली दल के एसएस ढींढसा, बीजद के भूपेंद्र सिंह, कांग्रेस के राजीव शुक्ला, राकांपा के माजिद मेनन, सपा की जया बच्चन और जद (एकी) के शरद यादव ने भी इराक में बंधक बनाए गए भारतीयों के भविष्य को लेकर सरकार से विभिन्न सवाल किए। लोकसभा में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी विदेश मंत्री के बयान से पहले सरकार पर इस मामले में देश को गुमराह करने का आरोप लगाया था।

सुषमा की दलीलें

* भले ही सरकार का बंधकों से कोई सीधा संपर्क नहीं है लेकिन गुरुवार रात तक छह सूत्रों ने हमें बताया कि वे जीवित हैं। सूत्रों से मिले संदेश मौखिक नहीं, लिखित हैं। पर हम ये भी नहीं कह सकते कि ये जानकारियां बिलकुल पुख्ता हैं।

* मीडिया में पहले भी इस तरह की खबरें आती रही हैं। समाचार चैनल दो बांग्लादेशियों के हवाले से बंधकों के मारे जाने की खबर चला रहे हैं पर इन दोनों ने भी अपनी बात में हरजीत के बयान को ही आधार बनाया है। जबकि खुद हरजीत के बयान में कई विरोधाभास हैं।

* सरकार के पास दो विकल्प हैं। या तो हम मीडिया पर भरोसा कर चुप बैठ जाएं या अपने सूत्रों पर भरोसा करते हुए बंधकों की तलाश जारी रखें। हमने दूसरा रास्ता चुना और उनकी तलाश में जमीन-आसमान एक किए हुए हैं।

* बंधकों की जानकारी देने वाले सूत्रों के बारे में बताया नहीं जा सकता। जानकारी सार्वजनिक की गई तो उनका सिर कलम किया जा सकता है।

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