करीब 38 साल तक एक मामला थाइप्परमबाइल एंटनी को परेशान करती रही। यह मामला 14 दिसंबर 1986 का था जब वह मात्र 14 साल के थे। एंटनी पर आरोप है कि उन्होंने अपने साथी पडिक्कापरम्बिल मोहनन को केरल के कोझिकोड जिले के कूडारंजी गांव में एक नदी में धक्का दे दिया था। समय बीतता गया और जिंदगी बदल गई। एंटनी ने बाद में धर्म परिवर्तन कर अपना नाम मुहम्मदअली रख लिया, परिवार बसाया और नई पहचान के साथ जीवन जीने लगे। लेकिन अतीत की यह घटना उन्हें लगातार परेशान करती रही।
आखिरकार, पिछले साल जून में मुहम्मदअली पुलिस के पास गए और कथित तौर पर अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद जांचकर्ताओं ने एक साल तक पुरानी यादों, पुराने दस्तावेजों, 1986 की एक छोटी अखबार की कतरन और पीड़ित के एक स्केच की मदद से यह समझने की कोशिश की कि 38 साल पहले मोहनन के साथ वास्तव में क्या हुआ था।
क्यों और कैसे हुआ हादसा
जांचकर्ताओं के अनुसार, मुहम्मदअली (तब एंटनी) और 22 वर्षीय मोहनन एक स्थानीय किसान के खेत में मजदूरी का काम करते थे। काम के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था।
थिरुवंबाडी पुलिस स्टेशन के प्रभारी के. प्रशांत ने बताया, “जब मोहनन ने कथित तौर पर मुहम्मदअली के साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश की तो मुहम्मदअली ने उसे नदी में धक्का दे दिया जिससे वह डूब गया।”
उन्होंने बताया कि मोहनन मूल रूप से कन्नूर जिले के कुडियानमाला का रहने वाला था और घटना से कुछ दिन पहले ही कूडारंजी आया था। इसलिए लोगों को शव की पहचान नहीं हो सकी। शव का अंतिम संस्कार लावारिस (अज्ञात) मानकर कर दिया गया और मामला बंद कर दिया गया। इस घटना का मुहम्मदअली के जीवन पर गहरा असर पड़ा। घटना के बाद वह घर छोड़कर भाग गए और केरल व तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों में छोटे-मोटे काम करने लगे।
बाद में उन्होंने ईसाई धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म अपना लिया, अपना नाम मुहम्मदअली रख लिया और मलप्पुरम जिले के वेंगरा में बस गए। मौजूदा समय में वह नारियल के पेड़ों पर चढ़कर काम करने का रोजगार करते हैं।
मन का बोझ, लगातार परेशान करती रही घटना
हालांकि, यह घटना उन्हें लगातार परेशान करती रही। उनके चार बच्चों में से एक की 9 साल की उम्र में मौत हो गई जिससे उनके मन का बोझ और बढ़ गया।
मुहम्मदअली ने कहा, “मैं कई साल पहले ही अपना अपराध स्वीकार करना चाहता था लेकिन मैंने इंतजार किया ताकि मेरे बच्चे बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। मेरी बेटी की शादी हो चुकी है और मेरे दो बेटे नौकरी करते हैं। अब मुझ पर कोई जिम्मेदारी नहीं है, इसलिए मैंने हत्या के बारे में बताने का फैसला किया।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरी पहली पत्नी मुझे छोड़कर चली गई थी। मेरे बेटे की मौत के बाद मुझे अपना अपराध स्वीकार करने की भावना और मजबूत हो गई।”
मुहम्मदअली के कथित कबूलनामे के बाद कोझिकोड की थिरुवंबाडी पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। कुछ समय बाद उन्हें जमानत मिल गई। इस दौरान पीड़ित के बारे में उनकी धुंधली यादों के आधार पर पुलिस ने एक स्केच भी तैयार किया।
मुहम्मदअली के इस कथित कबूलनामे ने सिर्फ पुलिस का ही नहीं बल्कि मोहनन के परिवार का भी ध्यान खींचा। 1986 में मोहनन के गायब होने के बाद लगभग एक साल तक कन्नूर के कुडियानमाला में उनका परिवार यह नहीं समझ पाया कि उनसे कोई संपर्क क्यों नहीं हो रहा है। फिर एक दिन उनके पिता ने मोहनन के एक पत्र पर कूडारंजी डाकघर की मुहर देखी और वहां जाने का फैसला किया।
थाना प्रभारी के. प्रशांत ने बताया, “वहां उन्होंने जांच के दौरान ली गई अपने बेटे की तस्वीर देखी और उसे पहचान लिया। चूंकि मोहनन को मिर्गी (एपिलेप्सी) की बीमारी थी, इसलिए उन्हें लगा कि दौरा पड़ने के बाद वह पानी में गिर गया और उसकी मौत हो गई।”
अब क्या कर रही पुलिस
1986 में मोहनन के लापता होने के बाद उनके परिवार को सच्चाई का पता नहीं चल पाया था। लेकिन जब उन्होंने मुहम्मदअली के कथित कबूलनामे से जुड़ी खबरें देखीं, तब पूरी कहानी धीरे-धीरे सामने आने लगी।
इस बीच, पुलिस 1986 की एक छोटी अखबार की खबर के आधार पर पहले ही मोहनन के परिवार को खोजने की कोशिश शुरू कर चुकी थी।
थाना प्रभारी के. प्रशांत ने बताया, “चूंकि कथित हत्या की वजह यौन उत्पीड़न की कोशिश बताई गई थी, इसलिए मोहनन का परिवार सामने आने में हिचकिचा रहा था। बाद में जिस किसान के यहां दोनों काम करते थे, उसके परिवार ने बताया कि उनमें से एक व्यक्ति कन्नूर का रहने वाला था। इसके बाद पुलिस वहां पहुंची।”
पुलिस के पास हत्या से जुड़ा कोई वैज्ञानिक या फोरेंसिक सबूत नहीं है। जांच मुख्य रूप से मुहम्मदअली के कथित कबूलनामे और उनके पूर्व नियोक्ता तथा मोहनन के परिवार के बयानों पर आधारित है।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “मुहम्मदअली का कहना है कि उनसे यह घटना 14 साल की उम्र में हुआ था। इसलिए हम कानूनी पहलुओं की भी जांच कर रहे हैं जिसमें यह देखना शामिल है कि क्या इस मामले में किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के प्रावधान लागू होंगे।”
पुलिस ने यह भी बताया कि मुहम्मदअली ने पिछले साल 1989 में हुई एक और कथित हत्या की बात स्वीकार की थी लेकिन जांच में कोई सुराग नहीं मिलने के कारण उस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
वहीं, मुहम्मदअली का कहना है कि पुलिस के पास जाने के बाद उन्हें मानसिक शांति मिली है। उन्होंने कहा, “अब मोहनन का परिवार उनकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर सकता है। अगर अनुमति मिली तो मैं उनके परिवार से मिलकर माफी मांगना चाहता हूं। साथ ही, मैं कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए भी तैयार हूं। अब मैं खुद को संतुष्ट और राहत महसूस करने वाला इंसान मानता हूं।”
