देश में हर दिन करीब साढ़े तीन सौ महिलाएं व किशोरी निजी या सार्वजनिक स्थानों पर शारीरिक, यौन, भावनात्मक शोषण व हिंसा का सामना कर रही हैं। ऐसी महिलाओं की मदद के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने साल 2015 में वन स्टॉप सेंटर योजना (सखी केंद्र) को शुरू किया था। यहां पिछले दस सालों में 13.37 लाख से अधिक पीड़ितों को चिकित्सा, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और आश्रय संबंधी सहायता दी गई है।

अधिकारियों की मानें, तो इन केंद्रों पर महिलाएं व किशोरी घर, कार्यस्थल वा सार्वजनिक स्थानों पर घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, बलात्कार, दहेज प्रताड़ना, एसिड अटैक, मानव तस्करी और ऑनर किलिंग जैसी शिकायतें रखती हैं। उनका कहना है कि देश भर में अभी भी काफी महिलाएं अपने ऊपर होने वाली हिंसा की शिकायत नहीं करतीं। ऐसी महिलाओं तक पहुंचने के लिए सखी केंद्रों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ही 802 सखी केंद्रों ने 1.71 लाख से अधिक महिलाओं की मदद की थी।

इस दौरान 35 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में महिला हेल्पलाइन पर 5729106 फोन आए थे। वहीं 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में 926 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) सुविधाएं दे रहे हैं। इनमें 31 दिसंबर 2025 तक 13.37 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता दी जा चुकी है। साथ ही देशभर के पुलिस स्टेशनों में 15049 महिला हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। इनमें से 14363 का संचालन महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।

महिलाओं को आपातकालीन और अन्य सहायता सेवाएं प्रदान करने के लिए महिला हेल्पलाइन-181 और ईआरएसएस-112 संचालित किए जा रहे हैं। इस महिला हेल्पलाइन ने अब तक 2.88 करोड़ से अधिक फोन पर मदद की गई। वहीं 99.09 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की है। एक उत्तर में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर का कहना है कि केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इस दिशा में कई विधायी और नीतिगत कदम उठाए हैं।

न्याय पाना अभी भी जटिल

नई दिल्ली स्थित वन स्टॉप सेंटर योजना में मदद पा रही एक पीड़िता के परिजन का आरोप है कि सुविधाएं होने के बाद भी न्याय पाना जटिल है। पीड़िता की मदद किस स्तर पर होगी यह आरोपी के रसूख पर निर्भर करता है। यदि आरोपी क्षेत्र में दबंग हैं तो सुनवाई होना मुश्किल है। आप कितनी भी कोशिश कर लीजिए मदद मिलेगी यह तय नहीं, यदि किसी तरह से केंद्र तक पहुंच भी जाए तो लंबी लड़ाई पीड़िता और उनके परिवार को तोड़ देती है। ऐसे में गरीब चाह कर भी आवाज उठाने से डरता है।

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इटावा जनपद के भरेह इलाके के कायंछी गांव में आजादी के बाद पहली बार सड़क निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। लोक निर्माण विभाग ने सड़क के निर्माण के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है, जिससे गांववासियों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कच्ची सड़क के जरिए अब गांव तक नहीं पहुंचना पड़ेगा और गांव मुख्य मार्ग से जुड़ जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…