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पांच राज्यों को जोड़कर बाघों के लिए बने 32 ‘कारिडोर’

देश में बाघों के संरक्षण के लिए बने विशेष कारिडोर में हरित क्षेत्र में बढ़ा है।

सांकेतिक फोटो।

देश में बाघों के संरक्षण के लिए बने विशेष कारिडोर में हरित क्षेत्र में बढ़ा है। बाघ एक राज्य से दूसरे राज्य तक आ जा सके और इनकी संख्या में इजाफा किया जा सके। इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बाघों के लिए इन विशेष कारिडोर का निर्माण किया है। पांच राज्यों को आसपास में जोड़ने वाले ऐसे 32 कारिडोर है। हाल ही में केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में सामने आया है कि इन कारिडोर से बाघों की संख्या बढ़ने के साथ साथ हरित क्षेत्रों में भी इजाफा हुआ है।

रिपोर्ट बताती है कि 32 बाघ कारिडोर 14,289.37 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैले हुए है। यह देश की भौगोलिक स्थिति का 1.62 फीसद वन क्षेत्र हैं। वर्ष 2011 और 2021 के बीच देश में वन क्षेत्र 37.15 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है जो कि करीब 0.32 फीसद की बढ़ोतरी है। केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक इन कारिडोर का निर्माण राज्यों के साथ साथ आसपास के देशों को भी जोड़ रहा है। इनमें भारत के आसपास नेपाल, भूटान, बंगलादेश, रशिया, समेत आसपास के 13 देश जुड़े हुए है। इन देशों व राज्यों में आसानी से बाघ व अन्य वन्य प्राणी आसानी से आ जा सकते हैं। इन कारिडोर में सबसे अधिक बाघों की संख्या उत्तराखंड व यूपी, मध्य प्रदेश, कर्नाटक व असम के राज्यों में दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा वन क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में बढ़ा है। इसके बाद छत्तीस गढ़, ओडिसा, कर्नाटक और मिजोरम राज्य का नंबर पर है। देश में वन और झाड़ियों की स्थिति देखें तो यह 74710.53 वर्ग किलोमीटर कुल क्षेत्र है। इस क्षेत्र में 16441.51 घना वन क्षेत्र, 26856.71 सामान्य वन क्षेत्र, 12365.05 वर्ग किलोमीटर खुला वनक्षेत्र है। इस प्रकार कुल वन घना वन क्षेत्र 56,666.27 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 1333.58 वर्ग किलोमीटर एरिया में झाड़ियां और 17704.68 वर्ग किलोमीटर एरिया गैर वन क्षेत्र के दायरे में आता है।

हरित क्षेत्रों को बचाने के लिए हो रहा है सेटेलाइट सिस्टम का प्रयोग

हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय सेटेलाइट सिस्टम की मदद ले रहा है, इसकी मदद से जंगलों में लगने वाली आग को रोका जा रहा है। मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि जून से नवंबर के बीच वनों में आगजनी की घटनाएं अधिक होती है। निगरानी सिस्टम की मदद से नवम्बर 2020 से जून 2021 तक नए सिस्टम की मदद से 3,45,989 आग लगने की घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लिया गया है। इससे आग बढ़ने की घटनाओं को रोका है, जो हरित क्षेत्र विकसित होने में अधिक मददगार साबित हुआ है।

देश में करीब 35.46 फीसद क्षेत्र ऐसा है, जो आग लगने की घटनाओ के अनुकूल है। इसमें करीब 7,13,783.03 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल हैं। इसमें सबसे अधिक आगजनी क्षेत्र का फीसद 11.61 फीसद है, जो कि 82 हजार वर्ग किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र में फैला है। सिस्टम को ईमेल, फोन व आनलाइन तंत्र की मदद से संचालित किया जाता है।

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