ताज़ा खबर
 

जनवरी से जुलाई तक 30 लाख लोग हुए बेरोजगार, पर नौकरी मांगने वालों की संख्‍या भी घटी

साल 2014 के चुनावों के दौरान पीएम पद के उम्मीदवार और मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी ने युवा बेरोजगारों से प्रति वर्ष 1 करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
युवाओं में अब नौकरी के प्रति आकर्षण घटा है। शायद यही वजह है कि बेरोजगार युवक फिलहाल नौकरियां नहीं ढूंढ रहे हैं। इसका खुलासा एक सर्वे में हुआ है।

भारत में युवाओं के बीच नौकरी को लेकर नया ट्रेंड स्थापित हुआ है। युवाओं में अब नौकरी के प्रति आकर्षण घटा है। शायद यही वजह है कि बेरोजगार युवक फिलहाल नौकरियां नहीं ढूंढ रहे हैं। इसका खुलासा एक सर्वे में हुआ है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के मुताबिक, जनवरी 2017 में देश में कुल 40.84 करोड़ लोगों के पास रोजगार था जिनकी संख्या जुलाई 2017 में घटकर 40.54 करोड़ रह गई। यानी सात महीने के अंतराल में रोजगार में करीब 30 लाख की गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी 2017 में नौकरी ढूंढ़ने वाले बेरोजगारों की संख्या 2.59 करोड़ थी जो जुलाई में घटकर 1.37 करोड़ रह गई। यानी बेरोजगारों में अब नौकरी को लेकर ज्यादा आकर्षण नहीं रहा।

अब सवाल उठता है कि बेरोजगार युवकों ने नौकरियां ढूंढ़नी क्यों कम कर दी? इसकी एक वजह तो यह सामने आई है कि अब युवा नौकरी से ज्यादा अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। इनके अलावा सरकारी योजनाओं की वजह से भी रोजगार के प्रति नरमी पैदा हो सकती है। मौजूदा केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इन्टरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दिया है और शायद इस वजह से युवा किसी के नियंत्रण में रहकर नौकरी करने के बजाय अपना छोटा व्यवसाय करना बेहतर समझ रहे हैं।

इनके अलावा एक वजह यह भी हो सकती है कि युवा और अधिक पढ़ना चाहते हों, वो आधुनिकतम तकनीक से खुद को लैस करना चाहते हों क्योंकि हाल के दिनों में नई तकनीक का बाजार ने पुरजोर स्वागत किया है। विकसित देशों में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि जब मार्केट में स्लो डाउन चल रहा होता है, तब लोग अपने को दोबारा स्किल्ड करते हैं। हो सकता है कि भारत में भी ऐसी ही स्थिति हो। लेकिन इन दोनों यानी युवा अगर ना तो उच्च अध्ययन की तरफ जा रहे हैं और ना ही इन्टरप्रेन्योर बन रहे हैं, तब इसका मतलब है कि वो कुछ नहीं कर रहे हैं। यानी एक नया ट्रेंड स्थापित हो रहा है जो खतरनाक है। जिन राज्यों में यह ट्रेंड मिला है उनमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा शामिल हैं जो कम विकसित राज्य कहलाते हैं।

बता दें कि साल 2014 के चुनावों के दौरान पीएम पद के उम्मीदवार और मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी ने युवा बेरोजगारों से प्रति वर्ष 1 करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था लेकिन उनकी सरकार के तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं, आजतक यह साफ नहीं हो सका है कि मोदी सरकार ने कितने लोगों को अब तक नौकरी दी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. L
    Lokesh Pal
    Aug 11, 2017 at 6:51 pm
    सरकारी वैकेंसी निकलती है तो फार्म डालने का खर्च करीब ५०० से १००० रुपए आता है। ऐसे में एक बेरोजगार युवक कहां से अप्लाए करे।
    (0)(0)
    Reply
    1. L
      Lokesh Pal
      Aug 11, 2017 at 6:50 pm
      लोग जॊब तो ढूंढ रहे हैं, लेकिन जॊब मिल कहा रही है। आज किसी भी सेक्टर देखें हर किसी भी पोस्ट के लिए ३० से ४० गुना तक आवेदन भरे जाते हैं। आज हालात यह हैं कि प्यून, चौकीदार, माली, खाना बनाने जैसी पोस्टों के लिए भी एमबीए, बीई, पोस्ट ग्रेजुएट्स और ग्रेजुएट्स भी अप्लाय करते हैं। आज कई बीई किए हुए स्टुडेंट्स छोटी-छोटी ५००० से ७००० रुपए मासिक वेतन पर प्राइवेट जॊब कर रहे हैं। नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद तो आज बेरोजगारी और बढ़ गई है। जहां जो काम ५ लोग करते थे, वहां आज यही काम २ लोगों से करवाया जा रहा है। आज अगर बेरोजगारी बढ़ेगी तो ये बेरोजगार समाज में और देश में अस्थिरता पैदा होगी। अपराध बढ़ेंगे, सामाजिक स्तर गिरेगा आदि कई समस्याएं खड़ी होंगी। ऐसे में यह सर्वे कि युवा काम नहीं ढूंढ रहे हैं यह गलत है।
      (1)(0)
      Reply
      1. K
        khilendra dewangan
        Nov 26, 2017 at 12:11 pm
        But bahot se kam thode paisa laga ke aur bina education limit k b achchha incom kiya ja sakta h
        (0)(0)
        Reply