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पांच सालों में सात सेक्टर में गई 3.64 करोड़ लोगों की नौकरियां, टेक्सटाइल सेक्टर में सबसे ज्यादा मार

इसी बीच सरकार बजट में आर्थिक सुस्ती को दूर करने और नौकरियां की अधिक पैदावार के प्रयास में जुटी है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कोशिश और जीडीपी ग्रोथ की उम्मीद के बीच अगले पांच सालों में 5.3 करोड़ से अधिक नई नौकरियां आने की भी संभावना है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

पिछले पांच सालों में महज सात सेक्टर में काम कर रहे 3.64 करोड़ लोगों को नौकरी चली गई। हिंदी अखबार दैनिक भास्कर ने अपनी एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि अखबार ने अलग-अलग सेक्टरों के एक्सपर्ट्स, इंडस्ट्री बॉडी और सरकारी रिपोर्ट्स के माध्यम से जाना कि देशभर में नौकरियों की मौजूदा स्थिति क्या है। रिसर्च में सामने आया कि पिछले पांच सालों में सिर्फ सात सेक्टरों के भीतर 3.64 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा नौकरियां टेक्सटाइल सेक्टर में गई।

उल्लेखनीय है कि सरकार बजट में आर्थिक सुस्ती को दूर करने और नौकरियां सृजन के प्रयास में जुटी है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कोशिश और जीडीपी ग्रोथ की उम्मीद के बीच अगले पांच सालों में 5.3 करोड़ से अधिक नई नौकरियां आने की भी संभावना है। हालांकि हाल में आई एक रिपोर्ट, जिसमें बताया गया कि देश में बेरोजगारी दर 7.1 फीसदी के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं, ने सरकार की चिताएं बढ़ा दी है।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इंडिया के मुख्य संरक्षक राहुल मेहता ने बताया कि टेक्सटाइल सेक्टर में अलग-अलग वजहों से पिछले पांच सालों में 3.5 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं। हालांकि उन्होंने कहा कि स्थिति अब सुधरने लगी हैं और अगले पांच सालों में इतना ही रोजगार सृजन होने की उम्मीद है। इसी बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार बताते हैं कि देश में ‘जॉब लॉस’ जैसी कोई बात नहीं है। हालांकि नए नौकरियों की पैदावार की रफ्तार धीमी जरूर हुई है मगर केंद्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्टर पर खर्च बढ़ाया है। निवेश भी बढ़ेगा और इससे नई नौकरियां पैदा होंगी।

जानिए किस सेक्टर में कितनी नौकरियां गईं-
टेक्सटाइल: 3.5 करोड़ (वजह- वैश्विक मंदी, उत्पादन लागत का बढ़ना, बांग्लादेश में सस्ती लागत में कारोबार)

जेम एंड जूलरी: 5 लाख (वजह- सोने के बढ़ते दाम, सोने के आयात पर ज्यादा कस्टम ड्यूटी, लोगों की विदेश से सोने की खरीद)

ऑटो: 2.30 लाख (BS-6 वाहनों के आने से पहले बिक्री गिरी ऑटोमेशन भी एक वजह रही)

बैंकिंग: 3.15 लाख (सरकारी बैंकों के मर्जर के कारण ब्रांचों की संख्या में कमी आई, जिससे नौकरियां घटी)

टेलीकॉम: 90 हजार (प्राइज वॉर के कारण टेलीकॉम कंपनियों का घाटा बढ़ा। सिर्फ तीन निजी कंपनियां बचीं।)

रियल स्टेल: 2.7 लाख (नोटबंदी के बाद स्थिति खराब हुई। बाद में जीएसटी जैसे कानून आने के बाद शुरुआत में स्थिति और खराब हुई।)

एविएशन: 20 हजार (जेट एयरवेज और किंगफिशर बंद होने के चलते करीब 20 हजार नौकरियां गईं)

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