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2जी घोटाला: पीएमओ के इन अधिकारियों पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, ए राजा ने नहीं अफसरों ने छिपाए थे तथ्य

2जी घोटाले में फैसला सुनाने वाली विशेष सीबीआई अदालत ने पीएमओ के तत्कालीन अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है।
2जी घोटाले में फैसला सुनाने वाली विशेष सीबीआई अदालत ने पीएमओ के तत्कालीन अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है।

2जी घोटाले में फैसला सुनाने वाली विशेष सीबीआई अदालत ने पीएमओ के तत्कालीन अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है। कोर्ट ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के पत्र के “सबसे प्रासंगिक और विवादित हिस्से को उनसे छिपाया।” इसलिए तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने के लिए तत्कालीन दूरसंचार मंत्री को दोषी नहीं माना जा सकता है। फैसला सुनाते हुए विशेष अदालत के जज ओ पी सैनी ने यह टिप्पणी की।

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि राजा ने पत्रों में सिंह को टूजी स्पेक्ट्रम लाइसेंस देने संबंधी नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों मसलन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ और आवेदन की अंतिम तिथि पर गुमराह किया था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी ने टूजी स्पेक्ट्रम के तीन अलग-अलग मामलों में सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा, “ए राजा के पत्र के सबसे प्रासंगिक तथा विवादित हिस्सों को तत्कालीन प्रधानमंत्री से छिपाने वाले खुद ए राजा नहीं थे बल्कि पुलक चटर्जी ने टीकेए नायर के साथ मिलकर यह किया है।”

शीर्ष नौकरशाहों के खिलाफ बेहद तल्ख टिप्पणियां करते हुए न्यायाधीश ने कहा, “अंत में, अभियोजन पक्ष के इस दावे में मुझे कोई दम नजर नहीं आता है कि या तो तत्कालीन प्रधानमंत्री को ए राजा की ओर से गुमराह किया गया या फिर उनके सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया।” सैनी ने कहा कि इस बारे में सीबीआई की दलीलें तथ्यों से परे थीं ताकि अदालत के जेहन को “पूर्वाग्रह से ग्रस्त” किया जा सके।

उन्होंने कहा, “अभियोजन ने बड़े नाम लेकर और देश के प्रधानमंत्री के अधिकार की बात करते हुए दलीलें दी थीं ताकि अदालत के जेहन को पूर्वाग्रह से प्रभावित किया जा सके।” अदालत ने कहा कि सिंह के समक्ष तथ्यों को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश करने का दोष राजा को नहीं दिया जा सकता क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री के कार्यालय ने ही उनके समक्ष पूरे तथ्य पेश नहीं किए। चटर्जी के एक नोट का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि वह प्रधानमंत्री को भेजे गए राजा के पत्र से कहीं अधिक बड़ा था।

अदालत ने कहा, “प्रधानमंत्री बेहद व्यस्त अधिकारी होते हैं। इतने बड़े नोट को पढ़ने का वह वक्त कहां से निकाल पाते। प्रधानमंत्री से फाइलों में डूब जाने की उम्मीद नहीं की जाती। उनके लिए पुलक चटर्जी के इस नोट को पढ़ने से कहीं आसान ए राजा के पत्र को पढ़ना और समझना होता। यह आसान और बेहतर होता।” राजा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख विभिन्न मुद्दों पर दूरसंचार विभाग के फैसले के बारे में सूचित किया था। इसमें नए लाइसेंस के लिए आशय-पत्र जारी करने और अपर्याप्त स्पेक्ट्रम होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदनों को देखने की बात भी शामिल थी।

बता दें कि दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार (21 दिसंबर) को 1.76 लाख करोड़ रुपये के 2जी घोटाले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के समय स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन में 1.76 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की बात तत्कालीन सीएजी विनोद राय ने उठाई थी। तब विपक्ष ने इसे घोटाला कहा था। इसमें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और द्रमुक सांसद कनीमोई के अलावा अन्‍य को भी आरोपी बनाया गया था। आरोपियों के खिलाफ सीबीआई के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मामला दर्ज किया था। सीबीआई की चार्जशीट पर विशेष अदालत ने वर्ष 2011 में मामले के 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।

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