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26/11 Stories of Strength: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देशवासियों को दिलाया भरोसा- भारत की धरती पर 26/11 जैसी वारदात अब नामुमकिन

26/11 Stories of Strength: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भरोसा दिया कि वारदात के ग्यारह सालों में भारत ने अपना आन्तरिक और बाह्य सुरक्षा चक्र इतना मजबूत कर लिया है कि अब एक और 26/11 को अंजाम देना नामुमकिन है। नीचे पढ़िए राजनाथ सिंह का पूरा भाषण

मुंबई के गेट वे ऑफ इंड‍िया पर आयोज‍ित 26/11:Stories Of Strenght कार्यक्रम में मंगलवार को भाषण देते हुए। (Photo by Amit Chakravarty)

द इंडियन एक्सप्रेस की ओर से मंगलवार को आयोजित 26/11 Stories of Strength कार्यक्रम में आतंकियों के साथ लड़ते हुए अपनी शहादत देने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके अलावा, उन बहादुर लोगों की कहानी से रूबरू होने का भी मौका मिला, जिन्होंने इस हमले में अपना सब कुछ गंवाने के बावजूद हार नहीं मानी और जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला किया। मुंबई के गेटवे ऑफ इंड‍िया पर चले तीन घंटे के कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। राजनाथ ने भरोसा दिया कि वारदात के ग्यारह सालों में भारत ने अपना आन्तरिक और बाह्य सुरक्षा चक्र इतना मजबूत कर लिया है कि अब एक और 26/11 को अंजाम देना नामुमकिन है। नीचे पढ़िए राजनाथ सिंह का पूरा भाषण:

आज मुम्बई पर 2008 में हुए हमले को ग्यारह साल हो चुके हैं। वैसे तेा ग्यारह साल का समय लम्बा समय होता है, मगर 26/11 की घटना को कोई भी स्वाभिमानी देश कभी भुला नही सकता। ग्यारह साल पहले मुम्बई में जो 166 जिन्दगियां नापाक करतूतों के चलते भारत ने खोर्इ थीं, उसकी याद केवल उन परिवार वालों के दिलों में ही नहीं बसी है बल्कि उसकी स्मृति एक राष्ट्र के स्तर पर हम सबके भीतर भी ताजा है।

26/11 की घटना में कई ऐसे लोगों ने भी अपनी कुर्बानी दी जिन्होंने अपने फर्ज को निभाने और मासूम जिंदगियों को बचाने के लिए खुद को मौत के मुंह में धकेलने से भी परहेज नहीं किया।

कौन भूल सकता है सब इंस्पेक्टर तुकाराम ओंबले को जिन्होंने आगे बढ़ कसाब की AK47 की नली पकड़ ली। कसाब ने पूरी मैगजीन सब इंस्पेक्टर ओंबले के शरीर में दाग दी मगर बहादुरी की मिसाल कायम करते हुए उन्होंने AK47 की नाल नही छोड़ी। उनकी वीरता ने ही भारत को कसाब को जिंदा पकड़ने का मौका दिया और पूरी दुनिया को इसकी वजह से पता चल सका कि भले ही बंदूक की ट्रिगर पर कसाब की उंगली थी मगर उस हाथ का साथ देने वाले और उसे दिमाग देने वाले लोग सरहद के उस पार पाकिस्तान में बैठे थे।

सब इंस्पेक्टर ओंबले की तरह NSG के बहादुर अधिकारी मेजर उन्नीकृष्णन ने इसी ताजमहल होटल में चल रहे ऑपरेशन में फंसे हुए Guests को बाहर निकालते समय अपनी शहादत दी थी। उस दिन महाराष्ट्र एस.टी.एफ. के प्रमुख रहे हेमंत करकरे ने भी अपना फर्ज निभाते हुए अपनी कुर्बानी दी थी। सेना, अर्धसैनिक बलों या पुलिस द्वारा दी गई हर कुरबानी का हर भारतवासी को सम्मान करना चाहिए।

कई ऐसे सामान्य नागरिक भी हैंं जिन्होंने उस दिन अपने अपने तरीके से वीरता और साहस के उदाहरण रखे। जब छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर आतंकवादियों ने हमला बोला तो उस संकट की घड़ी में धैर्य न खोते हुए जो ‘अनाऊंसर’ थे उन्होंने कई लोगों को सही समय पर अलर्ट किया।

द इंडियन एक्सप्रेस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत गोयनका की पूरी स्पीच का वीडियो, कार्यक्रम की तस्‍वीरों के ल‍िए यहां क्‍ल‍िक करें

जब ताज होटल में आतंकवादियों ने खून की होली खेलनी शुरू की तो वहां के स्टाफ ने अपनी जान पर खतरा लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की। वह बच्ची जिसने स्टेशन पर कसाब की गोली लगने के बावजूद बाद में अदालत में बयान देकर कसाब के कारनामों को पुख्ता तौर पर पहचान कर उसके खिलाफ केस को पूरी तरह पक्का कर दिया। यह सब ऐसी घटनाएं है जो आने वाली पीढ़ियों को भी सुनाई जायेंगी, बताई जाएंगी। इस सबके बीच सबसे लम्बा संघर्ष तो उन परिवारों का रहा जिन्होंने 26/11 में अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया। जिन्होंने यह नुकसान सहा उनके लिए यह आज भी मानो कल की ही घटना है।

मैं जानता हूं कि हम संवेदना के तौर पर चाहे जो कुछ भी रहें उस नुकसान की भरपाई असंभव है जो उनके प्रियजन के चले जाने से हुआ है। उनका दर्द हम चाह कर भी मिटा नही सकते। हां, हम 26/11 की घटना से प्रभावित सभी परिवारों, सभी मुम्बई वासियों और उनके माध्यम से पूरे देशवासियों को यह विश्वास जरूर दिला सकते है कि इन ग्यारह सालों में भारत ने अपना आन्तरिक और बाह्य सुरक्षा चक्र इतना मजबूत कर लिया है कि एक और 26/11 को हिंदुस्तान की धरती पर अंजाम देना अब नामुमकिन है।

जैसा कि आप सब अच्छी तरह जानते हैं कि 26/11 को अंजाम देने वाले आतंकवादी समुंदर के रास्ते मुम्बई में आये थे। उस घटना के बाद से Coastal Security को लेकर एक Paradigm Shift देश की Security Architecture में आया है। आज Indian Navy, Coast Guard और Marine Police ने देश के Coastal Areas में एक ऐसा ‘Three Tier Security Cover’ तैयार किया है कि कोई भी Suspicious Activity इनकी निगेहबानी से बचकर निकल नहीं सकती।

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आपको यह जानकर खुशी होगी कि ‘सागर सुरक्षा’ को ध्यान में रखते हुए Indian Navy के भीतर ही 1000 नौविकों का एक विशेष बल ‘सागर प्रहरी बल’ तैयार किया जा रहा है। यह बल न केवल Coastal Areas में मौजूद Naval Assets की सुरक्षा करेंगे बल्कि यह ‘Force Multiplier’ का भी काम करेंगे। देश की तटीय सुरक्षा/Coastal Security को ध्यान में रखते हुए ही हमने एक ‘Maritime Domain Awareness System’ भी स्थापित किया है जो समुंदर के भीतर और किनारे होने वाली हर हलचल पर न केवल निगाह रखता है बल्कि संबंधित एजेंसियों को तत्काल अलर्ट भी जारी करता है।

इस देश में 26/11 की घटना के बाद से Marine Police Force और Marine Police Stations को स्थापित करने के काम में भी काफी तेजी आई है। सभी एजेंसियां Silos काम करने के बजाए मिलकर काम करें इसके लिए ‘Joint Operation Centres’ भी स्थापित किये गए हैं। जब मैं देश का गृहमंत्री था तो मैंने Home Ministry में अलग से एक Counter Terrorism and Counter Radicalisation (CTCR) Division बनाई, जिसका Mandate पूरे देश में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को हर तरह की मजबूती देना और कोई भी खतरा पैदा होने से पहले ही उसे समाप्त कर देना था।

चूंकि आज इंटरनेट युग में आतंकवादी गतिविधियों का एक बड़ा अड्डा Cyber Space भी बन चुका है इसलिए वहां पर भी निगरानी बढ़ाने के लिए मैंने एक Cyber and Information Security (CIS) division का भी गठन किया था। यह दोनों काम मैंने 2017 में किए थे। साथ ही मेरे कार्यकाल के दौरान एक और बड़ा काम हमने किया था वह था देश भर के 15000 से अधिक Police Stations को Crime and Criminal Tracking Network and System (CCTNS) से जोड़ दिया गया है। यह CCTNS नेटवर्क पूरे देश में होने वाली हर अपराधिक हरकत और अपराधियों का Database है जिसके कारण अब ‘डॉन’ को पकड़ना मुश्किल नहीं आसान हो गया है क्योंकि अब किसी डॉन के लिए उरई (उत्तर प्रदेश) में कांड करके मुम्बई (महाराष्ट्र) में दूसरी घटना करके गुमनाम रहना लगभग असंभव हो गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पूरी स्पीच नीचे VIDEO में सुनें, कार्यक्रम की तस्‍वीरेें यहां देखें 

इन सब उठाये कदमों के कारण ही ग्यारह वर्षों में और खासतौर पर पिछले साढ़े पांच सालों में हमने देश के भीतर न केवल आतंकवादियों की मदद करने वाले Sleeper Cells ध्वस्त किए है बल्कि सरहदों के रास्ते देश मे घुसने वाले आतंकवादियों की जिंदगी मुहाल कर दी गई है। इतना ही नहीं केवल सीमाओं के भीतर ही नहीं अगर सीमाओं के पार भी आतंकवादी मंसूबों की भनक हमें लगती है तो सीमा के पार घुस कर हमारी सेना Surgical Strike या Air Strike करने से भी संकोच नहीं करती। यह बदलाव इतना बड़ा है कि अब पाकिस्तान में बैठा आतंकी भारत में घुसकर घटना को अंजाम देने ख्याल भी दिमाग में लाने से पहले सौ बार सोचता है।

आतंकवाद का कारोबार करने वालों के लिए अब भारत Soft Target नहीं रहा है। हमने Terrorism को पनाह देने वालों के लिए इस काम का इतना Cost Escalation कर दिया है कि पाकिस्तान जैसे देश को Terrorism को State Policy बनाने की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। हमने पिछले कुछ वर्षों में भारत में मौजूद हर तरह के Terror Infrastructure की Dismantle करने में कामयाबी पाई है। अब अगला कदम Terrorism के Financial Network को Disrupt करने की दिशा में लिया जा रहा है। आज FATF में पाकिस्तान को ‘Grey/ग्रे’ के सारे Shades नजर आने लगे हैं। यदि वह Terrorism को Sponsor करना बंद नहीं करेगा तो उसका Black Listed होना तय है। महंगाई और मंदी के संकट से घिरे पाकिस्तान के लिए FATF में Black List आतंकवाद के ताबूूत में आखिरी कील साबित होगा।

इसलिए आज 26/11 की ग्यारहवीं बरसी पर हमें भारत के सुरक्षा चक्र में आये इस बदलाव को समझना चाहिए। मगर कुछ ऐसा भी है जो मुंबई में 26/11 जैसी बड़ी घटना के बावजूद नही बदला है। वह है ‘Mumbai की Spirit’.आतंकवादियों ने जिस छत्रपति शिवाजी टर्मिनल को तबाह करने का कोशिश की थी वहां ट्रेन और यात्रियों का अवागमन पहले से भी अधिक बढ़ गया है। जिस ‘ताजमहल होटल’ को जमीन में मिला देने का सपना उन आतंकवादियों ने देखा था वह पहले से भी अधिक सम्मान और स्वाभिमान के साथ और पूरे Grandeur और Splendour के साथ खड़ा है।

जिस मुम्बई शहर की Backbone तोड़ने का आतंकियों ने मंसूबा देखा था वह मुम्बई आज दुनिया के सबसे बड़े Financial Hubs के रूप में विख्यात हो चुका है। भारत की आर्थिक प्रगति कुछ देशों को रास नहीं आती हे। भारत से यह ईर्ष्या उन्हें रसातल की तरफ ले जायेगी। मुम्बई पर उनका बार-बार हमला करना उनकी इसी सोच को दिखाता है। इसलिए हमारी कोशिश है कि जहां हम ‘Mumbai Spirit’ को सहेज कर रखें वहीं भारत की ओर बुरी नजर से देखने वालों को हम समेट कर रखे।

जब से हमारी सरकार ने भारत विरोध को ही अपना अस्तित्व मानने वाले पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नाकाम करना शुरू कर दिया तो पूरी दुनिया में उनके प्रधानमंत्री त्राहि माम-त्राहि माम करते हुए घूम रहे है। मुम्बई में हुआ 26/11 केवल इस शहर का ही नहीं बल्कि भारत के इतिहास का एक ‘Defining Moment’ है।

इस घटना ने आतंकवाद के खिलाफ इस देश के Resolve को और मजबूत किया है। भारत के इस Resolve को हम कभी कमजोर नही होने देंगे क्योंकि यही ‘Mumbai Spirit’ के हित में है और ‘India Spirit’ के हित में भी है। इंडियन एक्सप्रेस ने Mumbai Spirit को Celebrate करने के लिए आज का यह कार्यक्रम आयोजित किया है इसके लिए यह समूह बधाई का पात्र है। जैसे इंडियन एक्सप्रेस ‘Journalism of Courage’ में यकीन रखता है वैसे ही यह मुम्बई शहर ‘Optimism & Courage’ का प्रतीक है।

पूरे कार्यक्रम का वीडियो नीचे और कार्यक्रम की तस्‍वीरों के ल‍िए यहां क्‍ल‍िक करें 

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