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26/11 के शहीद मेजर उन्नीकृष्णन के आखिरी शब्द: ‘ऊपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा’

आतंकियों से मुकाबला करते हुए एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नी कृष्णन आज ही के दिन यानी 28 नवंबर,2008 को शहीद हो गए थे।

Author November 28, 2017 5:40 PM
ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो का मोर्चा संभालते हुए मेजर उन्नी कृष्णन ने 28 नवंबर की रात करीब एक बजे 10 कमांडो के दल के साथ होटल में प्रवेश किया था और छठे फ्लोर पर पहुंचे।

मुंबई हमलों के नौ साल पूरे हो गए लेकिन उसका जख्म अभी भी हर भारतीय के लिए जिंदा है। आतंकियों से मुकाबला करते हुए एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नी कृष्णन आज ही के दिन यानी 28 नवंबर को शहीद हो गए थे। उन्हें होटल ताज का बचाव करने का जिम्मा सौंपा गया था। 26 नवम्बर 2008 की रात, आतंकवादियों ने हमला बोलते हुए 100 साल पुराने ताज महल पैलेस होटल में महिलाओं समेत कुछ लोगों को बंधक बना लिया था। ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो का मोर्चा संभालते हुए मेजर उन्नी कृष्णन ने 28 नवंबर की रात करीब एक बजे 10 कमांडो के दल के साथ होटल में प्रवेश किया था और छठे फ्लोर पर पहुंचे। उनके साथ कमांडो सुनील यादव, मनोज कुमार, बाबू लाल और किशोर कुमार भी थे। वहां मेजर कृष्णन को आभास हुआ कि आतंकी तीसरे तल पर छुपे हैं।

अपने दोनों हाथों में हथियार लिए मेजर उन्नी कृष्णन और उनकी टीम ने तीसरे तल पर होटल का दरवाजा तोड़ा और आतंकियों की गोलीबारी का सामना किया। इस मुठभेड़ में कमांडो सुनील यादव घायल हो गए। अपने साथी को घायल देख मेजर संदीप उन्नी कृष्णन ने खुद मोर्चा संभालते हुए सुनील को अपनी पीठ पर लादकर वहां से पहले न केवल हटाया बल्कि उसका प्राथमिक उपचार भी किया। इस दौरान मेजर संदीप उन्नी कृष्णन आतंकियों की गोलीबारी का लगातार जवाब भी देते रहे। उन्नीकृष्णन ने फिर उन आतंकियों का होटल में ही पीछा किया। इस दौरान उन्होंने कुछ आतंकियों के ढेर कर दिया। इसी बीच उन्हें आतंकियों ने पीछे से गोली मार दी। अधिक खून बहने की वजह से मेजर संदीप उन्नी कृष्णन की मौत हो गई। मेजर संजीप को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

एनएसजी के तत्कालीन डीजी जे के दत्त के मुताबिक होटल ताज में तीसरे तल पर मेजर संदीप जब आतंकियों से लोहा ले रहे थे, तब उनकी टीम के कुछ साथी होटल के निचले तल से नीचे उन्हें मदद करने के लिए आ रहे थे लेकिन मेजर संदीप ने उन्हें मना कर दिया था। तब मेजर ने कहा था, “उपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा।” संभवत: मेजर संदीप द्वारा अपने साथियों को कहे उनके ये आखिरी शब्द थे। यह कहने के कुछ देर बाद ही मेजर संदीप आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए।

बता दें कि 26 नवंबर, 2008 को हुए इस आतंकी हमले में कुल 166 लोगों की मौत हो गई थी जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। 26 नवंबर की शाम को ही मुंबई के कोलाबा समुद्री तट पर एक बोट पर सवार होकर दस पाकिस्तानी आतंकियों ने शहर में घुसपैठ की फिर अलग-अलग जगहों को अपना निशाना बनाया था। इस आतंकी हमले में एक मात्र जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल आमिर कसाब को पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद पुणे के यरवदा जेल में फांसी दे दी गई थी।

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