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सम-सामयिक, इंटरनेट उपयोग : दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या भारत में क्यों

कोरोना महामारी काल में इंटरनेट के उपयोक्ता तेजी से बढ़े हैं। आॅनलाइन पढ़ाई से लेकर खरीदारी तक में नए उपयोक्ता जुड़े हैं। हर महीने करीब 71 लाख उपयोक्ता जुड़े हैं। महाराष्ट्र (6.4 करोड़), आंध्र प्रदेश (5.9 करोड़), तमिलनाडु (5.1 करोड़), गुजरात (4.5 करोड़) और कर्नाटक (4.6 करोड़) शामिल हैं।

covid 19कोरोना काल में इंटरनेंट। फाइल फोठों

टरनेट के इस्तेमाल के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे हो चुका है। भारत ही नहीं दुनिया में आज इंटरनेट जरूरी बन चुका है, जिसके बिना जिंदगी की कल्पना ही नहीं की जा सकती। भारत में इंटरनेट के आंकड़ों को लेकर हाल में शोध करने वाली टीम के प्रमुख रहे आइआइटी- बंगलुरु के प्रोफेसर देवब्रत दास का कहना है कि पूर्णबंदी के दौर में एक बार फिर साबित हुआ है कि इंटरनेट गेम-चेंजर है।

इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा है। आॅनलाइन पढ़ाई से लेकर खरीदारी तक में। पिछले साल जून से अगस्त 2020 तक ही 10 करोड़ उपयोक्ता बढ़े हैं। यानी हर महीने करीब 71 लाख उपयोक्ता जुड़े हैं। दरअसल, पूर्णबंदी के पहले से ही इंटरनेट कंपनियों का पूरा फोकस डेटा के साथ ही मूल्य वर्धित सेवाओं (वैल्यू एडेड सर्विसेस) पर आ गया। इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों के कमाने के तौर-तरीके बदल गए। प्रति व्यक्ति औसत राजस्व में गिरावट आई और साथ में डाटा भी सस्ता हो गया। प्रति उपयोक्ता कंपनियों की आय घटी है, लेकिन उपयोक्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी से उनका सकल मुनाफा काफी बढ़ा है।

भारत में इंटरनेट के 25 साल पूरे हो चुके हैं। देश में 75 करोड़ उपयोक्ताओं का आंकड़ा पार हो चुका है। पिछले चार साल में इंटरनेट उपयोक्ता दोगुने हुए हैं। शुरुआती 21 साल में जितने उपयोक्ता जुड़े, उतने ही 2017 से अब तक जुड़े। डाटा की खपत भी बढ़ी है। अब हर व्यक्ति हर महीने औसतन 12 जीबी डाटा का इस्तेमाल कर रहा है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।

पांच राज्यों में देश का 35 फीसद इंटरनेट उपयोक्ता आधार है। 2016 में जहां 34 करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़ गए थे, वहीं 2020 में अब 76 करोड़ लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले साल जून से अगस्त 2020 तक ही 10 करोड़ उपयोक्ता बढ़े हैं। यानी हर महीने करीब 71 लाख उपयोक्ता जुड़े हैं। उन्हीं राज्यों में उपयोक्ता बढ़े हैं, जहां डिजिटल ढांचा बेहतर उपलब्ध है। शीर्ष पांच राज्यों में महाराष्ट्र (6.4 करोड़), आंध्रप्रदेश (5.9 करोड़), तमिलनाडु (5.1 करोड़), गुजरात (4.5 करोड़) और कर्नाटक (4.6 करोड़) शामिल हैं, जहां देश का 35 फीसद उपयोक्ता आधार है। उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल जैसे बड़ी आबादी वाले राज्यों समेत बाकी 23 राज्यों और नौ केंद्रशासित प्रदेशों में 65 फीसद इंटरनेट उपयोक्ता हैं।

दरअसल, वर्ष 2016 में मुफ्त डाटा की एक योजना के चलते इंटरनेट उपयोक्ता बढ़े और डाटा का इस्तेमाल भी बढ़ा। डाटा इस्तेमाल बढ़ने के आंकड़ों की बात करें तो 2017 में हर महीने प्रति व्यक्ति डाटा खपत 1.2 जीबी थी, जो जून-2020 में 10 गुना बढ़कर 12 जीबी तक पहुंच चुकी है। यह रफ्तार और बढ़ने वाली है। एरिक्सन मोबिलिटी की रिपोर्ट कहती है कि भारत में 2025 तक हर उपयोक्ता का डाटा इस्तेमाल बढ़कर 25 जीबी तक पहुंच जाएगा।

इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले जिस रफ्तार से शहरों में बढ़े, उतनी रफ्तार गांवों में नहीं मिल सकी। जो उपयोक्ता बढ़े, वह मोबाइल इंटरनेट से बढ़े। गांवों में नेटवर्क की कमी की समस्या रही। इसी वजह से 61 फीसद इंटरनेट कनेक्शन शहरों में थे और सिर्फ 39 फीसद गांवों में। सेलुलर आॅपरेटर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एसपी कोचर कहते हैं कि हमारे यहां 97 फीसद ब्रॉडबैंड कनेक्शन मोबाइल पर हैं। इसके बाद भी 50 फीसद आबादी को ही पर्याप्त नेटवर्क कवरेज मिल पा रहा है। नेटवर्क बढ़ाने के साथ ही उसकी कीमतें और सेवा गुणवत्ता भी बढ़ाना जरूरी है।

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