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हरियाणा में भाजपा का बढ़ा 24 फीसद वोट

नई दिल्ली। मोदी लहर पर सवार भाजपा ने हरियाणा में अपने मत फीसद में नाटकीय बढ़ोतरी दर्ज करते हुए और 90 सदस्यीय विधानसभा में 47 सीटें हासिल कर राज्य में पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल कर ली है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को महज चार सीटें ही मिली थीं। भाजपा के वोट फीसद […]

मोदी लहर पर सवार भाजपा ने हरियाणा में अपने मत फीसद में नाटकीय बढ़ोतरी दर्ज की

नई दिल्ली। मोदी लहर पर सवार भाजपा ने हरियाणा में अपने मत फीसद में नाटकीय बढ़ोतरी दर्ज करते हुए और 90 सदस्यीय विधानसभा में 47 सीटें हासिल कर राज्य में पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल कर ली है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को महज चार सीटें ही मिली थीं। भाजपा के वोट फीसद में 24 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। पार्टी राज्य में पहली बार अपने बल पर सरकार बनाने को तैयार है। भाजपा इस चुनाव परिणाम के साथ राज्य में राजनीति की मुख्यधारा में आ गई है, जो अभी तक हाशिए पर थी।

 

विधानसभा के लिए 2009 में हुए चुनाव में भाजपा को 9.05 फीसद वोट मिले थे। जो इस बार बढ़कर 33.2 फीसद हो गए। इससे भाजपा ने राज्य में जबर्दस्त जीत दर्ज की है। इससे पहले तक भाजपा इनेलो सहित अन्य क्षेत्रीय दलों की दूसरे नंबर की सहयोगी हुआ करती थी। इस चुनाव में इनेलो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। मोदी लहर ने कांग्रेस के गढ़ को धराशायी कर दिया जो गत 10 सालों तक हरियाणा के शासन में रही। सोनिया गांधी नीत कांग्रेस का वोट 35.12 फीसद से घटकर इस चुनाव में 20.6 फीसद रह गया।

 

उधर, भाजपा की सीटों की संख्या बढ़कर 47 हो गई। जो 2009 के चुनाव में मात्र चार थी। ऐसा भाजपा के वोट फीसद में 24 फीसद का इजाफा होने से हुआ है, क्योंकि 41 लाख से अधिक मतदाताओं ने उसे वोट दिया। परिणाम वस्तुत: अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव का आईना है। इसमें भाजपा ने राज्य की 10 लोकसभा सीटों में से चार पर जीत दर्ज की थी। इनेलो को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली थी। कांग्रेस ने 2009 में लोकसभा की नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2014 के चुनाव में कांग्रेस मात्र एक सीट रोहतक पर जीत दर्ज कर सकी, जहां से निवर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा जीते थे।

 

इनेलो 19 सीटें हासिल करके एक बार फिर मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर उभरी है। पार्टी ने करीब 24.1 फीसद वोट फीसद हासिल किया। जो गत चुनाव के मुकाबले 2.5 फीसद कम है। 2.5 फीसद वोट ने ही इनेलो को 2009 में 12 सीटें अधिक दिलाई थीं। निर्दलीय उम्मीदवारों की सीटें और वोट फीसद भी इस चुनाव में कम हुआ है। इस बार केवल पांच ने जीत दर्ज की जबकि पिछले चुनाव में सात निर्दलीय चुनाव जीते थे।
भाजपा की पूर्व सहयोगी और कुलदीप बिश्नोई की अगुवाई वाली हरियाणा जनहित कांग्रेस का भी प्रदर्शन पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार कुछ ठीक नहीं रहा। इसकी सीटों की संख्या छह से घटकर दो रह गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में उसका वोट फीसद 7.68 फीसद था। जो इस बार घटकर 3.6 फीसद रह गया।

 

 

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