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टैक्‍स छूट का झूठा दावा करने वाला मामला: इलेक्शन कमीशन के रडार पर 2100 राजनीतिक दल, 111 के खिलाफ लिया कड़ा एक्शन

Election Commission: देश में ऐसी कई राजनीतिक पार्टियां हैं जो केवल कागजों पर चल रही है और इनमें से अधिकांश दल अवैध गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं।

Election Commission EC
सांकेतिक फोटो (फाइल)

चुनाव आयोग ने फर्जी राजनीतिक पार्टियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने ऐसी 111 राजनीतिक पार्टियों पर एक्शन लिया है, जो पंजीकृत तो है लेकिन उनके दल को चुनावी मान्यता नहीं है। इसके साथ ही 2100 से ज्यादा पार्टियां आयोग के रडार पर है। चुनाव आयोग इन 2100 पार्टियों को लेकर कहा कि इन राजनीतिक पार्टियों ने कई अनिवार्य नियमों की अवहेलना की है जिसमें चंदे से जुड़ी रिपोर्ट नहीं सौंपने, नाम, मुख्यालय पदाधिकारियों और पते के बदलाव के बारे में जानकारी नहीं शामिल हैं।

पार्टियों को हटाने का आदेश: चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि शुरुआत में 111 पंजीकृत और गैर मान्यता प्राप्त पार्टियों को हटाने का आदेश दिया गया है। इससे पहले 25 मई को चुनाव आयोग ने 87 पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त पार्टियों को हटा दिया था। चुनाव आयोग का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने के लिए देश भर की 2100 से ज्यादा पार्टियों को चिन्हित किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश तक के राजनीतिक दल शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग की यह पूरी कार्यवाही नए मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के देखरेख में की जा रही है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां केवल इनकम टैक्स की धारा 13 ए का लाभ उठाने के लिए बनाई जाती हैं। जांच में पाया गया है कि इनमें से अधिकांश दल अवैध गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं।

राजनीतिक पार्टियों को टैक्स में छूट: इनकम टैक्स की धारा 13 ए के तहत देश में सभी राजनीतिक दलों को आयकर में छूट मिलती है। इसके साथ-साथ चंदा देने वालों को भी इनकम टैक्स की धारा 80GGB और 80GGC के प्रदान की गई राशि पर आयकर में छूट मिलती है।

आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन दलों को चुनाव आयोग के द्वारा हटाया गया है उनमें से अधिकांश राजनीतिक दलों ने सालाना ऑडिट खातों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। इसके साथ ही कई जरूरी चीजें जैसे खर्चों की जानकारी और कैश फ्लो स्टेटमेंट आदि की डिटेल नहीं थी और दान देने वालों की भी पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से भरी नहीं गई थी।

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