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कोरोना की भेंट चढ़ा हरिद्वार कुंभ

हरिद्वार के दुकानदार, होटल व्यवसायी, ट्रैवल्स एजंसियां और पंडे पुजारी हर 12 साल में पड़ने वाले कुंभ मेले का इंतजार करते हैं क्योंकि कुंभ मेले में होने वाली आमदनी से उनकी कई सालों की रोजी-रोटी चलती है। इस बार पहले से ही कोरोना के कारण उनका व्यापार ठप है।

कोरोना महामारी की वजह से इस बार हरिद्वार में लगने वाले कुंभ पर ग्रहण लगता दिख रहा है।

हरिद्वार में 2021 में लगने वाला कुंभ मेला कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया है। अब माना जा रहा है कि हरिद्वार में कुंभ मेला केवल प्रतीकात्मक ही बनकर रह जाएगा। अखाड़ों के साधु संन्यासी सीमित संख्या में अपने देवताओं और इष्ट भगवान के साथ हर की पैड़ी पर गंगा स्नान प्रतीकात्मक रूप से ही कर पाएंगे।

दो साल पहले ही राज्य सरकार ने हरिद्वार में लगने वाले कुंभ मेले को दिव्य और भव्य बनाने की घोषणा की थी। उसके लिए एक हजार करोड़ रुपए से लेकर पांच हजार करोड़ रुपए तक के बजट का इंतजाम करने का एलान किया था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक प्रयागराज में आयोजित अर्द्ध कुंभ मेले में व्यवस्था देखने गए थे और तब वहां उन्होंने एलान किया था कि हरिद्वार का कुंभ मेला प्रयागराज के अर्द्ध कुंभ मेले से भी ज्यादा दिव्य और भव्य होगा।

राज्य सरकार ने हरिद्वार कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए मेला अधिकारी की नियुक्ति काफी समय पूर्व कर दी थी और विभिन्न विभागों में कुंभ मेले के आयोजन के लिए अधिकारी भी भेज दिए थे। राज्य सरकार की पहल पर केंद्र सरकार ने सालों से लंबित पड़े दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में तेजी से काम करना शुरू करवा दिया था और तेजी के साथ राज्य सरकार भी गंगा के विभिन्न तटों पर गंगा घाटों और पुलों का निर्माण करवा रही थी, परंतु कोरोना ने राज्य सरकार के दिव्य और भव्य कुंभ मेले के सपनों पर पानी फेर दिया।

जिस तेजी के साथ उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण फैल रहा है, उसे देखते हुए राज्य सरकार ने 2021 में लगने वाले कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की तादाद को सीमित करने के लिए ई-पास जारी करने का एलान किया है। जिसका अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वागत किया है। परिषद ने कहा है कि कुंभ मेला का आयोजन सकुशल संपन्न हो जाए। इसके लिए वे राज्य सरकार के साथ खड़े हैंर।

वहीं, हरिद्वार के व्यापारियों ने राज्य सरकार के ई-पास जारी करने के फैसले का विरोध किया है और कहा कि इससे हरिद्वार का व्यापार और अधिक ठप पड़ जाएगा। वहीं, गंगा सभा के पूर्व महामंत्री पंडित राम कुमार मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अलावा कुंभ आयोजन में प्रमुख भागीदारी निभाने वाली और हर की पैड़ी की व्यवस्था देखने वाली श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों से भी इस संबंध में विचार विमर्श करना चाहिए था।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि जिस तरह से उत्तराखंड और अन्य राज्यों में कोरोना संक्रमण फैल रहा है, उसे देखते हुए ही राज्य सरकार ने साधु संतों से गंभीर विचार मंथन के बाद तय किया है कि हरिद्वार कुंभ मेले में तीर्थ यात्रियों की संख्या को सीमित करने के लिए ई।पास जारी करने का फैसला लिया है ताकि कोरोना संकट के प्रभाव से कुंभ मेले को प्रभावित न होने दिया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन के लिए बीते तीन सालों से युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी थीं और समय-समय पर अखाड़ा परिषद के साथ राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय बैठक में भी की थी। उनका सपना कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने का था, परंतु कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जनहित में राज्य सरकार ने कुंभ में ही पास जारी करने की व्यवस्था किए जाने का फैसला किया है।

उन्होंने कुंभ मेला से जुड़े अधिकारियों को कुंभ मेले के सभी स्थाई कार्य 15 नवंबर तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं और यह कार्य उच्च गुणवत्ता के हो। इसके लिए आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ कुंभ कार्यों की जांच करेंगे। राज्य सरकार ने सभी 13 अखाड़ों में कुंभ की दृष्टि से स्थाई निर्माण कराने के लिए हर अखाड़े को एक-एक करोड़ रुपए आबंटित करने का फैसला किया है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज ने राज्य सरकार के मेले में श्रद्धालुओं के लिए पास जारी करने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने जनहित में फैसला लिया है। इसीलिए लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अखाड़ा परिषद भी राज्य सरकार के फैसले के साथ खड़ी है।

पहले शाही स्नान से पूर्व राज्य सरकार के मुखिया के साथ बैठकर कुंभ की भावी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर विचार विमर्श किया जाएगा। तब कोरोना की जो स्थिति होगी, उसी के मुताबिक फैसला लिया जा सकता है। कोरोनाकाल में श्रद्धालुओं को अधिक तादाद में हरिद्वार में आने की छूट नहीं दी जा सकती है, क्योंकि श्रद्धालुओं के अधिक संख्या में आने पर स्वास्थ्य की दृष्टि से हालात बिगड़ सकते हैं।

हरिद्वार में लगने वाले विभिन्न कुंभ मेलों को देख चुके वरिष्ठ लेखक गोपाल सिंह रावत का कहना है कि कोरोना संकट ने कुंभ मेले पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं और कुंभ मेला कोरोना की भेंट चढ़ गया है। हरिद्वार के दुकानदार, होटल व्यवसायी, ट्रैवल्स एजंसियां और पंडे पुजारी हर 12 साल में पड़ने वाले कुंभ मेले का इंतजार करते हैं क्योंकि कुंभ मेले में होने वाली आमदनी से उनकी कई सालों की रोजी-रोटी चलती है। इस बार पहले से ही कोरोना के कारण उनका व्यापार ठप है।

अब कुंभ मेले पर भी कोरोना संकट के कारण जो बादल मंडरा गए हैं। उससे इन व्यापारियों का भविष्य का व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित होगा। राज्य सरकार को हरिद्वार के व्यवसायियों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज जारी करना चाहिए ताकि उनकी रोजी रोटी के संकट पर मरहम लगाया जा सके।

कुंभ के स्नान पर्व
हरिद्वार कुंभ 2021 का पहला शाही स्नान गुरुवार, 11 मार्च महाशिवरात्रि और अंतिम शाही स्नान मंगलवार, 27 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा के दिन होगा। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष पंडित प्रदीप कुमार झा एवं महामंत्री पंडित तन्मय वशिष्ठ के अनुसार हरिद्वार कुंभ 2021 के शाही स्नान और प्रमुख स्नान की तारीखें घोषित कर दी गई हैं।

शाही स्नान के दिन
पहला शाही स्नान : 11 मार्च 2021 महाशिवरात्रि,
दूसरा शाही स्नान : 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या,
तीसरा शाही स्नान : 14 अप्रैल मेष संक्रांति और वैशाखी
चौथा शाही स्नान : 27 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा

कुंभ के अन्य प्रमुख स्नान के दिन
14 जनवरी 2021 मकर संक्रांति,
11 फरवरी मौनी अमावस्या,
16 फरवरी बसंत पंचमी,
27 फरवरी माघ पूर्णिमा,
13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव संवत्सर
21 अप्रैल राम नवमी

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