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डिजिटल होगी 2021 की जनगणना, कागजी झंझट से जनगणना कर्मियों को छुटकारा, मोबाइल एप में दर्ज करने होंगे पैन, आधार डिटेल्स

शाह ने कहा, ‘‘भारत की कुल 130 करोड़ की आबादी को इसके फायदे के बारे में बताया जाना चाहिए। कैसे जनगणना के आंकड़े भविष्य की योजनाएं , विकास योजना और कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद कर सकते हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: September 23, 2019 6:42 PM
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ गृह सचिव अजय कुमार भल्ला (बीच में) और भारत के पंजीयक एवं जनगणना आयुक्त विवेक जोशी (दाएं)। (फोटो-PTI)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (23 सितंबर) को कहा कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए 2021 की जनगणना मोबाइल ऐप के जरिए की जाएगी। शाह ने नई दिल्ली में भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय की नई इमारत की नींव रखने के बाद कहा कि राष्ट्रव्यापी जनगणना 16 भाषाओं में की जाएगी जिसपर 12,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने कहा कि जनगणना की संदर्भ तारीख एक मार्च 2021 होगी, लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी होने के मद्देनजर यह दिनांक एक अक्टूबर 2020 होगी। ऐप में लोगों के पैन नंबर, वोटर कार्ड नंबर, आधार नंबर के भी डिटेल्स डाले जाएंगे।

शाह ने यह भी कहा कि जनगणना के साथ ही देश के सामान्य निवासियों के राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के लिए भी आंकड़े लिए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि एनपीआर असम के एनआरसी का राष्ट्रव्यापी संस्करण का आधार हो सकता है। शाह ने कहा, ‘‘जनगणना के आंकड़े मोबाइल ऐप के जरिए लिए जाएंगे। पहली बार जनगणना के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत कागज और कलम के जरिए की जाने वाली जनगणना से आगे बढ़ रहा है जिससे देश में जनगणना कवायद में बड़ी क्रांति आएगी।’’ गृह मंत्री ने जनगणना 2021 के संदर्भ में कहा कि आंकड़े देश की भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद करेंगे, खासकर, विकास योजना, कल्याणकारी योजना आदि और यह ‘जन भागीदारी’ की कवायद होगी।

शाह ने कहा, ‘‘भारत की कुल 130 करोड़ की आबादी को इसके फायदे के बारे में बताया जाना चाहिए। कैसे जनगणना के आंकड़े भविष्य की योजनाएं , विकास योजना और कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद कर सकते हैं। जनगणना के आंकड़े बहु आयामी होते हैं और राष्ट्र की उन्नति में अहम योगदान देते हैं।’’ गृह मंत्री ने यह भी कहा कि जनगणना के आंकड़े वार्ड, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करने में भी मदद करेंगे। उन्होंने जनगणना अधिकारियों से संजीदगी से यह काम करने की अपील की क्योंकि यह उनके लिए ‘पुण्य’ करने का एक मौका है जो राष्ट्र निर्माण में सहायक है।

शाह ने कहा कि पहले की सरकारें कल्याणकारी योजनाएं थोड़ा-थोड़ा करके बनाती थीं और पिछली सरकारों ने कोई भी व्यापक योजनाएं नहीं बनाईं। उन्होंने कहा, ‘‘ 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरा दृष्टिकोण बदल गया। दृष्टिकोण और सोच पूरी तरह से बदल गई तथा समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए।’’ गृह मंत्री ने बताया कि 2011 की जनगणना के आधार पर मोदी सरकार ने हर घर को बिजली का कनेक्शन, गैस कनेक्शन, सड़कों का निर्माण, गरीबों के लिए घर, शौचालय, बैंक खाते और बैंक शाखाएं खोलने समेत 22 कल्याणकारी योजनाएं बनाईं।

उन्होंने सरकार की ‘उज्ज्वला’ योजना का जिक्र किया, जिसके तहत गरीब परिवारों को नि:शुल्क एलपीजी कनेक्शन दिए गए। यह योजना कामयाब रही क्योंकि योजना 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बनाई गई थी। शाह ने कहा, ‘‘2022 तक कोई भी ऐसा परिवार नहीं होगा जिसके पास गैस कनेक्शन नहीं होगा।’’ उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना ने कुछ राज्यों में खराब लिंग अनुपात के बारे में बताया जिस के बाद ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

गृह मंत्री ने कहा कि भारत की आबादी दुनिया की जनसंख्या का 17.5 फीसदी है लेकिन भौगोलिक क्षेत्र दुनिया के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 2.4 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ‘‘ जाहिर है कि आबादी की तुलना में भारत के पास सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं। इस असमानता के अंतर को पाटने के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी।

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