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2019 में हो बैलट वोट‍िंग, मांग लेकर चुनाव आयोग जाएंगी 17 पार्ट‍ियां!

जैसे-जैसे 2019 का आम चुनाव नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों की बैचेनी बढ़ती जा रही है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार के रथ के पहिये रोकने के लिए विपक्षी पार्टियां हर संभव जोर लगा रही हैं और कांग्रेस समेत 17 विपक्षी दल फिर से बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग लेकर चुनाव आयोग जाएंगे।

(फाइल फोटो- पीटीआई)

जैसे-जैसे 2019 का आम चुनाव नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों की बैचेनी बढ़ती जा रही है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार के रथ के पहिये रोकने के लिए विपक्षी पार्टियां हर संभव जोर लगा रही हैं और कांग्रेस समेत 17 विपक्षी दल फिर से बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग लेकर चुनाव आयोग जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से वोटिंग मशीन की जगह बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर चर्चा की है। बुधवार (1 अगस्त) को ममता बनर्जी ने असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) विवाद के बीच सोनिया और राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात की थी। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अलावा, राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस, अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (एसपी), मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) आने वाले अहम चुनाव बैलट पेपर से कराने की मांग उठाने के लिए एकमत हो चुकी हैं।

दक्षिण भारत से वाईएसआर कांग्रेस, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कझागम (डीएमके), एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली जनता दल सेक्युलर (जेडीएस), आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और लेफ्ट पार्टियां जैसे कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और सीपीआईए-एम चुनाव आयोग जाने के लिए विपक्ष का साथ देंगी। सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) भी विपक्ष के साथ नजर आएगी।

सरकार की सहयोगी शिवसेना भी ईवीएम की जगह बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर चुकी है। ममता बनर्जी ने को दिल्ली में विपक्षी पार्टियों के साथ इस प्रस्ताव पर आमराय बनाने के लिए राउंड लगाते देखा गया है। बता दें कि बुधवार को एनआरसी विवाद पर ममता बनर्जी केंद्र की मोदी सरकार जमकर बरसी थीं। उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि वह जानबूझकर एनआरसी के जरिये राजनीति कर रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि एनआरसी विवाद के चलते गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है, जिसमें खून की नदियां बहेंगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग विपक्षी दलों की मांग पर क्या निर्णय लेता है।

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