ताज़ा खबर
 

मोदी की जीत के लिए RSS की खास रणनीति, कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल का तैयार है मास्टरप्लान

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यहां भी लोकसभा चुनावों में भाजपा को झटका लग सकता है।

पीएम मोदी और अमित शाह चुनावों पर चर्चा के लिए पार्टी की बैठक में जाते हुए।(PTI Photo)

आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर चुनाव प्रचार शुरु हो चुका है। भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने फिर से कमर कस ली है और इसके लिए रणनीति बनाकर काम भी शुरु कर दिया है। आरएसएस के सबसे अहम निकाय ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ में तय किया गया है कि आगामी चुनावों में उन राज्यों पर ज्यादा फोकस किया जाएगा, जो कि पिछले आम चुनावों में मोदी लहर से अछूते रहे थे। इन राज्यों में दक्षिण भारत के राज्य और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। गौरतलब है कि 2019 में लोकसभा चुनावों के साथ ही उत्तर पूर्वी राज्यों अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा में विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संघ परिवार के वरिष्ठ नेताओं से कहा भी है कि पार्टी को केरल और पश्चिम बंगाल में मजबूती मिली है। संघ के नेताओं के अनुसार, भाजपा का मानना है कि यदि पार्टी इन राज्यों में ज्यादा सीटें हासिल नहीं कर सकी है, लेकिन वह ज्यादा वोट पाकर दूसरे स्थान पर आयी है। 20 लोकसभा सीटों वाले केरल में भाजपा को 2009 में 6 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं साल 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर 10.6 प्रतिशत हो गया था। ऐसे में जल्द ही होने वाले आम चुनावों में भाजपा को केरल और पश्चिम बंगाल से काफी उम्मीदें हैं। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि हिंदी पट्टी राज्यों जैसे कि उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा ने गठबंधन कर लिया है, वहीं कांग्रेस भी छोटे दलों के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है। ऐसे में पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा को 71 सीटें देने वाले उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा की राह कठिन होने वाली है।

इसी तरह छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यहां भी लोकसभा चुनावों में भाजपा को झटका लग सकता है। वहीं पश्चिम बंगाल और केरल में जहां भाजपा की लोकप्रियता में उछाल आया है। वहीं तमिलनाडु अपने दो क्षेत्रीय करिश्माई नेताओं को खोकर एक मजबूत नेतृत्व की तलाश में है। कर्नाटक भाजपा का मजबूत किला रहा है और पार्टी को उम्मीद है कि लोकसभा चुनावों में भी उसे यहां से अच्छी खासी सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा संघ पीएम मोदी के मजूबत नेता वाली छवि को और निखारने में जुटा हुआ है, खासकर पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना की एअर स्ट्राइक के बाद इसमें बढ़ोत्तरी हुई है। इसके साथ ही राष्ट्रवाद, जैसे मुद्दे भी हैं, जिन्हें आगामी चुनावों में उभारकर भाजपा और आरएसएस लोगों का समर्थन पाना चाहते हैं।

आरएसएस ने निर्देश दिया है कि पार्टी ग्रामीण इलाकों में फोकस करे और शहरी पार्टी की छवि को तोड़ने का प्रयास करे। पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा को 31 प्रतिशत वोट मिले थे, जिनमें से 42 प्रतिशत वोट अकेले शहरी मतदाताओं के थे। संघ से जुड़े एक नेता ने बताया कि ‘शाखाएं ग्रामीण इलाकों में आयोजित हो रही हैं, लेकिन शहरों में पार्टी की स्थिति ज्यादा मजबूत है। केन्द्र सरकार की योजनाओं से लाभान्वित होने वाले गरीब लोग गांवों में रहते हैं और यह जरुरी है कि उन तक पहुंचा जाए।’ साथ ही भाजपा नेताओं को खासकर केन्द्रीय मंत्रियों को कहा गया है कि वह चुनाव प्रचार के दौरान 10 दिन विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों का दौरा भी करें, ताकि पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया जा सके।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App