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वसुंधरा, शिवराज दिल्ली नहीं आना चाहते थे, पर नहीं माने अमित शाह, ये हो सकता है बीजेपी का प्लान

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक शिवराज चौहान मध्य प्रदेश में और वसुंधरा राजे राजस्थान में विपक्ष की नेता बनना चाहती थीं लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने विपक्ष के नेता के तौर पर एक ब्राह्मण गोपाल भार्गव को चुना है।

शिवराज चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह को पार्टी ने राज्यों में विपक्ष का नेता न बनाकर बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। (Image Source: Facebook/@ChouhanShivraj, @VasundharaRajeOfficial and @drramansingh.official)

लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी कई मोर्चों पर तैयारी कर रही है। बीते साल के आखिर में हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी ने यहां नए सिरे से रणनीति बनाई है। हालांकि, इन राज्यों खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में सत्ता गंवाने के बाद शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे दिल्ली नहीं आना चाहते थे लेकिन बीती 10 जनवरी को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी। अमित शाह ने शिवराज, वसुंधरा और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह को बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। वहीं, चुनाव हारने के बाद भी अपने-अपने राज्य में महत्वपूर्ण पद का सपना देख रहे इन लोगों को आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीतियों के तहत वहां से दूर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी जाति आधारित राजनीतिक समीकरण पर ध्यान दे रही है। बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक शिवराज चौहान मध्य प्रदेश में और वसुंधरा राजे राजस्थान में विपक्ष की नेता बनना चाहती थीं लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने विपक्ष के नेता के तौर पर एक ब्राह्मण गोपाल भार्गव को चुना है।

मध्य प्रदेश में 2003 से बीजेपी के तीनों मुख्यमंत्री उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज चौहान पिछड़ा वर्ग से थे। भार्गव बीजेपी की पसंद तब बन गए थे जब एससी/एसटी एक्ट को लेकर बीजेपी द्वारा अध्यादेश लाए जाने के बाद राज्य में ब्राह्मण सहित सामान्य वर्ग में भारी नाराजगी देखी गई। लोकसभा चुनाव से पहले कहा जा रहा है कि भार्गव को विपक्ष का नेता बनाकर पार्टी ने ब्रह्मण और सामान्य वर्ग को साधने की कोशिश की है। वहीं, आर्थिक तौर पर कमजोर सवर्णों को नौकरी में 10 फीसदी का आरक्षण देने का फैसला भी बीजेपी के लिए फायदेमंद हो सकता है।

राजस्थान में पार्टी की भीतरी लड़ाई बीजेपी की हार की एक बड़ी वजह रही। यहां बीजेपी ने गुलाब चंद कटारिया को विपक्ष का नेता बनाया। बीजेपी सरकार के समय कटारिया वसुंधरा के बाद गृहमंत्री के तौर पर नंबर दो थे और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की पसंद माने जाते हैं। कहा जाता है कि कटारिया राजे के नेतृत्व को चुनौती देते रहे हैं। कटारिया को विपक्ष का नेता बनाया जाना इस बात का संकेत है कि लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान नें बीजेपी कांग्रेस के खिलाफ नई टीम के साथ उतरी है। हालांकि वसुंधरा के प्रतिनिधि राजेंद्र राठौर विपक्ष को उपनेता चुना जाना बताता है कि पार्टी में राजे के पैर अब भी जमे हुए हैं। 2014 में राजस्थान में बीजेपी ने सभी 25 लोकसभा सीटें जीती थीं।

छत्तीसगढ़ में रमन सिंह पर आरोप लग रहे थे कि वह अपनी जाति के लोगों का पक्ष ले रहे थे और दूसरे बीजेपी नेताओं को अलग-थलग कर रहे थे। यहां पार्टी ने अन्य पिछड़ा वर्ग के कुर्मी समुदाय से आने वाले धर्मलाल कौशिक को विपक्ष का नेता चुना। कांग्रेस सीएम भूपेश वघेल भी इसी समुदाय से आते हैं इसलिए कौशिक को विपक्ष के नेता को तौर पर चुना जाना बीजेपी की लोकसभा चुनाव की तैयारी मानी जा रही है।

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