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24 चुनाव कवर कर चुके विशेषज्ञ बोले- 2017 में नरेंद्र मोदी के दोबारा PM बनने की संभावना थी 99%, अब 50-50

वैश्विक अर्थशास्त्र और राजनीति पर व्यापक रूप से लिखने वाले अर्थशास्त्री और निवेशक रुचिर शर्मा ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी के 2019 में फिर से प्रधानमंत्री बनने के चांस घट गए हैं। विश्वभर के समाचार पत्रों के लिए स्तंभकार के तौर पर लिखने वाले शर्मा ने पीटीआई को दिए एक खास साक्षात्कार में कहा है कि 2019 में नरेंद्र मोदी के फिर से चुने जाने की संभावना 99 फीसदी से 50 फीसदी पर आ गई है।

पीएम मोदी और अर्थशास्त्री रुचिर शर्मा की फाइल फोटो। (Image Source: PTI और Facebook/OPEN magazine, India)

वैश्विक अर्थशास्त्र और राजनीति पर व्यापक रूप से लिखने वाले अर्थशास्त्री और निवेशक रुचिर शर्मा ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी के 2019 में फिर से प्रधानमंत्री बनने के चांस घट गए हैं। विश्वभर के समाचार पत्रों के लिए स्तंभकार के तौर पर लिखने वाले शर्मा ने पीटीआई को दिए एक खास साक्षात्कार में कहा है कि 2019 में नरेंद्र मोदी के फिर से चुने जाने की संभावना 99 फीसदी से 50 फीसदी पर आ गई है। पीटीआई के मुताबिक शर्मा 24 चुनाव कवर कर चुके हैं। रुचिर शर्मा ने बताया कि 2017 में मोदी के फिर से पीएम बनने की संभावना 99 फीसदी थी लेकिन 2018 में यह 50 फीसदी पर आ गई। शर्मा ने इसके पीछे कोई खास बजह नहीं बताई, उनका कहना है कि अलग-अलग बंटे विपक्ष के एकसाथ आने से ऐसे संकेत बन रहे हैं। अपनी आने वाली किताब ‘डेमोक्रेसी ऑन रोड’ के लिए काम कर रहे रुचिर शर्मा ने कहा कि 2014 में बीजेपी 31 फीसदी वोटशेयर के साथ जीती थी क्योंकि विपक्ष बंटा हुआ था, सीटों का शेयर असंगत था और वोट एक जगह केंद्रित थे।

शर्मा ने कहा कि 2019 के चुनाव एकदम अलग होने वाले हैं, अब नाटकीय रूप से आंकड़ों का अंतर बदल गया है, अब 50-50 चुनाव होने जा रहा है और गंठबंधनों को ज्यादा अवसर मिलने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी तरह से बंटा हुआ विपक्ष अब वास्तव में एकजुट होने के संकेत दे रहा है, कोई नहीं चाहता कि चुनाव की नतीजे एकतरफा रहें। अर्थशास्त्री की विश्व राजनीति पर गहरी नजर है, खासकर भारत पर। उनकी आने वाली किताब संभवता 2019 के चुनाव से पहले फरवरी में लॉन्च होगी। अर्थशास्त्री का दावा है कि चुनावों को लेंस के तौर पर इस्तेमाल करते हुए उनकी किताब यह अंतर्दृष्टि उपलब्ध कराएगी कि भारतीय लोकतंत्र कैसे काम करता है।

शर्मा के पास भारत में दो दर्जन चुनावों को कवर करने का अनुभव हैं, यह काम वह 1990 से कर रहे हैं। वह 2004 के चुनावों को याद करते हुए बताते हैं कि तब अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भी आज के जैसी ही स्थिति बन गई थी। उन्होंने कहा कि जब वाजपेयी के खिलाफ विपक्ष एकजुट होने लगा था तब भी यही सवाल खड़ा हो गया था कि वाजपेयी नहीं तो प्रधानमंत्री कौन बनेगा.. और ऐसी स्थिति में एक्सीडेंटल बना। 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश भारत का माइक्रोसोम्स बताते हुए शर्मा ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच राज्य में गठबंधन होता है तो वह चुनाव में सूपड़ा साफ कर जीतेंगा, गठबंधन नहीं होता है तो बीजेपी जीतेगी। शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब भी जाति के आधार पर वोट दिया जाता है।

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