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2012 गैंगरेप केस में एक दोषी ने लगाया बड़ा आरोप- तिहाड़ जेल में मेरे साथ हुआ यौन उत्पीड़न; अफसर देखते रहे तमाशा!

वकील अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सभी रिकॉर्ड्स नहीं भेजे गए थे, इसलिए दया याचिका को खारिज किया जाना 'मनमाना और दुर्भावनापूर्ण' है।

सुप्रीम कोर्ट।(फाइल फोटो)

2012 गैंगरेप मामले के एक आरोपी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज किए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मुकेश सिंह ने कोर्ट में कहा कि उसकी दया याचिका पर ‘मन से विचार नहीं’ किया गया। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा।

मुकेश सिंह की तरफ से उसकी वकील अंजना प्रकाश कोर्ट में पेश हुई। वकील अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सभी रिकॉर्ड्स नहीं भेजे गए थे, इसलिए दया याचिका को खारिज किया जाना ‘मनमाना और दुर्भावनापूर्ण’ है।

मुकेश सिंह की वकील अंजना प्रकाश ने दावा किया कि जेल में यौन उत्पीड़न किया गया। वकील ने दावा किया कि दया याचिका खारिज होने से पहले ही उसे एकांतवास में भी रखा गया, जो कि जेल नियमों का उल्लंघन है।

याचिका के अनुसार, उसके उत्पीड़न के दस्तावेज दया याचिका के साथ राष्ट्रपति को नहीं भेजे गए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दस्तावेज नहीं भेजने के दावे को खारिज कर दिया।

मुकेश की वकील अंजना प्रकाश ने कोर्ट में कहा कि “आप किसी की जिन्दगी से नहीं खेल सकते। आपको इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।” न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। वकील के तर्क पर याचिका की सुनवाई कर रहे जस्टिस अशोक भूषण ने सवाल किया कि “आपका कहने का मतलब है कि राष्ट्रपति को हर दस्तावेज को देखना चाहिए और फिर फैसला करना चाहिए।”

वहीं पुलिस की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए। सॉलिसिटर जनरल ने मुकेश की दया याचिका के खिलाफ कहा कि ‘जेल में मिली प्रताड़ना दया का आधार नहीं हो सकती। इसके साथ ही उन्होंने मुकेश को एकांतवास में रखे जाने के दावे को भी खारिज किया और कहा कि मुकेश को सिर्फ अलग सेल में रखा गया था, जिसे एकांतवास नहीं कहा जा सकता। ‘

2012 गैंगरेप केस के दोषी मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय कुमार और अक्षय कुमार को शनिवार को सुबह 6 बजे फांसी दी जानी है। यही वजह है कि मुकेश द्वारा दया याचिका के खिलाफ दाखिल की गई याचिका को चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे।

दिल्ली में 2012 में हुये इस जघन्य अपराध के लिये चार मुजरिमों को अदालत ने मौत की सजा सुनायी थी। इन दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी जिसके खिलाफ इस दोषी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है।

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