ताज़ा खबर
 

मालेगांव ब्लास्ट केस ट्रायल से मीडिया को दूर रखना चाहता था NIA, अदालत ने दिया झटका

बता दें कि 29 सितंबर, 2008 को हुए मालेगांव धमाके में चार लोगों की मौत हो गई थी और 79 लोग घायल हो गए थे। यह धमाका नासिक जिले के मालेगांव शहर में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के पास हुआ था।

बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा। (Photo-Indian Express)

मुंबई की एक विशेष अदालत ने मालेगांव बम धमाके 2008 के मामले में सुनवाई करते हुए NIA को झटका दिया है। NIA ने मांग की थी कि इस मामले की सुनवाई कमैरे की निगरानी में हो और मीडिया ट्रायल से इस मामले को दूर रखा जाए। NIA की इस मांग के खिलाफ इंडियन एक्स्प्रेस के पत्रकार समते 11 पत्रकारों ने इस खिलाफ आवेदन किया था।

NIA के विशेष जज वीएस पदलाकर ने कहा की NIA की याचिका को ठुकराने का मकसद है मामले की पारदर्शिता के साथ सुनवाई करना।मामले की संवेदनशीलता और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और एनआईए अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए NIA का कहना था कि विशेष अदालत के पास इन-कैमरा कार्यवाही करने के लिए आदेश पारित करने का अधिकार है। एनआईए द्वारा दिए गए प्रावधानों में एनआईए अधिनियम की धारा 17 और यूएपीए की धारा 44 है, जो गवाहों की सुरक्षा के लिए अदालत को अपने नाम का उल्लेख करने से बचने, अपनी पहचान सुरक्षित करने के निर्देश जारी करने और सभी या किसी भी कार्यवाही के लिए आदेश देती है।

अगर एनआईए की याचिका को कोर्ट ने मंजूरी दे दी होती तो अभियोजन पक्ष, अभियुक्तों और उनके वकीलों, साथ ही एक हस्तक्षेपकर्ता (विस्फोट में मारे गए पीड़ित के पिता) के लिए वकील सहित किसी भी व्यक्ति को मामले में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। पत्रकारों के आवेदन को लेकर एनआईए का कहना है कि वह “बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार” के पक्ष में है, इस मामले की संवेदनशीलता को देखतने हुए देखते हुए इन-कैमरा सुनवाई के लिए याचिका दायर की गई है।

बता दें कि 29 सितंबर, 2008 को हुए मालेगांव धमाके में चार लोगों की मौत हो गई थी और 79 लोग घायल हो गए थे। यह धमाका नासिक जिले के मालेगांव शहर में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के पास हुआ था। एक मोटरसाइकिल में  विस्फोटक सामाग्री रखी हुई थी जिसके बाद यह धमाका हुआ था। जांच शुरू की तो मोटरसाइकिल मालिक की जांच उन्हें सूरत तक ले गई। यहीं से एटीएस के हाथ साध्वी प्रज्ञा ठाकुर तक पहुंचे।पदार्थ रखा हुआ था।

मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ने भी NIA की याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि  वह भी “मीडिया ट्रायल” का शिकार हुईं। मीडिया ट्रायल के चलते गवाहों सहित बड़े पैमाने पर जनता की राय “प्रभावित” हुई। उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा है और “मुकदमे की निष्पक्षता को खतरे में डालना” है।

Next Stories
1 Kerala State Lottery Today Results announced: रिजल्ट घोषित, देखें किसे लगा है 70 लाख का पहला इनाम
2 ‘कश्मीर-कश्मीर इतना किए कि कराची भूल गए’, कमांडोज की निगरानी में श्रीलंका टीम, गंभीर ने VIDEO शेयर कर साधा निशाना
3 IAS अफसर ने पलटा सीएम येदियुरप्पा का फैसला, मर्जी के खिलाफ बेंगलुरु में कराए मेयर के चुनाव
ये पढ़ा क्या?
X