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मुंबई 2006 ट्रेन विस्फोट: पूर्व पुलिस आयुक्त ने मामले में फैसले का किया स्वागत

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त एएन रॉय ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में 13 आरोपियों में से 12 लोगों को दोषी ठहराने के मकोका अदालत के फैसले का आज स्वागत किया। विस्फोटों की जांच में रॉय की भी भूमिका थी ।

Author मुंबई | September 11, 2015 5:10 PM
मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त एएन रॉय ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में 13 आरोपियों में से 12 लोगों को दोषी ठहराने के मकोका अदालत के फैसले का आज स्वागत किया। विस्फोटों की जांच में रॉय की भी भूमिका थी ।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त एएन रॉय ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में 13 आरोपियों में से 12 लोगों को दोषी ठहराने के मकोका अदालत के फैसले का आज स्वागत किया। विस्फोटों की जांच में रॉय की भी भूमिका थी ।

न्यायाधीश वाईडी शिन्दे द्वारा फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रॉय ने कहा कि उन्हें खुशी है कि अदालत ने मुंबई पुलिस और आतंकवाद निरोधक दस्ते :एटीएस: की गहन जांच के बाद दायर किए गए आरोपपत्र को सही माना ।

रॉय ने कहा, ‘‘जिस तरह जांच की गई, उससे मुझे खुशी है । मुंबई पुलिस और एटीएस ने गहन जांच की थी । शुरू में इसके लिए यह बिल्कुल अंधा मामला था । हमारे पास कोई सुराग नहीं था । लेकिन मैं फैसले से संतुष्ट हूं । तेरह आरोपियों, जिन पर मुकदमा चलाया गया, में से 12 को दोषी ठहराया गया है, जबकि एक बरी हो गया है ।’’

सुभाष कांबले ग्यारह जुलाई 2006 को बांद्रा से ट्रेन में सफर कर रहे थे । उन्हें लगता है कि फैसला काफी देर से आया है, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि सोमवार को कठोर सजा सुनाई जाएगी ।

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कांबले ने कहा, ‘‘इसमें काफी देर हुई है । नौ साल एक लंबा समय है…हम दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग करते हैं । जो अब भी बाहर है, सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें दंडित करना चाहिए । हम तब संतुष्ट होंगे जब दोषियों को मृत्युदंड मिलेगा । लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया।’’

विशेष लोक अभियोजक राजा ठाकरे के अनुसार सभी 12 दोषी भादंसं की धाराओं- 120बी (आपराधिक साजिश), 302 (हत्या) और मकोका कानून की धारा 311 के तहत दोषी पाए गए हैं । अंतिम दो धाराओं में मौत की सजा मिल सकती है ।
सजा की मात्रा पर जिरह सोमवार से शुरू होगी ।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह संतुष्ट हैं, उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे प्रसन्न या अप्रसन्न होने का सवाल नहीं है । जो चीज असल में मायने रखती है…वह है कि हम इतने सारे लोगों के मारे जाने से व्यथित हैं । मैं चाहता हूं कि बड़ी संख्या में लोगों को (फैसले से) संतुष्ट होना चाहिए ।’’

मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में आरडीएक्स बमों के फटने के नौ साल बाद आज यहां एक मकोका अदालत ने श्रृंखलाबद्ध विस्फोट मामले में 12 लोगों को दोषी ठहराया । इन धमाकों में 188 लोग मारे गए थे ।

इस बीच, राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस तथा राकांपा ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है ।

भाजपा और राकांपा दोनों ने कहा कि प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने के लिए आतंकवाद के मामलों को तेज गति से चलाया जाना चाहिए ।

भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा, ‘‘यह निर्णय आतंकवाद के खिलाफ देश की संकल्प शक्ति को दर्शाता है ।’’

भंडारी ने कहा, ‘‘लगभग 10 साल के बाद फैसला आया है । हम भविष्य में पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने की उम्मीद करते हैं, ताकि शोकसंतप्त परिवारों को आश्वस्त किया जा सके कि सरकार किसी तरह के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी ।’’
मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के फैसलों से देश की न्यायपालिका में लोगों का संकलप दृढ़ होता है ।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं मकोका अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं । इस तरह की दोषसिद्धि से भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देश और आतंकवाद रोधी एजेंसियों को शक्ति मिलेगी ।’’

निरूपम ने कहा, ‘‘जब अदालतें आतंकवाद में संलिप्त लोगों को दोषी ठहराती हैं तो इससे राष्ट्र की न्यायपालिका के प्रति लोगों का संकल्प मजबूत होता है ।’’

राकांपा की मुंबई इकाई के प्रमुख सचिन अहीर ने कहा कि फैसला बहुत पहले आ जाना चाहिए था ।

अहीर ने कहा, ‘‘यद्यपि देर हुई है, लेकिन न्याय हुआ है । यदि यह फैसला पहले आ जाता तो इन हमलों से प्रभावित परिवार अधिक प्रसन्न होते । हालांकि हमारी न्यायपालिका इस तरह के मामलों को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने में सक्षम है, आतंकवाद के मामलों को त्वरित गति से चलाए जाने की आवश्यकता है ।’’

उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों को भी तेज गति से चलाने की आवश्यकता है क्योंकि इस तरह के हमलों के साजिशकर्ता ‘‘महिलाओं की गरिमा के लिए खतरा हैं ।’’

अहीर ने कहा, ‘‘महिलाओं पर अत्याचार, खासकर बलात्कार, महिलाओं की गरिमा के लिए खतरा हैं । इस तरह, साजिशकर्ताओं को समाज के खतरे के रूप में माना जाना चाहिए और एक तय अवधि में उचित सजा दी जानी चाहिए ।’’

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