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2002 गुजरात दंगे: सुप्रीम कोर्ट का आदेश- पीड़िता बिल्किस बानो को 50 लाख का मुआवजा दे गुजरात सरकार

2002 Gujarat Riots Case: सूबे में विजय रूपाणी के नेतृत्व वाली सूबे की सरकार से कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि वह बानो को नियमानुसार सरकारी नौकरी और घर मुहैया कराए।

Author Updated: April 23, 2019 9:58 PM
(फाइल फोटो)

2002 Gujarat Riots Case: गुजरात दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (23 अप्रैल, 2019) को आदेश दिया कि राज्य सरकार गैंगरेप पीड़िता बिल्किस बानो को 50 लाख रुपए का मुआवजा दे। सूबे में विजय रूपाणी के नेतृत्व वाली सूबे की सरकार से कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि वह बानो को नियमानुसार सरकारी नौकरी और घर मुहैया कराए। यह आदेश चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने  दिया।

इससे पहले, मार्च में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पीड़िता को पांच लाख रुपए मुआवजा देने का प्रस्ताव पेश किया था, पर बानो ने उसे लेने से इन्कार कर दिया था। याचिका दायर कर बानो की तरफ से अधिक रकम मांगी गई थी। कहा गया था कि राज्य सरकार मुआवजे की रकम मामले के हिसाब से ऐसी दे, जिसे स्वीकारा जा सके और वह दूसरों के लिए नजीर भी बन सके।

पीड़िता की वकील शोभा गुप्ता ने कहा था, “इतने बड़ी घटना का सामना करने के बाद बानो दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। ऐसे में उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।” सुप्रीम कोर्ट ने उसके बाद गुजरात सरकार द्वारा दिए पांच लाख रुपए के मुआवजे की पेशकश को ‘अंतरिम’ करार दिया था और अगली सुनवाई 23 अप्रैल के लिए तय कर दी थी।

वहीं, बानो के वकील का यह भी कहना था कि जिस पुलिस अधिकारी ने जांच में ढील बरती, उसे भी सजा नहीं दी गई। ऐसा तब हुआ, जब बॉम्बे हाईकोर्ट उसे दोषी ठहरा चुका था। हालांकि, गुजरात सरकार ने कोर्ट को बताया कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं।

‘भाषा’ के अनुसार, गुजरात सरकार ने बेंच को बताया कि संबंधित पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। मसलन उनके पेंशन लाभ रोक दिए गए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आईपीएस अधिकारी की दो रैंक पदावनति कर दी गई है।

कोर्ट ने 30 मार्च को बीती सुनवाई में गुजरात सरकार से संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए कहा था। इन अधिकारियों में आईपीएस अफसर भी शामिल थे, जिन्हें गैंगरेप मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था।

गुप्ता ने तब कहा था, “एक आईपीएस अधिकारी जो कि मौजूदा समय में सेवा में हैं और इस साल सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके अलावा चार अन्य अधिकारी जो रिटायर हो चुके हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मसलन उनकी पेंशन नहीं रोकी गई और न ही सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ उन्हें देना बंद किए गए।”

बता दें कि गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुए दंगों के दौरान बिल्कीस बानो बलात्कार कांड और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या मामले में स्पेशल कोर्ट ने 21 जनवरी, 2008 को 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि पुलिसर्किमयों और चिकित्सकों सहित सात आरोपियों को बरी कर दिया था।

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