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मुश्किल में हैं, तुरंत डायल करें 112

अब भारत में सभी आपातकालीन जरूरतों के लिए एकीकृत नंबर जारी किया गया है। अब आप पुलिस, दमकल जैसी किसी भी आपातकालीन जरूरत के लिए 112 नंबर से मदद मांग सकते हैं। अमेरिका में आपात सेवा का इसी तरह का एक नंबर ‘911’ है।

Author नई दिल्ली | April 20, 2019 12:58 AM
गृह मंत्रालय के मुताबिक देश भर के 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 से जुड़ चुके हैं। इस नंबर पर संकट की घड़ी में कोई भी तत्काल सहायता मांग सकता है।

अब भारत में सभी आपातकालीन जरूरतों के लिए एकीकृत नंबर जारी किया गया है। अब आप पुलिस, दमकल जैसी किसी भी आपातकालीन जरूरत के लिए 112 नंबर से मदद मांग सकते हैं। अमेरिका में आपात सेवा का इसी तरह का एक नंबर ‘911’ है। गृह मंत्रालय के मुताबिक देश भर के 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 से जुड़ चुके हैं। इस नंबर पर संकट की घड़ी में कोई भी तत्काल सहायता मांग सकता है। इस योजना के लिए सरकार ने कुल 321.69 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह हेल्पलाइन पुलिस (100), दमकल (101) और महिला हेल्पलाइन (1090) नंबरों का समांतर नंबर है और यह योजना केंद्र सरकार के निर्भया फंड के तहत लागू की जा रही है।

जो 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इससे जुड़े हैं, उनमें हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादर और नगर हवेली, दमन और दीव, जम्मू और कश्मीर और नगालैंड शामिल हैं। सूचना व प्रसारण मंत्रालय को हर तरह की आपात सेवा के लिए एक टोल फ्री नंबर लांच करने का खाका भी तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मंत्रालय ने ‘इमरजंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस)’ विकसित की।

इस प्रणाली के तहत इस एकल आपात नंबर की व्यवस्था की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नंबर है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी मोबाइल फोन में एक पैनिक बटन पहले से ही बनाया गया है, जिसे किसी आपात स्थिति में ‘112’ पर कॉल करने के लिए क्रियाशील किया जा सकेगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जो आपात प्रतिक्रिया केंद्र (ईआरसी) गठित किए हैं, वे ‘112’ से वॉयस कॉल के जरिए पैनिक सिग्नल, राज्य के ईआरएसएस वेबेसाइट पर संदेश या ‘112’ मोबाइल ऐप संदेश प्राप्त कर सकते हैं।

इमरजंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम के लिए कुल 321.69 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जिसमें से निर्भया फंड से पहले ही 278.66 करोड़ रुपया राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी कर दिया गया है। डॉयल 112 फेसबुक, ट्विटर और वाट्सएप से जुड़ा रहेगा। इसके यूजर होमपेज में जाकर शिकायतें भेज सकेंगे। ऐसी शिकायतें गोपनीय रहेंगी। अधिकारियों के मुताबिक, वेबपेज को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है, जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी आसानी से उसे समझ सकें और सोशल मीडिया से भी अपनी शिकायत या सूचनाएं पहुंचा सकें।

इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद उसमें 10 परिजनों/दोस्तों के नंबर जोड़े जा सकते हैं और जब कभी फोनधारक 112 डायल करेगा, इससे जुड़े सभी नंबरों को भी इसकी सूचना मिल जाएगी। यह ऐप जीपीएस या मोबाइल ऑपरेटर के टावर के जरिए नंबर डायल करने वाले का लोकेशन अपने-आप पता कर लेगा। इस सेवा के लिए प्रशिक्षित व्यक्तियों को नियंत्रण कक्ष में नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी और अन्य भाषाओं में धाराप्रवाह बोलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

योजना पर कुल 321.69 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार 

जो 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इससे जुड़े हैं, उनमें हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश,
उत्तराखंड, पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादर और नगर हवेली, दमन और दीव, जम्मू और कश्मीर और नगालैंड शामिल हैं

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