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‘हफ्ते में 20 घंटे, साल में 190 दिन पढ़ाई, होमवर्क नहीं’, फिनलैंड जैसी शिक्षा नीति चाहते हैं संघ प्रमुख मोहन भागवत

फिनलैंड के स्कूली बच्चों को हफ्ते में 20 घंटे और साल में 190 दिन पढ़ाया जाता है जबिक भारत के अधिकर स्कूलों में हर सप्ताह औसतन 30-33 घंटे बच्चों को पढ़ाया जाता है। भारत में बच्चों को होमवर्क का काफी बोझ होता है

Author नई दिल्ली | Updated: August 18, 2019 6:43 PM
RSS प्रमुख मोहन भागवत एक कार्यक्रम में बोलते हुए। फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने फिनलैंड की शिक्षा नीति की तारीफ करते हुए इसे विश्व की सबसे अच्छी शिक्षा नीति बताया है। उन्होंने भारत को यहां की शिक्षा नीति से प्रेरणा लेने को कहा है। आरएसएस के संबद्ध शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित कार्यक्रम ज्ञानोत्सव में भागवत ने कहा, फिनलैंड को उसकी शिक्षा नीति के लिए विश्व भर में सराहा जा रहा है।

अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इस हैरत में हैं कि फिनलैंड की शिक्षा नीति कितनी अच्छी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां जीवन के संघर्ष से लड़ना सिखाया जाता है, परीक्षा में ज्यादा अंक लाना नहीं। जैसे उनके यहां उनके देश के मूल्य को शिक्षा में शामिल किया गया है। उसी तरह भारत को भी अपने यहां की शिक्षा में अपने देश के मूल्यों को शामिल करना चाहिए।। फिनलैंड की इस शिक्षा नीति के सफल होने के पीछे उसे देश के मूल्य नहीं है बल्कि लंबे अरसे से वहां लागू रणनीति इस शिक्षा नीति की सफलता की वजह है।

फिनलैंड के स्कूली बच्चों को हफ्ते में 20 घंटे और साल में 190 दिन पढ़ाया जाता है जबिक भारत के अधिकर स्कूलों में हर सप्ताह औसतन 30-33 घंटे बच्चों को पढ़ाया जाता है। भारत में बच्चों को होमवर्क का काफी बोझ होता है लेकिन फिनलैंड के बच्चों को होमवर्क नहीं दिया जाता है। इसके अलावा वहां को टेस्ट भी नहीं होता है।

अमेरिका के डाक्यूमेंट्री फिल्ममेकर माइकल मूरे ने साल 2015 में अपनी एक फिल्म वेयर टू इनवेड नेक्स्ट में फिनलैंड के पूर्व शिक्षा मंत्री क्रिस्ता कियूरू का साक्षात्कार किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि होमवर्क ना होना इस सिस्टम का सबसे अच्छा पहलू है। कुछ अन्य टीचर और बच्चों ने बातचीत के दौरान मूरे से कहा था कि होमवर्क ना होने के कारण बच्चे काफी कुछ नया सीखते हैं,कोई परिवार वालों के साथ वक्त बिताता है कोई पेड़ पर चढ़ता है को संगीत सीखता है, बच्चे अपनी अपनी रुचि के हिसाब से नई चीजें सीखते हैं। भारत में तीन साल के बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं जबकि फिनलैंड में 6 साल की उम्र से स्कूल जाने की शुरुआत होती है। वहां कोई प्राइमरी , सेकेंड्री और हाईयर सेकेंड्री सेक्शन नहीं हैं।

गौरतलब है कि Programme for International Students Assessment में फिनलैंड ने लंबे समय से अपना स्थान बनाए रखा है। साल 2017 में यह देश गणित में पूरे विश्वभर में 12वें स्थान, विज्ञान में पांचवें पर और रीडिंग में चौथे स्थान पर रहा।

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