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यूपी: दलितों पर फर्जी स्टोरी दिखाने के आरोप में दो पत्रकारों पर मुकदमा, टीचरों से वसूली में एक जर्नलिस्ट गिरफ्तार

खुद पर एफआईआर दर्ज होने पर पत्रकारों का कहना है कि सही रिपोर्टिंग के चलते यूपी पुलिस द्वारा उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

Author , मेरठ, लखनऊ | September 8, 2019 8:13 AM
UP POLICEतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

उत्तर प्रदेश में बिजनौर पुलिस ने दो पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें एक पत्रकार स्थानीय दैनिक अखबार और दूसरा इलेक्ट्रोनिक मीडिया आउलेट के लिए काम करता है। आरोप है कि दोनों ने दलितों से जुड़ी एक फर्जी स्टोरी की जिसमें कहा गया कि मंडावर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले तितरवाला बासी गांव में एक दलित परिवार को उनके समुदाय के एक प्रभावशाली परिवार ने नल से पानी नहीं भरने दिया।

सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में विशाल (एक पत्रकार जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।) ने दावा किया, ‘हमें बासी गांव के प्रेमचंद वाल्मीकि ने चार सिंतबर को फोन किया। उन्होंने बताया कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को पानी का नल नहीं इस्तेमाल करने की धमकी दी। इसलिए उन्होंने घर के बाहर अपना मकान बेचने का पोस्टर लगाया हैं। हम सच्चाई जानने के लिए गांव गए और इससे जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की।’ इसी मामले में एक अन्य पत्रकार के खिलाफ शनिवार को शिकायत दर्ज की गई। पुलिस ने बताया कि पत्रकार की पहचान राशिद के रूप में की गई।

वहीं स्थानीय मीडियाकर्मियों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि तथ्यात्मक रिपोर्ट के चलते दो पत्रकारों को पुलिस द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा पत्रकारों के समर्थन में शनिवार को बिजनौर में एक मार्च निकाला गया। स्थानीय पत्रकार इफ्तिखार अहमद ने बताया कि यहां एक पत्रकार संघ ने उनकी लड़ाई लड़ने के लिए आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है।

पत्रकार विशाल ने एक वीडियो में दावा किया, ‘हमारे खिलाफ एफआईआर ने स्थानीय पुलिस के गलत इरादों को उजागर किया है और यह प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा झटका है। हम डरे नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से मीडिया की आवाज का मजाक उड़ाया जा रहा है, वह एक खतरनाक संकेत है।’ विशाल ने वीडियो में आगे कहा, ‘हम चाहते हैं कि एफआईआर को रफा दफा किया जाए और प्रेस के खिलाफ पक्षपात करने वाले स्थानीय पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की जाए।’

वहीं मंडावर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सतेंद्र कुमार ने संडे एक्सप्रेस से फोन पर कहा, ‘दलित परिवार से जुड़ी फर्जी रिपोर्टिंग के चलते दो पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सच्चाई यह है कि मंडावर पुलिस की एक टीम गांव में गई थी जब प्रेमचंद वाल्मीकि ने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों गुटों के बुलाया और दोनों में सुलह हो गई। उन्होंने कहा कि पीने के पानी के चलते दोनों अब झगड़ा नहीं करेंगे।’

इसी बीच प्रदेश के ही आजमगढ़ में एक हिंदी अखबार के 30 वर्षीय पत्रकार को एक प्राथमिक स्कूल के सरकारी शिक्षकों से वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि स्कूल के अधिकारियों का कहना है कि पत्रकार संतोष कुमार जायसवाल ने उन्हें धमकी दी और ब्लैकमेल किया। इस मामले में जनसंद टाइम्स के स्ट्रिंगर जायसवाल को स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

फूलपुर के सर्कल ऑफिसर रवि शंकर ने कहा कि स्कूल के प्रिंसिपल राधेश्याम यादव फूलपुर पुलिस स्टेशन पहुंचे और आरोप लगाया कि जायसवाल स्कूल आते-जाते थे, वह शिक्षकों और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करते थे। वहीं प्रचार्य ने आरोप लगाया, ‘उन्होंने छात्रों और शिक्षकों की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल किया।’

शंकर के मुताबिक, ‘प्राचार्य ने दावा किया कि शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे जायसवाल स्कूल पहुंचा और छात्रों से कहा कि वो झाडूं पकड़ें और उनकी तस्वीरें खींच ली। इस दौरान स्कूल प्रशासन ने आपत्ति जताई तो दोनों पक्षों के बीच खूब बहस हुई।’

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