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रावी की तेज धारा में वायुसेना के 2 जवान बहे

वर्ष 2014 के ब्यास हादसे के बाद अब भारतीय वायुसेना के दो अधिकारी शनिवार देर शाम हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में रावी नदी की तेज धारा में बह गए।

Author शिमला | March 7, 2016 4:16 AM
नदी के तेज बहाव में बह गए वायुसेना के सिपाही

वर्ष 2014 के ब्यास हादसे के बाद अब भारतीय वायुसेना के दो अधिकारी शनिवार देर शाम हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में रावी नदी की तेज धारा में बह गए। यह हादसा नदी में अचानक ज्यादा पानी आ जाने के कारण हुआ, जिसमें तीन अन्य जवानों ने किसी तरह तैर कर अपनी जान बचाई। ये सभी अधिकारी पठानकोट एयरबेस में तैनात थे। जान गंवाने वाले वायुसेना अधिकारियों की पहचान उत्तर प्रदेश के मेरठ वासी नीतेश मिश्रा (26) और राजस्थान में जयपुर वासी शक्ति सिंह (30) के रूप में हुई है।

मालूम हो कि 2014 के ब्यास हादसे में हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्र बह गए थे। चंबा के उपायुक्त सुदेश मोखता ने बताया कि भारतीय वायुसेना के सभी पांचों अधिकारी चंबा में छुट्टियां मनाने पहुंचे थे और नदी के किनारे फोटो खींचते वक्त पानी की धारा में बह गए। उन्होंने बताया कि नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया था, क्योंकि उसमें चमेरा-2 प्रोजेक्ट का पानी छोड़ दिया गया था। तीन अधिकारियों ने किसी तरह छलांग लगा कर अपनी जान बचाई, पर दो अधिकारी पानी की तेज धारा की चपेट में आ गए। उन्होंने बताया कि यह हादसा शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे हुआ था और वहां इलाके में अंधेरे के कारण बचाव अभियान चलाने में दिक्कतें आर्इं और इसे अधूरा छोड़ना पड़ा था। दोनों शवों को रविवार को नदी से निकाला जा सका।

जो तीन अधिकारी किसी तरह बाल-बाल बचे, उनमें नवल पांडे, नवीन शर्मा और गजेंद्र सिंह हैं। उन्हें इलाज के लिए चंबा अस्पताल में भर्ती किया गया है। उनकी हालत वहां स्थिर बनी हुई है। हादसे के बाद तीनों घबराए हुए हैं क्योंकि अपने दो साथियों को उन्होंने अपनी आंखों के सामने पानी की धारा में बहते देखा है।

मोखता ने कहा कि उन्होंने इस हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि पता लगाया जा सके कि चमेरा-2 प्रोजेक्ट का संचालन करने वाले एनएचपीसी की पानी छोड़ने में कोई लापरवाही हुई है या नहीं और उसने प्रदेश हाई कोर्ट बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
की ओर से जारी हिदायतों का पालन किया है या नहीं। क्या वहां नदी में पानी छोड़े जाने से पहले उनकी ओर से लापरवाही तो नहीं बरती गई?
हालांकि, वहां मौके पर नदी के किनारें पर चेतावनी संकेत और बोर्ड लगाए गए हैं जिनमें सैलानियों को नदी में अचानक पानी का स्तर बढ़ जाने के बारे में सचेत किया गया है।

परियोजना अधिकारियों ने भी पानी छोड़े जाते समय वहां सायरन बजाने के इंतजाम किए हैं।
उपायुक्त का कहना है, ‘हो सकता है कि वहां घूमने-फिरने आए भारतीय वायुसेना के इन अधिकारियों ने सायरन की आवाज की अनदेखी की हो, इस बात का पता जांच में ही चल पाएगा। इस बारे में रपट एडीएम, चंबा शुभकरमण से अगले 15 दिनों तक मांगी गई है।’
इस बीच दोनों अधिकारियों के शवों का पोस्टमार्टम रविवार को किया गया और वायुसेना के आला अधिकारी हादसे के तुरंत बाद ही मौके पर पहुंच गए थे, और हादसे में मृत अधिकारियों के परिजनों को भी हादसे की सूचना दे दी गई है।

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