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गुजरात: अगली क्लास में नहीं जा पाएंगे 2.5 लाख से ज्यादा बच्चे, RTE कानून में बदलाव के बाद हुआ फैसला

गुजरात के शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों को फेल नहीं करने की नीति के कारण राज्य में बच्चों के सीखने का स्तर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसका सीधा प्रभाव राज्य के बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर भी पड़ा है।

Author अहमदाबाद | Updated: August 18, 2019 10:11 AM
शिक्षा विभाग प्राथमिक स्कूल के छात्रों का स्तर सुधारने के लिए उपाय कर रही है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गुजरात में इस साल लगभग 2.5 से 2.7 लाख बच्चे इस बार अगली क्लास में नहीं जा सकेंगे। माना जा रहा है कि ऐसा राज्य में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून में पिछले महीने हुए संशोधन को लागू करने के निर्णय के कारण होगा। संसद में इस साल जनवरी में आरटीई कानून में संशोधन पारित किया था।

इसमें नो डिटेंशन पॉलिसी से जुड़ा संशोधन किया गया। इसमें राज्यों को यह अधिकार दिया गया था कि कमजोर बच्चों को उसी क्लास में रखना है या फिर उन्हें आगे की क्लास में भेजना है, इस संबंध में वे अपने स्तर पर निर्णय ले सकती हैं। गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चूड़ासामा ने पिछले महीने अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार मौजूदा अकादमिक सत्र से ही पांचवी से 8वीं क्लास में परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों को उसी क्लास में रखेगी।

जनवरी में संशोधन के पारित होने के तुरंत बाद चुड़ासामा ने कहा था कि गुजरात सरकार लंबे समय से यह मांग कर रही थी। यह मार्च-अप्रैल 2020 की वार्षिक परीक्षा से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को फेल नहीं करने की नीति के कारण राज्य में बच्चों के सीखने का स्तर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसका सीधा प्रभाव राज्य की बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर भी पड़ा है।

शिक्षा मंत्री ने उस समय यह भी कहा था कि इस संशोधन के बाद फेल होने वाले छात्रों के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इससे बोर्ड परीक्षा के परिणामों में सुधार होगा। इस फैसले के बाद पांचवी क्लास से 8वीं क्लास के 30 से 33 फीसदी बच्चों को उनकी मौजूदा क्लास में ही रोक लिया जाएगा।

शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म करने के बाद 8वीं क्लास में 2.5 लाख छात्रों को रोके जाने के बाद पहले साल में नए छात्रों की संख्या में 8 लाख की बढ़ोतरी हो जाएगी।’ मालूम हो कि पहले आरटीई के तहत पहली से 8वीं क्लास तक किसी भी बच्चे को फेल नहीं किया जाता था।

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