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1993 मुंबई ब्‍लास्‍ट: गुजरात दंगों में मुस्लिम मह‍िलाओं के रेप का वीड‍ियो द‍िखा कर की गई थी तैयारी, आठ टन आरडीएक्‍स लेकर आया था मेमन

Mumbai Blast Case 1993, Preparation: मुस्लिम युवक दुबई भी ले जाए गए, जहां उनका ब्रेन वाश जिहाद के नाम पर हुआ। उन्हें घंटों तक गुजरात दंगों के दौरान मुस्लिम महिलाओं के रेप का वीडियो दिखाया गया।

12 मार्च 1993 के दिन देश की आर्थिक नगरी मुंबई दहल उठी थी। 13 सीरियल धमाकों में कुल 257 लोग मारे गए थे। (फाइल फोटो)

साल 1993 में मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट केस में टाडा अदालत ने फैसला सुना दिया है मगर यह जानकर लोगों को हैरानी होगी कि गुनहगारों ने 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद हुए गुजरात दंगों के दौरान मुस्लिम महिलाओं के रेप का वीडियो दिखा कर जिहाद के नाम पर इस ब्लास्ट की तैयारी की थी। इसके लिए सबसे पहले कुछ भारतीय मुस्लिम युवक पाकिस्तान पहुंचे और वहां विध्वंस करने और गोला-बारूद विस्फोट की ट्रेनिंग ली। ये लोग दुबई भी ले जाए गए, जहां उनका ब्रेन वाश जिहाद के नाम पर हुआ। उन्हें घंटों तक गुजरात दंगों के दौरान मुस्लिम महिलाओं के रेप का वीडियो दिखाया गया। दिल में नफरत से लबरेज हो जाने के बाद इन्हें मुंबई में विस्फोट कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके लिए टाइगर मेमन आईएसआई की मदद से आठ टन आरडीएक्स लेकर आया था। इसमें उसका साध दाऊद इब्राहिम ने दिया था। मेमन और दौसा इस ऑपरेशन को अंजाम दे रहा था। इसका खुलासा एस हसन जैदी की किताब ‘माई नेम इज अबु सलेम’ में किया गया है।

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इसी किताब में लिखा गया है कि पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई लंबे समय से इस फिराक में थी कि कश्मीर से ध्यान हटाकर भारत के बीचो-बीच तबाही फैलाई जाए। इसके लिए आईएसआई को कुछ भारतीय मुस्लिम युवकों के साथ की जरूरत थी। आईएसआई ने मिशन सेंट्रल इंडिया के लिए फिलिस्तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन और अफगान मुजाहिद्दीन जैसे दुबई आधारित संगठनों और बड़े बिजनेसमैन से संपर्क किया। इसके अलावा आईएसआई ने दाऊद इब्राहिम, अनीस, मोहम्मद दौसा, टाइगर मेमन, ताहिर मर्चेन्ट से भी संपर्क किया आईएसआई ने इस ऑपरेशन का नाम तहरीक-ए-इंसाफ रखा और इसके लिए इन सभी लोगों को तैयार किया।

इस ऑपरेशन कि लिए दाऊद को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वो टाइगर मेमन को हरसंभव लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराएगा ताकि वो समंदर के रास्ते भारतीय तट तक आरडीएक्स ला सके। किताब में लिखा गया है कि मेमन ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए फरवरी 1993 में आठ टन आरडीएक्स, हजारों ग्रेनेड्स और कई कलाशिंकोव राइफल महाराष्ट्र के रायगढ़ पहुंचाया था।  ब्लास्ट के सारे सामान जमा करने के बाद मेमन ने 19 लोगों की एक टीम को सिसिलेवार धमाकों के बारे में समझाया भी था।

इसके बाद सुनियोजित तरीके से 12 मार्च 1993 को मुंबई में दो घंटे के अंदर 10 सीरियल बम धमाके किए गए थे। पहला बम धमाका दोपहर 1.28 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के बाहर हुआ था। इसके बाद एयर इंडिया टावर,मस्जिद वंडर के पास मार्केट, प्लाजा सिनेमा हॉल, दादर में सेना भवन, वर्ली में पासपोर्ट दफ्तर, बांद्रा और सांताक्रूज में फाइव स्टार होटलों के पास धमाके हुए।इन धमाकों से आर्थिक नगरी मुंबई दहल उठी थी। 13 सीरियल धमाकों में कुल 257 लोग मारे गए थे।

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