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सिख दंगा केस: सज्जन कुमार को जनानत देने से SC का इनकार, कोर्ट बोला- ‘जुलाई में आइएगा देखेंगे’

कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। मंडोली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार ने खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत की गुहार लगाई थी।

सिख दंगों के मामले में दोषी सज्जन कुमार उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। (File photo)

1984 में हुए सिख दंगे के दोषी कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार ने खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत की गुहार लगाई थी। बुधवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेग्युलर बेल पर वह जुलाई में सुनवाई करेगा।

नव भारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान कुमार के वकील ने कोर्ट से कहा कि सज्जन कुमार की उम्र 70 साल से ऊपर है और वे कई बीमारियों से ग्रसित हैं। वकील ने कहा कि उन्हें डायबिटीज है और कैंसर का भी शक है।

वकील ने कहा कि इससे पहले उन्हें एम्स के मेडिकल बोर्ड के सामने पेश किया गया था लेकिन उसके बाद उन्हें जेल वापस भेज दिया गया। उनकी जमानत याचिका लंबे समय से पेंडिंग है और उसपर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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वकील ने कहा कि कुमार बहुत बीमार हैं और कोरोना संकट के कारण उन्हें एम्स में नहीं दिखाया जा सकता। ऐसा ही रहा तो उनके क्लाइंट जेल में ही परलोक सिधार जाएंगे और इस तरह उम्रकैद की सजा मौत की सजा में बन जाएगी।

वकील की इस दलील पर चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसा न कहें। लेकिन हम अभी जमानत की अर्जी पर फैसला नहीं लेंगे। इसपर वकील ने कहा कि हमारी गुहार को सुना जाए और ये दलील मेडिकल ग्राउंड पर दी गई है। इसपर जज ने कहा कि याचिकाकर्ता के मेडिकल रिपोर्ट से जाहिर होता है कि उन्हें अस्पताल में दाखिल करने की जरूरत नहीं है। सात मार्च की रिपोर्ट में एम्स का कहना है कि अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं है। ऐेसे में हम जमानत अर्जी पर अभी सुनवाई नहीं करेंगे।

बता दें पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिख विरोधी दंगे के एक मामले में निचली कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने सज्जन कुमार पर पांच लाख का जुर्माना भी लगाया था। कांग्रेस नेता पर हत्या, साजिश, दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने का आरोप है।

इससे पहले, 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा था। साल 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में खोखर आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए याचिका में खोखर के लिए आठ सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत या पैरोल देने की मांग की गई।

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