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ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पताल में दम घुटकर हो 18 लोगों की मौत

चेन्नई के एक निजी अस्पताल में जेनरेटर रूम में बाढ़ का पानी घुस जाने और इसी वजह से आॅक्सीजन की आपूर्ति ठप पड़ जाने के कारण 18 मरीजों की मौत हो गई।

Author चेन्नई | December 4, 2015 11:51 PM
प्रतीकात्मक चित्र

चेन्नई के एक निजी अस्पताल में जेनरेटर रूम में बाढ़ का पानी घुस जाने और इसी वजह से आॅक्सीजन की आपूर्ति ठप पड़ जाने के कारण 18 मरीजों की मौत हो गई। तमिलनाडु सरकार ने इस घटना की जांच कराने के संकेत दिए हैं। अस्पताल ने इस घटना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

पिछले कई दिनों से बाढ़ का कहर झेल रहे चेन्नई में मणपक्कम इलाके में अडयार नदी के किनारे बने एक मशहूर निजी अस्पताल के परिसर में भी बाढ़ का पानी आ गया। बिजली न होने के कारण जेनरेटर के सहारे अस्पताल चलाया जा रहा था। पत्रकारों से बातचीत में कुछ मृतकों के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि वेंटिलेटर और आॅक्सीजन जैसी जीवनरक्षक व्यवस्थाओं पर रखे गए मरीजों को मदद नहीं दी जा सकी क्योंकि जेनरेटर रूम में बाढ़ का पानी भर चुका था। निजी अस्पताल के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका।

तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन ने पत्रकारों को बताया, ‘उस अस्पताल में आइसीयू में भर्ती 75 मरीजों में से वेंटिलेटर पर रखे गए 57 मरीजों को बाहर ले जाया गया। बाकी मरीजों की मौत पिछले दो-तीन दिनों में हुई। हमें अभी जल्दबाजी में यह नहीं कहना चाहिए कि बिजली न होने की वजह से मरीजों की मौत हुई’। बहरहाल, उन्होंने कहा कि सरकार मामले की जांच कर रही है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘यदि ऐसा होता तो आइसीयू में भर्ती सभी मरीजों की मौत हो गई होती। लेकिन 57 मरीजों को उस अस्पताल से बाहर ले जाया गया’। हालांकि, उन्होंने माना कि उस अस्पताल में बाढ़ का पानी घुसा था और बिजली गुल हुई थी। उन्होंने कहा, ‘सभी सरकारी अस्पताल चल रहे हैं। हम जरूरत के आधार पर सभी अस्पतालों से मरीजों को ले रहे हैं’।
वरिष्ठ मंत्रियों नाथम विश्वनाथन, सेल्लुर राजू और गोकुल इंदिरा ने जब मुख्यमंत्री जयललिता के निर्वाचन क्षेत्र आरके नगर का दौरा किया तो वहां उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। लोगों ने उनका घेराव किया और उन्हें तुरंत वापस जाना पड़ा। कई और इलाकों में भी इसी तरह का दृश्य देखने को मिला जब लोगों ने आपदा की इस घड़ी में समस्याएं सुनने गए अधिकारियों पर अपना गुस्सा उतारा।

दूसरी ओर कई इलाकों में बाढ़ का पानी घटने के साथ शुक्रवार को चेन्नई शहर और उपनगर में जिंदगी धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है। लेकिन लाखों लोग पानी, बिजली, दूध और खाद्य सामग्री सहित जरूरी सामग्री के अभाव में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। कोडंबकम, टी नगर, अउयार और कोट्टरपुरम और उपनगर तांब्रम जैसे इलाके में शुक्रवार को रुक-रुक कर हुई बारिश से बाढ़ की स्थिति फिर गहराने की चिंता पैदा हो गई। लेकिन मौसम विज्ञानियों ने अगले 24 घंटे में केवल चेन्नई में हल्की बारिश का पूर्वानुमान जताया है। दक्षिणी तट और आंतरिक जिलों और पुडुचेरी के लिए भारी से अति भारी वर्षा की आशंका जताई गई है।

वहीं चेन्नई के पास राजाली नौसैन्य वायु सेना केंद्र से सीमित वाणिज्यिक विमानों का परिचालन शुरू हुआ। उपनगर चेन्नई अराकोनम से ट्रेन सेवाएं आंशिक रूप से बहाल हो गर्इं। दक्षिण रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि दूसरे व्यस्त तांब्रम-चेन्नई बीच रूट पर सेवा बहाल करने पर अब तक फैसला नहीं हुआ है। यह वाणिज्यिक और रिहाइशी दोनों इलाकों को कवर करता है। बस और रेल सेवा बाधित होने के मद्देनजर चेन्नई मेट्रो लोगों के लिए बड़ी मददगार साबित हुई।

माउंट रोड और कुछ अन्य अहम सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया। अडयार और कूम नदियों और दूसरी जलधाराओं में पानी घटने से कुछ राहत मिली और हालात सामान्य हो रहे। चेमब्रामबक्कम, पुजल और पूंडी नदियों में पानी घट गया है। मंगलवार को भारी बारिश के बाद बुरी तरह चरमराई मोबाइल फोन सेवा आंशिक रूप से बहाल हो गई वहीं एटीएम जैसी अन्य सेवाएं अभी भी बंद हैं।

अधिकारियों ने बताया कि शहर के कई हिस्सों में पानी घटना शुरू हो गया लेकिन लोग अभी भी जद्दोजहद का सामना कर रहे हैं क्योंकि कई इलाकों में एहतियाती रूप से बिजली अभी भी बंद है। सुरक्षित पेयजल अभी भी ज्यादा लोगों तक उपलब्ध नहीं है। दूध आपूर्ति अनियमित है और कई नागरिकों ने शिकायत की है कि सब्जियां ऊंची कीमतों पर बेची जा रही है। सरकारी संस्था ‘आविन’ के दूध पैकेटों की आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हुई है। एक लीटर दूध निजी आपूर्तिकर्ता 90 रुपए में बेच रहे हैं।

 

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