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मोदी के वोकल फॉर लोकल की अपील के बावजूद 150 फीसदी बढ़ा आयात

अमेरिका के बाइडेन प्रशासन ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी निर्यातकों को अभी भी भारत में उल्लेखनीय टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे भारत के साथ उनका कारोबार प्रभावित होता है।

shareसांकेतिक फोटो।

देश में पीएम मोदी के वोकल फॉर लोकल की अपील के बावजूद आयात में करीब 150 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस साल 22 मार्च से 31 मार्च के बीच आयात का मूल्य 14.21 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में (5.76 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से 146.78 बढ़ा है। भारत सरकार के मुताबिक पेट्रोलियम को छोड़कर आयात में भी 264.19 फीसदी वृद्धि हुई है।

इसी तरह 22 मार्च से 31 मार्च के बीच निर्यात का मूल्य 10.70 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि (3.05 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की इसी अवधि में 250.47% था। इस अवधि में पीओएल को छोड़कर निर्यात पिछले वर्ष की इसी अवधि से 280.01% की बढ़ी है। उधर, अमेरिका के बाइडेन प्रशासन ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी निर्यातकों को अभी भी भारत में उल्लेखनीय टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे भारत के साथ उनका कारोबार प्रभावित होता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने विदेश व्यापार बाधाओं पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बुधवार को कहा कि भारत सरकार ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया है, लेकिन साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों को भी शुरू किया है, जो आयात की जगह घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करते हैं।

यूएसटीआर ने 570 से पेज से अधिक की रिपोर्ट में भारत के बारे में कहा, “इसके अलावा, मई 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को कम करने के लिए आत्मनिर्भर भारत पहल की घोषणा की।” रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने भारत के बाजार में पहुंच बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अवसरों की मांग की है।

रिपोर्ट के अनुसार, “इसके बावजूद अमेरिकी निर्यातकों को भारत में अमेरिकी उत्पादों के आयात को बाधित करने वाले महत्वपूर्ण टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।”

इस बीच नीति आयोग ने खाद्य मंत्रालय को खाद्य सब्सिडी को लेकर नीतिगत सुझाव दिये हैं। इसमें केंद्र सरकार के राजकोषीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाये बिना जरूरतमंदों तक सस्ती दर पर अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये विभिन्न परिदृश्यों की परिकल्पना की गयी है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने यह जानकारी दी है।

मंत्रालय ने कुछ राज्यों में बढ़ती आबादी के साथ सब्सिडी वाले खाद्यान्न की बढ़ती मांग के बीच नीति आयोग से सुझाव मांगा था। आयोग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 को ध्यान में रखते हुए परिदृश्य तैयार किये हैं। आयोग के सदस्य (कृषि) रमेश चंद ने पीटीआई-भाषा से कहा, “खाद्य मंत्रालय ने हमसे कहा कि राज्य खाद्यान्न आबंटन बढ़ाने के लिये कह रहे हैं। इसका कारण सभी राज्यों में आबादी का बढ़ना है।”

उन्होंने कहा, “…मंत्रालय ने यह चिंता जताई कि खाद्य संब्सिडी काफी तीव्र गति से बढ़ रही है। इसीलिए, हमें आखिर किस प्रकार के नीतिगत उपाय करने चाहिए, जिससे खाद्य सब्सिडी बढ़े नहीं और वह दायरे में बनी रहे।” हालांकि, चंद ने कहा कि खाद्य मंत्रालय ने यह नहीं कहा कि वह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) 2013 के तहत सब्सिडी युक्त खाद्यान्न का दायरा घटाना चाहता है।

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