केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों को पकड़ने के लिए लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फरार ड्रग तस्कर वीरेंद्र सिंह बैसोया को भारत प्रत्यर्पित (Extradite) कराया है। बैसोया दिल्ली पुलिस द्वारा जांच किए जा रहे 13000 करोड़ रुपये के ड्रग्स जब्ती मामले में वांछित था।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ”मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पीछा कर रही है और उनके पूरे नेटवर्क को निर्ममता से खत्म कर रही है।”
उन्होंने कहा, “नारकोटिक्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत NCB ने फरार ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बैसोया को UAE से भारत वापस लाकर एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। हमारी एजेंसियों ने ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक की रणनीति अपनाकर एक बार फिर साबित किया है कि ड्रग तस्कर दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाएं, भारतीय कानून की लंबी पहुंच से नहीं बच सकते।”
ऐसे काम करता था ड्रग्स सिंडिकेट
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दाखिल चार्जशीट में इस ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े 19 लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनमें दो प्रकाशन संस्थानों के उत्तराधिकारी तुषार गोयल भी शामिल हैं।
वहीं वीरेंद्र सिंह बैसोया समेत पांच आरोपी फरार थे और उन्हें अदालत ने घोषित अपराधी घोषित किया था। पुलिस के अनुसार, दुबई में रहने वाला कारोबारी वीरेंद्र सिंह बैसोया इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क को वित्तीय मदद देता था। उसके अलावा उसका 25 वर्षीय बेटा ऋषभ बैसोया, रितिक बजाज (36), प्रमोद (50) और विकास राणे (49) भी फरार घोषित किए गए थे।
2024 में 40 किलो थाई मारिजुआना की तस्करी का आरोप
जांच के मुताबिक, 2024 में दक्षिण भारत और गुजरात की आठ फार्मा कंपनियों (जिनमें पांच वैध और तीन फर्जी कंपनियां शामिल थीं) का इस्तेमाल 1289 किलोग्राम कोकीन और 40 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक थाई मारिजुआना (गांजा) की खेप दिल्ली पहुंचाने के लिए किया गया। आरोप है कि यह नेटवर्क दुबई स्थित वीरेंद्र सिंह बैसोया के सिंडिकेट द्वारा संचालित किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया था।
तीन बड़ी कार्रवाई में बरामद हुई थी कोकीन
1 अक्टूबर 2024 को दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर से 562 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी। इस मामले में तुषार गोयल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 10 अक्टूबर को पश्चिमी दिल्ली के रामेश्वर नगर स्थित एक दुकान से 208 किलोग्राम कोकीन जब्त की गई।
तीसरी बड़ी कार्रवाई 13 अक्टूबर को गुजरात के अंकलेश्वर में हुई जहां दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और गुजरात पुलिस ने आवकर ड्रग्स (Aavkar Drugs) नाम की कंपनी पर छापा मारकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 5000 करोड़ रुपये मूल्य की 518 किलोग्राम कोकीन बरामद की।
दक्षिण अमेरिका से दुबई के रास्ते भारत पहुंचती थी खेप
पुलिस के अनुसार, बरामद की गई सभी ड्रग्स उसी खेप का हिस्सा थीं जिसे वीरेंद्र सिंह बैसोया का सिंडिकेट भारत में तस्करी कर लाया था।
जांच में सामने आया कि ड्रग्स दक्षिण अमेरिका से दुबई के रास्ते भारत के अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाई जाती थीं। वहां से इन्हें फार्मास्युटिकल केमिकल्स के नाम पर दक्षिण भारत से गुजरात स्थित आवकर ड्रग्स फैक्टरी तक भेजा जाता था।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ”ड्रग्स की खेप कई चरणों में सड़क मार्ग से आवकर फैक्टरी पहुंचाई जानी थी जहां उसे रिफाइन और प्रोसेस किया जाना था।”
इसके बाद गुजरात से इन खेपों को मेडिकल कंसाइनमेंट के रूप में बाहर भेजा जाता था और कागजों में इन्हें फार्मा सॉल्यूशंस सर्विसेज (Pharma Solutions Services) नाम की कथित फर्जी कंपनी के नाम दिखाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद इन्हें दवाइयों के पैकेज के रूप में सड़क मार्ग से दिल्ली-एनसीआर पहुंचाया जाता था।
3.96 लाख ड्रग्स केस लंबित, गृह मंत्रालय ने राज्यों को विशेष अदालतें स्थापित करने का आदेश दिया
देशभर में एनडीपीएस (NDPS) कानून के तहत मादक पदार्थों से जुड़े करीब 3.96 लाख मामले लंबित हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विशेष एनडीपीएस अदालतें बनाने को कहा है। यह निर्देश तब जारी किया गया जब मंत्रालय को एक बैठक में बताया गया कि 22 राज्यों ने अब तक विशेष एनडीपीएस अदालतें स्थापित नहीं की हैं।
पिछले छह महीनों में गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और गृह सचिवों के साथ कई बैठकें की हैं ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
