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मुंबई ट्रेन धमाका: नौ साल बाद आया फ़ैसला, 13 में से 12 दोषी करार

मुंबई की एक विशेष अदालत ने नौ साल पहले मुंबई की पश्चिम लाइन पर चलनेवाली उपनगरीय ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के 13 आरोपियों में 12 को दोषी पाया है..

Author मुंबई | September 12, 2015 9:32 AM
11 जुलाई 2006 की शाम हुए मुंबई धमाकों में 209 लोग मारे गए थे जबकि 824 लोग घायल हुए थे। (एक्सप्रेस फोटो)

शुक्रवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने नौ साल पहले मुंबई की पश्चिम लाइन पर चलनेवाली उपनगरीय ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के 13 आरोपियों में 12 को दोषी पाया है। इन 12 आरोपियों पर प्रतिबंधित संगठन सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) से संबंध होने का आरोप था। अदालत ने इनमें से पांच आरोपियों को हत्या का दोषी पाया है। इसके लिए इन्हें मृत्युदंड की सजा भी मिल सकती है। सभी आरोपियों की सजा पर सोमवार को बहस शुरू हो सकती है जिसके बाद अदालत सजा का ऐलान करेगी।

फैसले के बाद आतंकवादी निरोधक दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन प्रमुख केपी रघुवंशी ने कहा कि अदालत के इस फैसले से बम विस्फोटों में मारे गए और जख्मी हुए लोगों के परिवारों को इंसाफ मिला है। बम विस्फोटों की जांच में सक्रिय भूमिका निभानेवाले मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त एएन राय ने कहा कि यह बहुत मुश्किल केस था। लेकिन एटीएस और मुंबई पुलिस ने इसकी जांच में काफी मेहनत की थी। इसी कारण 13 में से 12 आरोपी दोषी पाए गए हैं। विशेष सरकारी वकील राजा ठाकरे ने कहा कि उन पर बम विस्फोट में मारे गए लोगों के परिवारवालों को संतुष्ट करने की अहम जिम्मेदारी थी।

कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच विशेष मकोका (महाराष्ट्र राज्य संगठित अपराध नियंत्रण कानून) अदालत के जज यतीन डी शिंदे ने जब आठ साल चले इस मामले में फैसला सुनाया तो इस दौरान कोर्ट रूम से मीडिया को दूर रखा गया। अदालत ने 12 आरोपियों डॉक्टर तनवीर अंसारी (37), कमाल अहमद अंसारी (37), मोहम्मद फैसल शेख (36), जमीर शेख (36), मोहम्मद शफी (32), शेख आलम शेख (41) मोहम्मद अंसारी (34), मुजम्मिल शेख (27), सोहेल शेख (43), नावेद खान (30), आसिफ खान (38) और एहतेशाम सिद्दीकी (30) को इन धमाकों के लिए दोषी करार दिया है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 120 बी, 302, महाराष्ट्र राज्य संगठित अपराध नियंत्रण कानून की धारा 3 (1) आई (जिसके तहत फांसी का प्रावधान भी है) और रेल कानून समेत अन्य कानूनों के तहत इन 12 आरोपियों को अदालत ने दोषी पाया है।

अदालत ने फैसल शेख और आरिफ खान को बम धमाकों का मुख्य षड्यंत्रकारी जबकि अब्दुल वाहिद शेख (34) को बेगुनाह पाया है। 30 नवंबर 2006 को पुलिस ने इस मामले की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, बम विस्फोट मामले में अभी भी 17 आरोपी फरार हैं जिनमें चार भारतीय और 13 पाकिस्तानी शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों पर हत्या, संगठित तरीके से षड्यंत्र रचने, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, बम विस्फोटों में मदद करने जैसे कई मामलों के तहत मुकदमा चलाया गया था।

11 जुलाई 2006 की शाम छह बजकर 24 मिनट पर मुंबई की पश्चिम उपनगरीय ट्रेन में पहला धमाका हुआ। इसके बाद 11 मिनटों के अंदर हुए सात धमाकों में 209 लोग मारे गए थे जबकि 824 लोग घायल हुए थे। ये धमाके पश्चिमी लाइन के खार रोड स्टेशन से भायंदर के बीच हुए थे जबकि बम रखने का काम चर्चगेट स्टेशन पर किया गया था। 1993 के बाद हुए इन धमाकों ने एक बार फिर मुंबई को हिला दिया था। प्राथमिक जांच में पता चला कि बम लोकल ट्रेनों के प्रथम श्रेणी के डिब्बों में रखे गए थे। इन बम विस्फोटों में आरडीएक्स और अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था। इनमें मुंबई के गोवंडी में बनाया गया था और इस दौरान पाकिस्तान से आए लोगों ने मदद की थी।

धमाकों के 10 दिनों के अंदर आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) बम विस्फोट के आरोपियों तक पहुंच गया था। 20 जुलाई से 3 अक्तूबर 2006 तक एटीएस ने बम विस्फोट के आधे आरोपियों को दबोच लिया था। हालांकि इसके बाद आरोपियों ने अदालत में कहा कि पुलिस ने उनसे जबरदस्ती गुनाह कबूल करवाया है। दूसरी ओर जांच और पूछताछ के बाद एटीएस को पता चला कि पाकिस्तान की खुफिया एजंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आइएसआइ) के साथ आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने मिलकर बम विस्फोटों की साजिश को अंजाम दिया और पकड़े गए आरोपियों का संबंध प्रतिबंधित छात्र संगठन सिमी से है। इस मामले में तैयबा के पाकिस्तानी सरगना अजीम चीमा का नाम भी मुख्य षड्यंत्रकारी के तौर पर सामने आया। चीमा का नाम चार्जशीट में है।

हालांकि 2008 में जब पुलिस ने सादिक शेख, आरिफ शेख और मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया था तो धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का नाम भी सामने आया। पुलिस पूछताछ में तीनों ने बताया कि मुंबई उपनगरीय ट्रेन धमाकों को अंजाम देने का काम इंडियन मुजाहिदीन के प्रमुख रियाज भटकल ने किया है। बाद में भटकल गिरफ्तार भी हुआ। लेकिन पुलिस ने जांच की दिशा भटकने नहीं दी। बचाव पक्ष ने इंडियन मुजाहिदीन के सादिक शेख को गवाह के तौर पर अदालत में भी बुलाया था।

विशेष अदालत ने जून 2007 से इस मामले सुनवाई शुरू की और 19 अगस्त 2014 को सुनवाई पूरी हो गई। लेकिन सुनवाई के दौरान फरवरी 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगा दी थी क्योंकि आरोपियों में से एक कमाल अंसारी ने मकोका कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। 23 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने कमाल की याचिका खारिज कर दी और सुनवाई फिर से शुरू हुई।

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने 192 गवाह पेश किए जिनमें आठ पुलिसवाले, आठ डॉक्टर और पांच प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी शामिल थे। बचाव पक्ष ने 51 गवाह पेश किए थे। 2010 में ही आरोपियों के एक वकील शाहिद आजमी की उनके दफ्तर में हत्या कर दी गई।
लाइफलाइन में फटे थे प्रेशर कुकर बम:

* 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार धमाकों में 189 लोगों की मौत हुई थी और 824 घायल हो गए थे।

* धमाके उपनगरीय ट्रेनों के पहले दर्जे के डिब्बों में रखे गए प्रेशर कुकर बम से कराए गए थे। माटुंगा, बांद्रा, खार, जोगेश्वरी, बोरीवली और भायंदर के पास उपनगरीय ट्रेनों में धमाके हुए थे।

* जांच के लिए सात टीमें बनाई थीं और जांच में रॉ के साथ आइबी की मदद मांगी।

* जांच के दौरान 400 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

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