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तौलिया, कंबल सहित रेलवे का सामान चुराने में पकड़े गए 11 लाख लोग, टॉप 5 में गुजरात भी

रेलवे अधिकारी के अनुसार, रेलवे में उच्च गुणवत्ता के लोहे, रेलवे ट्रेक में इस्तेमाल होने वाला तांबे का तार, पेंडरोल क्लिप, हाईटेंशन ओवरहेड तारों की चोरी सबसे अधिक हुई।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

भारतीय रेलवे ने ट्रेन में चोरी की घटनाओं को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में देशभर से करीब 11 लाख लोगों को चोरी के आरोप में पकड़ा गया। इसमें रेलवे ट्रेक, तांबे के तार, लोहे के बोल्ट, तौलियां, वाश बेसिन, कंबल और टंकी चुराने के मामले शामिल हैं। राज्यवार आंकड़ों की बात करें तो महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा 2.23 लाख लोगों को रेलवे से जुड़ी संपत्ति और यात्री सामान को चुरान के आरोप में गिरफ्तार किया गया जबकि यूपी में 1.22 लोगों को पकड़ा गया।

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के अनुसार- बोतल, ओवरहेड वायर, पंखे, फिशप्लेट्स (रेल की पटरियों को जोड़ने की पट्टी), बाथरूम फीटिंग्स, पेंडरोल क्लिप (पटरियों को रोकने वाली क्लिप), ट्यूबलाइट की चोरी होने की घटनाएं भी सामने आईं। इस मामले में तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश से सबसे अधिक 98,594 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सूची में तमिलनाडु का नंबर का चौथा है जहां से 81,408 को गिरफ्तार किया गया जबकि गुजरात का नंबर पांचवां है जहां से 77,047 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

रेलवे अधिकारी के अनुसार, रेलवे में उच्च गुणवत्ता के लोहे, रेलवे ट्रेक में इस्तेमाल होने वाला तांबे का तार, पेंडरोल क्लिप, हाईटेंशन ओवरहेड तारों की चोरी सबसे अधिक हुई। मामले में नोर्थ सेंट्रल रेलवे जोन के पीआर अधिकारी गौरव बंसल बताते हैं कि ओवर हेड में तारों में 25 हजार वोल्टेज होने के बाद भी 99.9 फीसदी तारों की सप्लाई बाधित होती या फिर इन तारों को चुरा लिया जाता है। चोरी के इन मामले में नशे के आदी ज्यादा पाए जाते हैं, जो तारों को चोर बाजार में बेच देते हैं।

बंसल के अनुसार एक मीटर लोहे का ट्रेक वजन 60 किलोग्राम से 90 टन तक हो सकता है। जो बाजार में एक हजार रुपए तक में बेचा जाता है।

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