केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में सुधार करते हुए 100 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) को स्वचालित मार्ग के तहत मंजूरी दे दी। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को विदेशी विनिमय प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2026 में संशोधन करते हुए इसकी अधिसूचना जारी की।
नई व्यवस्था के अनुसार, बीमा कंपनियों और उनसे जुड़े मध्यस्थों, जैसे कि बीमा ब्रोकर सहित अन्य में अब 100 फीसद तक विदेशी निवेश स्वचालित मार्ग से किया जा सकेगा। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) के मामले में विदेशी निवेश की सीमा 20 फीसद ही निर्धारित की गई है। इससे जुड़ा फैसला पिछले साल दिसंबर में संसद द्वारा पारित ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 के बाद लिया गया।
क्या नियम बदला गया है?
इस विधेयक ने बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को पहले के 74 फीसद से बढ़ाकर 100 फीसद करने का रास्ता खोला है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून बन गया। इसके बाद फरवरी 2026 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने भी बीमा क्षेत्र में 100 फीसद एफडीआइ की अनुमति से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। अब वित्त मंत्रालय द्वारा नियमों में संशोधन के साथ यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो गई है।
इस संबंध में मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि इस निर्णय से बीमा क्षेत्र में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे निवेश, नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इससे बीमा सेवाओं का विस्तार होगा और अधिक लोगों तक बीमा सुरक्षा पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही उम्मीद है कि इस प्रयास से बीमा क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी बीमा की पहुंच मजबूत होने की संभावना है।
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