ताज़ा खबर
 

आंदोलन के 100 दिन पूरे, किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजमार्ग किया जाम

कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मू्ल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर केएमपी एक्सप्रेस वे सहित दिल्ली की ओर आने वाले रास्ते करीब पांच घंटे तक जाम रहे।

Author नई दिल्ली | Updated: March 7, 2021 4:03 AM
farmer movementदल्ली-हरियाणा सीमा पर किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर शनिवार को राजमार्ग को जाम किया।

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर किसानों ने शनिवार को एक बार फिर शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मू्ल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर केएमपी एक्सप्रेस वे सहित दिल्ली की ओर आने वाले रास्ते जाम कर दिए गए। करीब पांच घंटे तक एक्सप्रेसवे पर जाम लगा रहा। किसान नेताओं ने कहा कि प्रदर्शनकारी संगठन तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की अपनी मांग पर अडिग हैं। साथ ही किसान नेताओं ने कहा, वे सरकार के साथ वार्ता को तैयार हैं, लेकिन बातचीत बिना शर्त होनी चाहिए।

संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य दर्शन पाल ने कहा कि किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की अपनी मांग पर अडिग हैं। पाल ने कहा, हमारे आंदोलन की शुरुआत से ही मांग एक समान रही है कि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। हम सरकार से वार्ता बहाली के लिए तैयार हैं। हालांकि, ऐसा बिना किसी पूर्व शर्त के होना चाहिए। वरिष्ठ किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि किसान संगठनों ने कभी भी केंद्र सरकार के साथ बातचीत से इनकार नहीं किया है। साथ ही कहा कि मांगों और वार्ता को लेकर उनका रुख शुरू से ही स्पष्ट है।

संधू ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को तेज करने के संबंध में निर्णय लेने के लिए नौ मार्च को बैठक बुलाई है। अन्य किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि किसान हमेशा सरकार के साथ वार्ता करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में किसी भी समस्या का हल बातचीत से ही निकलेगा। लेकिन, जो लोग सत्ता में हैं, उन्हें हमारे पास औपचारिक निमंत्रण भेजना चाहिए, जिस तरह पूर्व में हुई वार्ता के दौरान किया गया था। सरकार की तरफ से सशर्त बातचीत से समस्या का हल नहीं निकलेगा।

दिल्ली की सीमाओं – सिंघू बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर – पर जारी आंदोलन से जुड़े किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक यह नाकेबंदी की। पलवल में किसानों ने केएमपी एक्सप्रेस वे जाम करने के दौरान लोकगीत और रागिनी गाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान सभी जगह धरना शांतिपूर्ण ढंग से चला। इसके मद्देनजर सभी सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर आयोजित इस प्रदर्शन में किसानों ने काली पट्टी बांध अपना विरोध दर्ज कराया। सिंघू बॉर्डर के किसानों ने कुंडली पहुंच एक्सप्रेस वे का रास्ता रोका। हालांकि किसानों ने यहां एक मार्ग खोलकर रखा। किसानों का कहना है कि एंबुलेंस और किसी को भी अगर इमरजंसी है, तो उसे जाने दिया जाएगा। किसानों ने इस दौरान एक एंबुलेंस को भी जाने दिया।

भारतीय किसान यूनियन (दाकुंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने सुबह कहा, ‘ हम केएमपी एक्सप्रेस-वे पर यातायात अवरुद्ध करेंगे लेकिन आपात सेवा में लगे वाहनों को जाने दिया जाएगा।’ किसानों ने पलवल जिले में भी प्रदर्शन किया।

वहीं, ग्रेटर नोएडा में भी अपनी मांगों के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे के सिरसा कट पर जाम लगा दिया। उन्होेंने भारी वाहनों को निकलने नहीं दिया। यहां पर सिर्फ जरूरतमंद लोगों को ही जाने दिया गया। कुंडली-मानेसर-पलवल राजमार्ग के अलावा दिल्ली की सीमाओं को जोड़ने वाली सड़कों मसलन ग्रेटर नोएडा- ईस्टर्न पेरिफेरल पर भी भारी जमावड़ा रहा। संयुक्त किसान मोर्चा गाजीपुर प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि डासना, दुहाई, बागपत, दादरी, ग्रेटर नोएडा पर जाम किया गया। सेना, पुलिस, एंबुलेंस, स्कूल बस, डाक-तार और फायर बिग्रेड जैसी जरूरी वाहनों को नहीं रोका गया।

कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे 136 किलोमीटर लंबा है। मानेसर-पलवल खंड 53 किलोमीटर लंबा है और इसका उद्घाटन 2016 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था, वहीं 83 किलोमीटर लंबे कुंडली-मानेसर खंड का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में किया था।

Next Stories
1 एक दिन में 15 लाख लोगों को टीके, देश में 24 घंटे में कोरोना विषाणु संक्रमण के 18,327 नए मामले
2 अन्ना हजारे के आंदोलन में RSS-BJP ने किया था समर्थन, आज कांग्रेस किसान आंदोलन को कर रही समर्थन- डिबेट में बोले कांग्रेस प्रवक्ता
3 भाजपा में जाते ही बदले सुवेंदु अधिकारी! बोले- श्यामा प्रसाद मुखर्जी का देश के लिए योगदान, नहीं तो इस्लामिक राष्ट्र होते हम
ये पढ़ा क्या?
X