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राष्ट्रपति ने भाजपा को आमंत्रित करने के दिल्ली के उपराज्यपाल के प्रस्ताव को दी मंजूरी : केंद्र

नयी दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय राजधानी में सरकार बनाने के लिए भाजपा को आमंत्रित करने के दिल्ली के उपराज्यपाल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्र ने आज उच्चतम न्यायालय को यह बात बतायी। शीर्ष अदालत ने इस बारे में निर्णय करने में पांच महीने देरी करने के लिए उपराज्यपाल की खिंचाई […]

Author Published on: October 28, 2014 7:09 PM

नयी दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय राजधानी में सरकार बनाने के लिए भाजपा को आमंत्रित करने के दिल्ली के उपराज्यपाल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्र ने आज उच्चतम न्यायालय को यह बात बतायी। शीर्ष अदालत ने इस बारे में निर्णय करने में पांच महीने देरी करने के लिए उपराज्यपाल की खिंचाई की ।

शीर्ष अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में राष्ट्रपति शासन हमेशा जारी नहीं रह सकता है और सवाल किया कि प्रशासन इस दिशा में तेजी से काम करने में क्योंं विफल रहे।

प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू के नेतृत्व वाले पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि वह विधानसभा को भंग करने की मांग करने वाले आम आदमी पार्टी (आप) की याचिका पर सुनवाई करेगी जबकि केंद्र ने पीठ को सूचित किया कि राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय राजधानी में सरकार बनाने के लिए भाजपा को आमंत्रित करने के दिल्ली के उपराज्यपाल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

पीठ ने सवाल किया कि केंद्र क्यों मामले की सुनवाई के एक दिन पहले ही हमेशा अलग अलग बयान के साथ आती है।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘मामले के सुनवाई के लिए सामने आने से ठीक पहले आप एक बयान देते हैं। इस पर पहले क्यों निर्णय नहीं किया जाता ? आप इस तरह से कितने समय चलेंगे ? ’’ पीठ ने कहा कि उपराज्यपाल को इस बारे में जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘ हम अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते और हम मामले की सुनवाई इसके गुणों के आधार पर करेंगे। लोकतांत्रित राजनीति में लोगों को सरकार का अधिकार होता है और राज्यपाल के तहत शासित होने का नहीं।’’

पीठ ने कहा कि ऐसे विषयों में समय लगता है और इसलिए कई बार मामले की सुनवाई स्थगित की गई ताकि उपराज्यपाल को निर्णय करने में सहुलियत हो लेकिन कुछ भी नहीं किया गया। पीठ के समक्ष पेश किये गए राष्ट्रपति के पत्र का जिक्र करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘ यह पहल काफी पहले होनी चाहिए थी।’’

पिछली सुनवाई के दौरान कें्रद ने शीर्ष अदालत से कहा था कि दिल्ली में सरकार के गठन के बारे में रूख दीपावली के बाद ही सामने आ सकती है क्योंकि उपराज्यपाल के सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने पर राष्ट्रपति के विचार मांगने का प्रस्ताव अभी भी विचारार्थ है।

उच्चतम न्यायालय विधानसभा भंग करने की मांग संबंधी आप की याचिका पर सुनवाई कर रहा था । शीर्ष अदालत ने पहले केंद्र से पूछा था कि सरकार के गठन की संभावना तलाशने के लिए उसने क्या कदम उठाये हैं ?

वहीं, राष्ट्रपति को लिखे पत्र में उपराज्यपाल ने 14 फरवरी को आप सरकार के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा था कि दिसंबर 2013 में चुनाव के बाद इतने कम समय में चुनाव कराना जनहित में नहीं है।

पत्र के अनुसार, ‘‘भंग करने की सिफारिश से पहले लोकप्रिय सरकार के गठन का हरसंभव प्रयास करने की संवैधानिक परिपाटी के अनुरूप और उच्चतम न्यायालय की ओर से निर्धारित कानून को ध्यान में रखते हुए मैं आभारी रहूंगा अगर माननीय राष्ट्रपति भाजपा को आमंत्रित करने को मंजूरी प्रदान करेंगे जो अभी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।’’

इसमें कहा गया है कि, ‘‘ भाजपा के सहमत होने की स्थिति में मैं उनसे सदन में स्थायी सरकार बनाने के लिए नियत समय के भीतर संभवत: एक सप्ताह में अपनी संख्या प्रदर्शित करने को कहूँगा।’’

पत्र के अनुसार, ‘‘ आगे का कदम भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद ही तय हो सकता है।’’

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