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अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी को आरोपों की जांच करने का सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

जनसत्ता ब्यूरो नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में शीर्ष अदालत के निर्देशों को दरकिनार करने के आरोपों की जांच-पड़ताल करें। प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने रोहतगी से कहा-हमें क्या करना […]

Author September 18, 2014 9:56 AM
सुप्रीम कोर्ट

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में शीर्ष अदालत के निर्देशों को दरकिनार करने के आरोपों की जांच-पड़ताल करें। प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने रोहतगी से कहा-हमें क्या करना चाहिए। आप इस पर गौर करके हमें गुरुवार को बताइए। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि सरकार एक वर्ग के लोगों तक ही नियुक्तियों को सीमित कर रही है। जबकि कानून में अन्य के लिए भी प्रावधान है।
न्यायाधीशों ने वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी और वकील प्रशांत भूषण की दलीलें सुनने के बाद टिप्पणी की कि यह लोकपाल की नियुक्ति से एकदम विपरीत है। जेठमलानी और भूषण का कहना था कि सरकार केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार और सतर्कता आयुक्त जेएम गर्ग के पूरे हो रहे कार्यकाल के कारण खाली स्थानों के लिए प्रचार के बगैर ही नियुक्तियों की प्रक्रिया अपना रही है। प्रदीप कुमार का कार्यकाल 28 सितंबर को पूरा हो जाएगा, जबकि गर्ग का कार्यकाल सात सितंबर को खत्म हो गया है।
इन दोनों वकीलों ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव की तरफ से सरकार के सचिवों को भेजे गए 21 जुलाई के पत्र का हवाला दिया जिसमें कथित रूप से आम आदमी को बाहर रखते हुए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्त पद के लिए नामों की सूची बनाने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह पत्र शीर्ष अदालत के निर्देशों के खिलाफ है। जेठमलानी ने कहा कि इस पद के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का लोक सेवा से होना जरूरी नहीं है।
भूषण ने कहा कि पत्र में सुझाव दिया गया है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग सीधे मिलने वाले किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा और सचिवों की ओर से भेजे गए नाम ही चयन के दायरे में होंगे। अदालत ने अटार्नी जनरल से कहा कि सरकार को नियुक्ति के मामले में आगे कार्यवाही करने से रोकने के लिए उसके यहां अर्जी दायर की गई है। जबकि चार अगस्त को शीर्ष अदालत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को पहले ही नोटिस जारी करके लोकपाल की तर्ज पर केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के मामले में सार्वजनिक विज्ञापन देकर अधिक पारदर्शी तरीका अपनाते के बारे में उसकी प्रतिक्रिया मांग चुकी है।
जनहित याचिका दायर करने वाले गैर सरकारी संगठन सेंटर फार इंटेग्रिटी, गवर्नेंस एंड ट्रेनिंग इन विजिलेंस एडमिनिशट्रेशन के अनुसार केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए सतर्कता के क्षेत्र में अनुभव की आवश्यक शर्त को विचार के दायरे से हटाया जा रहा है। अर्जी में कहा गया है कि 30 सितंबर, 2012 और 30 जुलाई, 2014 को सेवानिवृत्त हुए लोक सेवकों को विचार के दायरे से बाहर रखा गया है क्योंकि पात्रता के दायरे में स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ उन्हीं व्यक्तियों के नाम पर विचार होगा जिन्हें केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या सतर्कता आयुक्त के रूप में कम से कम तीन साल का कार्यकाल मिलेगा। इसमें कहा गया है कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या सतर्कता आयुक्त 65 साल का होने या फिर चार साल की अवधि, जो भी पहले हो, तक पद पर रहेंगे।

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