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गैस और कब्ज से चाहिए छुटकारा तो नियमित करें मत्स्यासन और पवनमुक्तासन, जानें क्या है विधि

पेट में गैस बनने पर पेट में दर्द, जलन, डकारें आना, छाती में जलन के अलावा जी मिचलाना, भूख कम लगना, पेट भारी-भारी रहना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

yogasana for constipation, yogasana for constipation in hindi, yoga tips in hindi for constipation, yoga, matsyasana, pawanmuktasana, stomach problems, gastric problem, yoga for gastric problem, yoga and meditation news in hindi, jansattaप्रतीकात्मक तस्वीर

असंतुलित खान-पान और शारीरिक श्रम के अभाव की वजह से आजकल कोई भी गैस या फिर कब्ज की समस्या से पीड़ित हो जाता है। बुजुर्गों का साथ साथ आजकल युवाओं में भी ऐसी समस्या काफी देखने को मिलती है। पेट में गैस बनने पर पेट में दर्द, जलन, डकारें आना, छाती में जलन के अलावा जी मिचलाना, भूख कम लगना, पेट भारी-भारी रहना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। अधिक मात्रा में शराब पीने से, मिर्च-मसाला, तली-भुनी चीजें ज्यादा खाने से, बींस, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल, फास्ट फूड, ब्रेड और किसी-किसी को दूध या भूख से ज्यादा खाने से गैस की समस्या उत्पन्न होती है। ऐसे में योग इससे निजात दिलाने में आपकी मदद कर सकता है। आज हम आपको गैस और कब्ज से राहत दिलाने वाले दो योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं। नियमित रूप से इनका अभ्यास जल्द ही आपको रोगमुक्त बना सकता है।

मत्स्यासन – मत्स्यासन करने के लिए सबसे पहले आप पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएं। पीठ का भाग जमीन से उठाइए तथा सिर को इतना पीछे ले जाइए कि सिर की चोटी का भाग जमीन से सटा रहे। दाएं हाथ से बाएं पैर का अंगूठा और बाएं हाथ से दाएं पैर का अंगूठा पकड़ें। घुटनों को जमीन से लगाकर पीठ भाग का हिस्सा ऊपर उठाएं ताकि शरीर का केवल घुटने और सिर का हिस्सा ही जमीन को छूता रहे। यह गैस और असिडिटी को दूर करता है और कब्ज दूर कर भूख बढ़ाता है।

पवनमुक्तासन – यह आसन शरीर से गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। यह आसन अपच सहित कई पाचन संबंधी विकार को भी दूर करने में मदद करता है । इस आसन को करने के लिए भूमि पर चटाई बिछा कर पीठ के बल लेट जाएं। किसी भी एक पैर को घुटने से मोड़ लें। दोनों हाथों की अंगुलियों को परस्पर मिलाकर उसके द्वारा मोड़े हुए घुटनों को पकड़कर पेट के साथ लगा दें। अब सिर को ऊपर उठाकर मोड़े हुए घुटनों पर नाक लगाएं। दूसरा पैर जमीन पर सीधा रखें। इस क्रिया के दौरान श्वांस रोककर कुम्भक चालू रखें। सिर और मोड़ा हुआ पैर भूमि पर पहले की तरह रखने के बाद ही रेचक करें। दोनों पैरों को बारी-बारी से मोड़कर यह क्रिया करें।

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