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संधि मुद्रा से मिल सकता है जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस से छुटकारा, जानिए कैसे करते हैं अभ्यास

संधि मुद्रा में पृथ्वी मुद्रा और आकाश मुद्रा की संधि होती है।

प्रतीकात्मक चित्र

जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस होने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार मोटापे तो इसकी वजह माना जाता है। किसी तरह की चोट लगने से, जोड़ों पर दबाव ज्यादा पड़ने से या फिर ज्यादा प्रोटीनयुक्त पदार्थों का सेवन करने से भी आर्थराइटिस या जोड़ों का दर्द हो सकता है। इसके लिए बाजार में तमाम तरह की दवाइयां मौजूद हैं। लेकिन अगर आप प्राकृतिक रूप से इस बीमारी से निजात पाना चाहते हैं तो योगा आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। संधि मुद्रा आर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द के लिए बेहद प्रभावी आसन है। आइए, जानते हैं कि संधि मुद्रा क्या है और इसे करते कैसे हैं।

क्या है संधि मुद्रा – संधि मुद्रा में पृथ्वी मुद्रा और आकाश मुद्रा की संधि होती है। अंगूठे को अनामिका अंगुली से मिलाने पर पृथ्वी मुद्रा बनती है तथा मध्यमा अंगुली को अंगूठे से मिलाने पर आकाश मुद्रा बनती है। दोनों को मिलाकर एक साथ करने से संधि मुद्रा का अभ्यास होता है।

कैसे करते हैं संधि मुद्रा – संधि मुद्रा करने के लिए दाएं हाथ के अंगूठे के अग्रभाग को अनामिका के अग्रभाग से मिलाएं। बाएं हाथ के अंगूठे के अग्रभाग को मध्यमा के अग्रभाग से मिलाएं। इसे प्रतिदिन 15 मिनट तक चार बार करें। इससे शरीर में जहां कहीं भी जोड़ों में दर्द हो, उससे राहत मिलती है। एक ही स्थिति में लगातार बैठे रहने या सारा दिन खड़े रहने से कलाइयों, टखने, कंधे आदि में होने वाले दर्द में भी नियमित अभ्यास से यह मुद्रा लाभ देती है। इसके अलावा आर्थराइटिस के रोगियों के लिए भी संधि मुद्रा बेहद फायदेमंद है।

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