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तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन के इन तरीकों को आजमा कर देखिए, मिल सकता है फायदा

भागदौड़ भरी जिंदगी में आप अनजाने में तनाव के शिकार होते जाते हैं। सवेरे सोकर उठना और जल्दी तैयार होकर ऑफिस के लिए भागने की दिनचर्या से हम लगातार अवसाद की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

हर रोज सुबह ऑफिस, स्कूल या कहीं भी काम पर जाने से पहले 5 मिनट का मेडिटेशन आपको दिन भर तनाव से मुक्त रखता है।

भागदौड़ भरी जिंदगी में आप अनजाने में तनाव के शिकार होते जाते हैं। सवेरे सोकर उठना और जल्दी तैयार होकर ऑफिस के लिए भागने की दिनचर्या से हम लगातार अवसाद की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसे में क्या किया जाए कि इस बिन बुलाए मेहमान से निजात मिल सके। कैसे तनाव को दूर कर एनर्जी, सक्रियता, काम करने की क्षमता और क्रिएटिविटी को बढ़ाया जा सके। आपके इन सवालों का जवाब आज हम देने की कोशिश करेंगे। इनकी मदद से आप अपनी भागती जिंदगी में दिमागी सुकून और आराम हासिल कर सकते हैं। आइए, जानते हैं कैसे –

ध्यान – आजकल के कंपिटीशन वाले माहौल में तनाव कोई नई बात नहीं है। कौन है जो तनाव, दबाव और अवसाद की चपेट में नहीं है। लेकिन इसे इग्नोर करना सेहत के लिए सही नहीं है। इससे निजात पाया जा सकता है। ध्यान यानी कि मेडिटेशन से। हर रोज सुबह ऑफिस, स्कूल या कहीं भी काम पर जाने से पहले 5 मिनट का मेडिटेशन आपको दिन भर तनाव से मुक्त रखता है। इससे आप एनर्जेटिक भी बने रहते हैं। ध्यान के अनेक तरीके होते हैं। उन्हीं में से कुछ तरीके आज हम आपको बताने जा रहे हैं –

1. जमीन पर या फिर अपने बेड पर ही पद्मासन में बैठ जाएं। अपनी हथेलियों को अपनी जांघों पर रख दें। आंखें बंद कर लें और सोचना बंद कर दें। शुरुआत में आप इसे 5 मिनट से शुरू कर सकते हैं।

2. ध्यान की एक दूसरी पद्धति में आपको अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। इससे भी आपको स्ट्रेस से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप आंखें बंद कर लें। अपनी हर सांस पर ध्यान लगाएं। 5 बार सांस खींचने पर ध्यान लगाएं तथा 10 बार सांस को बाहर फेंकने की क्रिया पर फोकस करें। 1:2 के अनुपात में आप इस संख्या को घटा बढ़ा सकते हैं। बेहतर परिणाम के लिए हर रोज आपको यह प्रक्रिया तकरीबन 10 मिनट तक दुहराना चाहिए।

3. तीसरी विधि आपकी कल्पनात्मक शक्ति का परीक्षण है। इसके लिए आप पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। अपने हाथों तथा पैरों को फैलाकर रखें। अब एक जलती हुई मोमबत्ती की कल्पना करें। इस मोमबत्ती की गर्मी को अपने बाएं पैर में महसूस करें और इसे टखने, एड़ी, घुटने और जांघों से गुजारते हुए पेट, छाती, कंधों और गर्दन तक लाएं। फिर इस गर्मी के काल्पनिक अनुभव को अपने बाएं हाथ की ओर ले जाएं। यही प्रक्रिया दाहिनी ओर से भी दुहराएं।

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