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नहीं छूट रही स्मोकिंग? ये योगासन कर सकते हैं आपकी मदद

योग करने से आपके अंदर किसी भी कार्य को करने की इच्छाशक्ति बढ़ती है। साथ ही साथ इससे आप अपने ऊपर संयम रख पाने में भी सक्षम हो पाते हैं।

प्रतीकात्मक फोटो। (Source: dreamstime)

आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग तनाव दूर करने के लिए कई तरह के तरीके अपनाते हैं। सिगरेट पीना भी इन्हीं तरीकों में से एक है। एक बार सिगरेट पीने की लत लग जाने पर लाख कोशिशों के बाद भी उससे पीछा नहीं छूट पाता। सिगरेट की बुरी लत से परेशान बहुत से लोग अपनी इस आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी वो स्मोकिंग छोड़ने में सफल नहीं हो पाते। ऐसे में कुछ योगासन इस समस्या में आपकी मदद कर सकते हैं।

योग करने से आपके अंदर किसी भी कार्य को करने की इच्छाशक्ति बढ़ती है। साथ ही साथ इससे आप अपने ऊपर संयम रख पाने में भी सक्षम हो पाते हैं। ध्यान, एकाग्रता और शरीर की आंतरिक साफ-सफाई की वजह से आपमें अपने हित के संबंध में बेहतर निर्णय ले पाने की क्षमता विकसित होती है। इन सभी वजहों से आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद मिलती है। तो चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि सिगरेट छोड़ने की आपकी इच्छा शक्ति को मजबूत बनाने में कौन-कौन से आसन मददगार साबित हो सकते हैं।

1. सुखासन – सुखासन करने की विधि बड़ी सरल है। इसमें सिर और गर्दन को एक सीध में रखकर तथा रीढ़ की हड्डी को सीधा कर बैठना पड़ता है। दोनों पैरों को मोड़कर अपने हाथों को पैरों पर रख दें। इससे पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है। ज्यादातर लोग तनाव की वजह से ही सिगरेट पीना शुरू करते हैं। ऐसे में तनाव दूर करने के लिए इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।

2. कपालभाति प्राणायाम – कपालभाति प्राणायाम शरीर में रक्त के संचार को दुरुस्त करता है। इससे शरीर की तंत्रिकाएं ऊर्जा से भरपूर होती हैं। कपालभाति मस्तिष्क की कोशिकाओं को जीवंत करने में मददगार है। इससे आपकी इच्छाशक्ति मजबूत होती है जिससे आप सिगरे पीने की आदत को छोड़ने में मदद मिलती है।

3. अनुलोम-विलोम – अनुलोम विलोम नासिका छिद्रों से बारी-बारी सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया है। इससे दिमाग तो शांत रहता ही है साथ ही साथ तंत्रिका-तंत्र की सेहत भी बेहतर रहती है।

4. शवासन – शवासन सभी आसनों को कर लेने के बाद सबसे अंत में करना चाहिए। इसे करने के लिए एकाग्रता की बहुत जरूरत होती है। इसमें आपको अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़कर सीधा लेटना होता है। इस आसन को करते हुए शव जैसी स्थिति हो जाने की वजह से ही इसे शवासन कहा जाता है।

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