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पाइल्स के मरीज ट्राइ करें योग के ये आसन, मिल सकता है लाभ

इस परेशानी के चलते व्यक्ति की हालत बहुत ही ख़राब हो जाती है। बहुत से लोगों को तो इसका ऑपरेशन भी करवाना पड़ता है। लेकिन इस बीमारी को ठीक करने में योग भी अहम भूमिका निभा सकता है। योग के ऐसे कई आसन हैं जिनको करने के बाद आप बवासीर जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

योग के जरिए मानसिक तथा शारीरीक रोगों का इलाज किया जाता है। कई बार योग कई असाध्य रोगों के इलाज में भी काफी फायदेमंद साबित होता है। बदलती जीनव शैली और दिनभर की भागदौड़ का असर सबसे ज्यादा लोगों के खानपान पर पड़ता है। अनियमित खानपान कब्ज का प्रमुख कारण है जिसकी वजह से पाइल्स जैसी गंभीर समस्या आज आम हो गई है। पाइल्स को बवासीर और Hemorrhoids भी कहा जाता है। दरअसल बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं। जिसके चलते मल त्यागते वक्त बहुत दर्द महसूस होता है, साथ ही मलद्वार से खून भी आता है या खुजली होती है।

इस परेशानी के चलते व्यक्ति की हालत बहुत ही ख़राब हो जाती है। बहुत से लोगों को तो इसका ऑपरेशन भी करवाना पड़ता है। लेकिन इस बीमारी को ठीक करने में योग भी अहम भूमिका निभा सकता है। योग के ऐसे कई आसन हैं जिनको करने के बाद आप बवासीर जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आईए जानते हैं कौन-कौन से हैं वो उपयोगी आसन जिनको सही तरीके से करने पर आपको काफी लाभ मिल सकता है।

हलासन :
हलासन क्रिया आपके पीठ की मांसपेशियों से तनाव दूर करता है। इसे करने के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं फिर अपने पैरों को धीरे-धीरे उठाएं। आसन के दौरान सांस लेते हुए आपको अपने पैरों को उठाना है और 90 डिग्री तक ले जाना है। इसके बाद सांस छोड़ते हुए अपने पैरो को 120 डिग्री तक ले जाने का प्रयत्न करें। इसके बाद अपने पंजो को भूमि से लगाए, कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे फिर वापस आ जाएं। हलासन कब्ज, गैस, खाने का ना पचना जैसी समस्याओं को दूर करता है।

सर्वंगासन :
इस क्रिया को ठीक से करने के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों पैरों को साथ रखें और हाथों को कमर के पीछे रखें। फिर सांस अंदर की ओर लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर की और उठाएं। पहले 30 डिग्री के कोण तक उठाएं, फिर धीरे धीरे 90 डिग्री तक उठानें की कोशिश करें। कुछ सेकंड्स इसी अवस्था में बैठे रहे फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे दोनों पैरों को नीचे ले आएं और कुछ देर शवासन में लेटें। सर्वंगासन बवासीर को खत्म करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन ध्यान रखें अगर किसी को गर्दन या फिर कमर में दर्द की शिकायत है तो इस क्रिया को कतई ना करें।

पर्वतासन :
इस आसन को माउंटेन पोस के नाम से भी जाना जाता है। इसे करने के लिए किसी समतल जगह पर खड़े हो जाएं। अब अपने हाथो को ऊपर कर लें। इसके बाद सांस लेते हुए अपने पंजो को ऊपर उठाये, कुछ सेकंड्स इसी मुद्रा में बने रहे फिर नीचे आ जाएं। योग का यह आसन आपके पूरे शरीर को स्ट्रेच करने के लिए बहुत ही अच्छा व्यायाम माना जाता है। पर्वतासन गठिया रोग से निजात दिलाने में भी फायदेमंद है। इस आसन को करते वक्त शरीर की मुद्रा पर्वत जैसी हो जाती है इसलिए इसे पर्वतासन कहा जाता है।

बालासन:
यह आसन बवासीर को पूरी तरह से ठीक करने के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले तो घुटने मोड़कर बैठ जाएं अब हाथों को ऊपर उठाएं और आगे जमीन को और रख दें। अपने माथे को भी जमीन से छुएं…इस वक्त आपके शरीर की मुद्रा पेट में पल रहे बच्चे के समान होती है। आपका नितम्ब दोनों एडि़यों के बिच होना चाहिए। इस मुद्रा में कुछ सेकंड्स बने रहें।

विपरित करनी आसन:
विपरित करनी आसन शरीर में रक्त संचार को सुचारू बनाता है। गर्दन और कंधों में मौजूद तनाव को दूर करने में भी यह आसन काफी फायदेमंद है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले दीवार से करीब 3 इंच की दूरी पर कम्बल फैलाएं। पैरों को दीवाल की ओर फैलाकर कम्बल पर बैठ जाएं। शरीर के ऊपरी भाग को पीछे की ओर झुकाकर कम्बल पर लेट जाएं। इस अवस्था में दोनों पैर दीवार से ऊपर की ओर होने चाहिए। बांहों को शरीर से कुछ दूरी पर ज़मीन से लगाकर रखें। इस अवस्था में हथेलियां ऊपर की ओर की होनी चाहिए। सांस छोड़ते हुए सिर, गर्दन और मेरूदंड को ज़मीन से लगाएं। इस मुद्रा में 5 से 15 मिनट तक बने रहें। घुटनों को मोड़ेते हुए दायीं ओर घूम जाएं और फिर सामान्य अवस्था में बैठ जाएं।

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