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कुंजल क्रिया योगः नियमित करेंगे अभ्यास तो नहीं होंगे जल्दी बूढ़े, कफ और एसिडिटी की समस्या भी होगी दूर

कुंजल क्रिया के अभ्यास से लीवर, दिल और आंतो को काफी लाभ मिलता है। साथ ही साथ इससे मन और शरीर में हमेशा आनंद और स्फूति बनी रहती है।

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भक्ति सागर में ऋषियों ने शरीर की बाह्य एवं आंतरिक शुद्धियों के लिए छः प्रकार की क्रियाओं के बारे में बताया है। इन्हें षट्कर्म कहा जाता है। इन्हीं क्रियाओं में एक क्रिया है कुंजल क्रिया। कुंजल क्रिया से अनेक तरह के रोग बड़ी आसानी से ठीक हो सकते हैं। इसे करने से पूरे श्वसन तंत्र, अमाशय तथा फेफड़ों की शुद्धि हो जाती है। योगगुरू बाबा रामदेव इसे हफ्ते में एक बार जरूर करने की सलाह देते हैं। इसको करने से पाचन तंत्र पूरी तरह से दुरुस्त रहता है। साथ ही साथ बुढ़ापे के लक्षण बहुत देर से शरीर में आते हैं। आइए जानते हैं कुंजल क्रिया को करते कैसे हैं –

कैसे करते हैं कुंजल क्रिया – सुबह शौचादि से निवृत्त होकर इस क्रिया को करना ज्यादा लाभकारी होता है। इसे करने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में शुद्ध पानी को हल्का गर्म कर लें और कागासन में बैठकर पेट भर पानी पी लें। जब तक उल्टी आने का एहसास न हो तब तक पानी पिएं फिर पेट भर जाने के बाद खड़े होकर नाभि से नब्बे अंश का कोण बनाते हुए आगे की तरफ झुकें। अब हाथ को पेट पर रखते हुए दाएं हाथ की 2-3 अंगुलियों को मिलाकर मुंह के अन्दर जीभ के पिछले हिस्से तक ले जाएं और तेजी से घुमाएं। ऐसा करने से उल्टी होने लगेगी। अब उंगलियां बाहर निकाल लें। जब अन्दर का पिया हुआ सारा पानी बाहर निकल जाए तो पुनः तीनों अंगुलियों को जीभ के पिछले भाग पर घुमाएं और पानी को बाहर निकलने दें। इस क्रिया में पानी के साथ भोजन का बिना पचा हुआ खट्टा व कड़वा पानी भी निकल जाता है।

कुंजल क्रिया के लाभ – कुंजल क्रिया के अभ्यास से लीवर, दिल और आंतो को काफी लाभ मिलता है। साथ ही साथ इससे मन और शरीर में हमेशा आनंद और स्फूति बनी रहती है। इसके अलावा इससे वात, पित्त व कफ से होने वाले सभी रोग दूर हो जाते हैं तथा बदहजमी, गैस विकार और कब्ज आदि पेट संबंधी रोग भी समाप्त हो जाते हैं। कुंजल क्रिया से सर्दी, जुकाम, नजला, खांसी, दमा, कफ आदि रोग भी दूर हो जाते हैं। इस क्रिया से मुंह, जीभ और दांतों के रोग दूर होते हैं।

इन बातों का भी रखें ध्यान – कुंजल क्रिया के दौरान इस बात का खास ख्याल रखें कि पानी न तो अधिक गर्म हो और न अधिक ठंडा। साथ ही पानी में नमक भी न मिलाएं। इस क्रिया के दौरान शरीर की स्थिति को सही रखें। साथ ही साथ कुंजल क्रिया करने के दो से ढाई घंटे बाद ही स्नान करें। सूर्योदय से पहले कुंजल क्रिया करना ज्यादा लाभकारी होता है।

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