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जानिए क्या है 12 आसनों वाले सूर्य नमस्कार को करने की सही विधि, गलत तरीके से करना हो सकता है नुकसानदेह

10 अंगों की मदद से किए जाने वाले सूर्य नमस्कार में कुल 12 तरह के आसन होते हैं। इन आसनों से शरीर का संपूर्ण व्यायाम हो जाता है।

प्रतीकात्मक फोटो। (Source: Think stock )

योग संपूर्ण स्वास्थ्य पैकेज की तरह होता है। मतलब कि, शरीर के हर अंग की सेहत के लिए योग में कोई न कोई आसन जरूर मौजूद है। ऐसा ही एक योगासन है -सूर्य नमस्कार। 10 अंगों की मदद से किए जाने वाले सूर्य नमस्कार में कुल 12 तरह के आसन होते हैं। इन आसनों से शरीर का संपूर्ण व्यायाम हो जाता है। वजन कम करने में लगे लोगों को हर रोज इसका अभ्यास करना चाहिए। इसके अलावा त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने तथा बेदाग त्वचा के लिए भी यह योगासन बेहद लाभकारी होता है। इससे मसल्स मजबूत होते हैं और शरीर डिटॉक्स होता है।

सूर्य नमस्कार के आसन – सूर्य नमस्कार 12 आसनों की मदद से किया जाता है। आइए, जानते हैं कि ये आसन कौन से हैं और इन्हें कैसे किया जाता है।

प्रणामआसन – सीधे खड़ें हो जाएं और अपने दोनों पंजों को एक साथ मिलाएं। शरीर का धार दोनों पैरों पर दें। अब अपनी छाती फुलाएं और कंधे को ढ़ीला छोड़ें।

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हस्तउत्तानासन – सांस धीरे से अंदर की ओर खीचें और हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं। इस आसन को करने में शरीर के सारे हिस्सों में खिंचाव होता है। [ये भी पढ़ें: हलासन करने की विधि और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ]

अश्वसंचालन आसन – सांस को अंदर की ओर लेते हुए जितना हो सके पैरों को पीछे खींचें। अब दाएं खुटने को जमीन पर रखें और ऊपर की ओर देखें।

पर्वतआसन – सांस छोड़ते हुए कुल्हों और टेल बोन को ऊपर उठाएं। फिर छाती को वी शेप में रखें।

अष्टांग नमस्कार – अब अपने घुटनों को जमीन पर रखें और सांस छोड़ें और अपनी छाती और ठुड्डी को जमीन पर रखें।

भुजंगआसन – अपनी छाती को कोब्रा पोस्चर में ले जाएं। अपने कानों को कंधे से अलग रखें।

पर्वतआसन – सांस छोड़ते हुए कुल्हों और टेल बोन को ऊपर उठाएं। फिर छाती को वी शेप में रखें।

दंडासन – जैसे ही आप सांस अंदर की ओर लेते हैं वैसे ही बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधा कर लें। अपने हाथों को जमीन पर सीधा रखें।

अश्वसंचालनआसन – सांस लेते हुए दाहिना पैर दोनों हाथों के बीच ले जाएं, बाएं घुटने को ज़मीन पर रख सकते हैं। अपने चेहरे को ऊपर की ओर रखें।

हस्तपादआसन – सांस छोड़ें और दाएं पैर को आगे करें। दोनों हथेली को जमीन पर रखें। अगर जरूरत लगे तो घुटनों को मोड़ लें। कोशिश करें कि अपनी नाक को घुटनों से मिलाएं।

हस्तउत्थानआसन – सांस लेते हुए रीढ़ की हड्डी को धीरे-धीरे ऊपर लाएं, हाथों को ऊपर और पीछे की ओर ले जाएं, कुल्हों को आगे की तरफ रखें।

ताड़ासन – जैसे ही सांस छोड़ेंगे, सबसे पहले अपने शरीर को सीधा कर लें और हाथों को नीचे रख लें। अब आप रिलैक्स कर सकते हैं।

सावधानियां – सूर्य नमस्कार करते वक्त कुछ सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हैं। अन्यथा यह आपके लिए नुकसानदेह भी हो सकता है।

  • सूर्य नमस्कार जल्दबाजी में ना करें। इससे आपकी मुद्रा बिगड़ जाएगी और आप पूरी तरह अपने सांस पर ध्यान भी नहीं दे पाएंगें।
  • अर्ध उत्तानासना करते वक्त यदि आप स्पाइन को कम लिफ्ट करते हैं तो आर इससे होने वाले लाभ से वंचित रह जाएंगें। इस आसन को सही तरह से करने के लिए आपको गहरी सांस लेते हुए अपनी छाती को लिफ्ट करना चाहिए ताकि आपकी स्पाइन पूरी तरह से स्ट्रेच हो।
  • कोब्रा पोज और अपवॉर्ड फेसिंग डॉग पोज को एक-साथ ना करें, वरना आप दोनों के लाभ प्राप्त नहीं कर सकते हैं। कोब्रा पोज का अभ्यास अलग करें ताकि आपके शरीर को ताकत मिल सके।

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