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तनाव और जटिल से जटिल दर्द से निजात दिलाने वाला एक्सरसाइज है ‘अर्थिंग’, जानें कैसे करेंगे प्रैक्टिस

अर्थ यानी कि धरती एक बड़ी बैटरी की तरह होती है जिसमें न्यूट्रल चार्ज होता है। आज के दौर में लोगों की जमीन से दूरी काफी बढ़ गई है इसमें कोई दो राय नहीं है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

आधुनिक जीवनशैली खासकर शहरी जीवनशैली में अस्त-व्यस्तता एक बड़ी समस्या है। काम के बढ़ते बोझ, प्रतिद्वंद्विता, अनियमित खान-पान आदि की वजह से लोगों में मानसिक तनाव की समस्या बढ़ी है। इससे निपटने के प्राकृतिक तरीके मसलन- योगासन, व्यायाम आदि भी समय की कमी के चलते आसानी से फॉलो नहीं हो पाते। ऐसे में, लाइफस्टाइल की वजह से होने वाले तनाव को दूर करने में अर्थिंग काफी मददगार हो सकता है। अर्थिंग कोई कठिन व्यायाम नहीं है, जिसके लिए पर्याप्त समय की जरूरत हो। यह नंगे पैर जमीन पर कुछ देर टहलने का एक अभ्यास है, जिससे तनाव से बहुत राहत मिलती है।

क्या है अर्थिंग – अर्थ यानी धरती एक बड़ी बैटरी की तरह होती है जिसमें न्यूट्रल चार्ज होता है। आज के दौर में लोगों की जमीन से दूरी काफी बढ़ गई है, इसमें कोई दो राय नहीं है। ऐसे में, अर्थिंग एक प्रभावी प्रैक्टिस हो सकता है जिससे तनाव को कम किया जा सके। इसके लिए आपको किसी फिटनेस ट्रेनर की जरूरत नहीं। यह वास्तव में नंगे पांव जमीन पर चलने का अभ्यास है। इसमें हम अपना काम शुरू करने से पहले या काम खत्म करने के बाद घास पर, रेत पर या फिर किसी प्राकृतिक सतह पर कुछ देर तक नंगे पांव टहलते हैं। एक वक्त के बाद आपको इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगेगा।

अर्थिंग के फायदे –

1. ऐसा कहा जाता है कि धरती के गतिशील इलेक्ट्रॉन्स पावरफुल एंटी-ऑक्सीडेंट्स की तरह काम करते हैं। ऐसे में, यह हमारे शरीर के फ्री रैडिकल्स से मुक्त कर उनसे होने वाले रोगों से बचाते हैं।

2. अर्थिंग से जटिल से जटिल दर्द को जड़ से खत्म किया जा सकता है। माना जाता है कि व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति को भी अर्थिंग का अभ्यास कराया जाए तो हैरतअंगेज फायदे मिलते हैं। इसके लिए पांवों को केवल जमीन से स्पर्श कराना ही काफी होगा।

3. अर्थिंग का अभ्यास सकारात्मक और तनावरहित जीवन के लिए मददगार होता है। यह शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है और आपकी नींद में सुधार लाता है।

4. नियमित अर्थिंग करने से शरीर को पर्याप्त एनर्जी मिलती है।


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