ताज़ा खबर
 

Happy Women’s Day 2018 Shayari: इन शानदार कविताओं, शायरियों और Wallpaper से दीजिए अपने दोस्तों, बहनों और टीचर्स को शुभकामनाएं

Happy International Women's Day 2018: शोषण और पराधीनता के पाश में फंसी नारी जाति की स्वतंत्र चेतना की महत्ता को दर्शाते हुए तमाम साहित्यकारों ने अपनी कलम चलाई है।

Happy Women’s Day 2018 Wishes Messages, SMS: शोषण और पराधीनता के पाश में फंसी नारी जाति की स्वतंत्र चेतना की महत्ता को दर्शाते हुए तमाम साहित्यकारों ने अपनी कलम चलाई है।

Happy Women’s Day 2018 Wishes Messages, SMS: 8 मार्च को हर वर्ष दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाओं के त्याग, बलिदान और समाज में उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए इस दिन तमाम तरह के आयोजन होते हैं। शोषण और पराधीनता के पाश में फंसी नारी जाति की स्वतंत्र चेतना की महत्ता को दर्शाते हुए तमाम साहित्यकारों ने अपनी कलम चलाई है। नारी की शक्ति, उनकी महत्ता और समाज में उन्हें बराबरी दिलाने के उद्देश्य को इंगित करते हुए लिखी गई ये कविताएं और शायरियां  महिला दिवस पर दिए जाने वाले भाषणों और शुभकामनाओं के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।

महिला दिवस पर आज हम आपको ऐसी ही कुछ कविताओं और शायरियों के बारे में बताने वाले हैं। ऐसी रचनाएं जो नारी के महत्व, आत्मसम्मान और उनकी शक्ति की परिचायक हैं। साथ ही महिला दिवस की शुभकामनाएं भेजने के लिए कुछ तस्वीरें भी संलग्न हैं। आप इनका इस्तेमाल भी इंटरनेशल वुमेन्स डे के मौके पर कर सकते हैं।

एक नहीं दो-दो मात्राएं, नर से भारी नारी।
-मैथिली शरण गुप्त

नारी! तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास-रजत-नग पगतल में,
पीयूष-स्रोत बन बहा करो जीवन के सुंदर समतल में।
-जयशंकर प्रसाद

 

उनको भी है जीने का अधिकार उन्हें भी जीने दो
देना या मत देना अपना प्यार उन्हें भी जीने दो ।

नारी की ताकत को नर ने कम करके पहचाना
रचा महाभारत देती वो जब-जब उसने ठाना
वो दुर्गा है, वो लक्ष्मी, वो सरस्वती वो सीता
जब सीता का प्यार मिला हर युद्ध राम ने जीता
सीता विमुख हुईं तो खाई लव-कुश से भी हार ।
उन्हें भी जीने दो ।
– उदयप्रताप सिंह

कद्र अब तक तेरी तारीख ने जानी ही नहीं,
रौशनी भी तेरी आँखों में है, पानी ही नहीं,
हार तूने कभी तकदीर से मानी ही नहीं।
तू हकीकत भी है, दिलचस्प कहानी ही नहीं।
हर अदा तेरी क़यामत है, जवानी ही नहीं।
अपनी तारीख का उनवान बदलना है तुझे,
उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे।
-कैफी आजमी

दिल की धड़कन को कौन समझेगा।
मेरी उलझन को कौन समझेगा।
एक बेटी नहीं अगर घर में
घर के आंगन को कौन समझेगा।
-राना तबस्सुम

शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास,
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं।
– मुनीर नियाज़ी

औरतें कहतीं भविष्यत की अगर कुछ बात,
नर उन्हें डाइन बताकर दंड देता है।
पर, भविष्यत का कथन जब नर कहीं करता,
हम उसे भगवान का अवतार कहते हैं।
-रामधारी सिंह दिनकर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App