scorecardresearch

प्रेग्नेंसी के दौरान क्यों बढ़ जाता है ब्लड शुगर? जानिये- गर्भावस्था के दौरान कितना होना Blood Sugar

गर्भवती महिलाओं का शुगर लेवल फास्टिंग में 95 mg/dL या उससे कम होना चाहिए।

hand-holding-blood-glucose-meter-measuring-blood-sugar
ब्लड शुगर या ग्लूकोज शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। (फोटो क्रेडिट – Freepik)

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में कई तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं। उन्हीं में से एक है ब्लड शुगर का बढ़ना। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कुछ परिस्थितियों में महिलाओं के शरीर में ब्लड शुगर का स्तर काफी बढ़ जाता है। इसे गर्भकालीन डायबिटीज या फिर गेस्‍टेशनल डायबिटीज भी कहा जाता है। कैलाश हॉस्पिटल नोएडा की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंवदा त्यागी कहती हैं ‘भारत में करीबन 10 फीसद महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान शुगर बढ़ने की शिकायत रहती है।’

क्यों होती है ये बीमारी?: डॉ. त्यागी कहती हैं कि हमारे शरीर में पैंक्रियाज की मदद से इंसुलिन हार्मोन बनता है। इंसुलिन शरीर में ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद करता है। गर्भावस्था में इंसुलिन की जरूरत बढ़ जाती है। अगर किसी कारण से शरीर को इंसुलिन की जरूरत पूरी नहीं होती तो ऐसे में शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।

किन महिलाओं को हो सकती है गेस्‍टेशनल डायबिटीज? ऐसी महिलाएं जिनकी उम्र 35 साल से ज्यादा है। गर्भावस्था से पहले मोटापा, जेनेटिक वजह, गर्भावस्था से पहले पीसीओएस या पीसीओडी की समस्या, गर्भावस्था से पहले टाइप 2 डायबिटीज की समस्या रही हो, पिछली प्रेग्नेंसी में डायबिटीज रहा हो…ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान गेस्‍टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक रहता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज कितना है खतरनाक? गेस्‍टेशनल डायबिटीज मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है। मां को हाई बीपी की शिकायत, जल्दी डिलीवरी, सिजेरियन डिलीवरी इत्यादि की समस्याएं हो सकती हैं। वही बच्चे में डिलीवरी के बाद पीलिया, अधिक वजन, शुगर लेवल का कम होना, शरीर में कैल्शियम की कमी या फिर सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

प्रेग्नेंसी में कितना होना चाहिए Blood Sugar: प्रेग्नेंसी के दौरान शुगर लेवल का कंट्रोल रहना बहुत जरूरी है। अन्यथा मां और बच्चे दोनों को दिक्कतें हो सकती हैं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के मुताबिक गर्भवती महिलाओं का शुगर लेवल फास्टिंग में 95 mg/dL या उससे कम होना चाहिए। इसी तरह खाने के घंटे भर बाद 140 mg/dL या कम, खाने के दो घंटे बाद 120 mg/dL होना चाहिए। अगर शुगर लेवल इससे ज्यादा हो तो अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

इन बातों का रखें ध्यान:

– नियंत्रित खानपान रखें। शुगर के अधिक सेवन से बचें

– डाइट में प्रोटीन की मात्रा अधिक रखें

– आपको क्या खाना है और कब-कितना खाना है, अपनी गाइनाकोलॉजिस्ट से जरूर पूछें

– डॉक्टर के सुझाव पर ही व्यायाम या योग आदि करें

पढें जीवन-शैली (Lifestyle News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट