भारत अपनी समृद्ध हस्तशिल्प परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। जयपुर की ब्लू पॉटरी, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और कांचीपुरम की रेशमी साड़ियों की तरह उत्तर प्रदेश का भदोही अपने खूबसूरत हस्तनिर्मित कालीनों (हैंडमेड कार्पेट) के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यही वजह है कि भदोही को ‘भारत की कार्पेट सिटी’ (कार्पेट सिटी ऑफ इंडिया) कहा जाता है।
क्यों कहलाता है भदोही भारत की कार्पेट सिटी?
भदोही में कालीन बुनाई की परंपरा कई सौ साल पुरानी मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार, मुगल काल में फारसी (पर्शियन) कालीन बुनाई की तकनीक भारत आई, जिसे स्थानीय कारीगरों ने भारतीय कला और डिजाइनों के साथ मिलाकर एक नई पहचान दी। समय के साथ भदोही के हैंडमेड कार्पेट अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइनों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय हो गए।
आज भी यहां कालीन बुनाई केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही पारिवारिक विरासत है। कई परिवारों में बच्चे अपने बड़ों से यह कला सीखते हैं और इसे आगे बढ़ाते हैं।
दुनिया के 100 से अधिक देशों में पहुंचते हैं भदोही के कालीन
भदोही भारत के सबसे बड़े हैंडमेड कार्पेट उत्पादन केंद्रों में से एक है। यहां बने कालीन अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट सहित 100 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं।
माना जाता है कि भारत से होने वाले हैंडमेड कालीनों के निर्यात में लगभग 70 प्रतिशत योगदान अकेले भदोही क्षेत्र का है। यहां के कालीन दुनिया के लग्जरी होटल, कॉर्पोरेट ऑफिस, महलों और आलीशान घरों की शोभा बढ़ाते हैं।
कैसे तैयार होता है एक हस्तनिर्मित कालीन?
मशीन से बने कालीनों की तुलना में हाथ से बुना गया कालीन तैयार करने में कई सप्ताह या कई महीने लग सकते हैं। कारीगर ऊर्ध्वाधर करघों (वर्टिकल लूम्स) पर बैठकर एक-एक गांठ हाथ से बांधते हैं। जटिल डिजाइनों वाले एक कालीन में लाखों गांठें हो सकती हैं।
इसके लिए न्यूजीलैंड और भारतीय ऊन, रेशम तथा कपास जैसी हाई क्वालिटी वाली सामग्री का उपयोग किया जाता है। बुनाई पूरी होने के बाद कालीन को धोया जाता है, फैलाकर सुखाया जाता है, ट्रिमिंग की जाती है और गुणवत्ता जांच के बाद निर्यात के लिए तैयार किया जाता है।
हजारों लोगों की आजीविका का आधार
भदोही में कालीन उद्योग केवल कारीगरों तक सीमित नहीं है। इससे बुनकर, रंगाई करने वाले, डिजाइनर, व्यापारी और हजारों अन्य लोग जुड़े हुए हैं। यह उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का प्रमुख स्रोत है।
मिला है जीआई (GI) टैग
भदोही के हस्तनिर्मित कालीनों की अलग पहचान और ट्रेडिशनल क्राफ्ट को प्रोटेक्ट करने के लिए वर्ष 2010 में इन्हें भौगोलिक संकेतक (जियोग्राफिकल इंडिकेशन-GI) टैग प्रदान किया गया। यह टैग प्रमाणित करता है कि भदोही के कालीन अपनी क्वालिटी, ट्रेडिशनल टेक्निक्स और क्षेत्रीय पहचान के कारण खास महत्व रखते हैं।
इंडिया कार्पेट एक्सपो का भी होता है आयोजन
भदोही में समय-समय पर इंडिया कार्पेट एक्सपो का आयोजन किया जाता है, जहां देश-विदेश के खरीदार और निर्यातक पहुंचते हैं। यह आयोजन इंडियन हैंडमेड कार्पेट इंडस्ट्री को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्यों है भदोही की वैश्विक पहचान?
भदोही के कालीन अपनी बारीक कारीगरी, टिकाऊ क्वालिटी और अनूठे डिजाइनों के लिए दुनिया भर में पसंद किए जाते हैं। मशीन से बने कालीनों के बढ़ते चलन के बावजूद यहां के हस्तनिर्मित कालीनों की मांग आज भी बनी हुई है, क्योंकि हर कालीन अपने आप में एक यूनिक आर्टवर्क होता है।
अगर आप भारतीय हस्तशिल्प की असली झलक देखना चाहते हैं, तो भदोही केवल खरीदारी की जगह नहीं, बल्कि सदियों पुरानी बुनाई कला को करीब से देखने का एक अनोखा अनुभव भी है। उत्तर प्रदेश का यह छोटा-सा शहर आज भी अपने कालीनों के माध्यम से भारत की रिच कल्चरल हेरिटेज को पूरी दुनिया तक पहुंचा रहा है।
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